Saturday , 1 August 2026

ताहिर हुसैन को फांसी क्यों नहीं मिली…’जानें- अंकित मर्डर को कोर्ट ने क्यों नहीं माना ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’

नई दिल्ली। साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के जांबाज अधिकारी स्वर्गीय अंकित शर्मा की निर्मम हत्या के मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित 5 आरोपियों को हत्या (IPC 302) और साजिश रचने के जुर्म में आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस बर्बर कांड को अंजाम देने वाले ताहिर हुसैन व अन्य दोषियों के लिए फांसी (मृत्युदंड) की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभतम में से दुर्लभ) मामला मानने से इनकार कर दिया।

किन-किन दोषियों को मिली सजा और कितना लगा जुर्माना?

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) प्रवीण सिंह की अदालत ने सभी 5 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान किया:

  1. ताहिर हुसैन: हत्या (IPC 302) के तहत उम्रकैद के अलावा धारा 188, 147, 148, 153A और 365 के तहत अलग-अलग सजा। ताहिर पर ₹5 लाख से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया।

  2. नाजिम: आजीवन कारावास और अर्थदंड।

  3. कासिम: आजीवन कारावास और अर्थदंड।

  4. जावेद: आजीवन कारावास और अर्थदंड।

  5. अनस: आजीवन कारावास और अर्थदंड।

नोट: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ताहिर हुसैन की सभी सजाएं साथ-साथ (Concurrent) चलेंगी।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने फांसी देने से क्यों किया इनकार?

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने तर्क दिया था कि दोषियों ने अंकित शर्मा पर जिस तरह जानलेवा हमला किया, वह इंसानी क्रूरता की हद पार करता है। हालांकि, अदालत ने अभियोजन पक्ष के ‘मौत की सजा’ के अनुरोध को खारिज करते हुए निम्नलिखित बिंदु दिए:

  • सुधार की संभावना: जज प्रवीण सिंह ने स्पष्ट किया कि कानून के मुताबिक मौत की सजा तभी दी जा सकती है, जब यह साबित हो जाए कि दोषियों में सुधार की शून्य संभावना है। पुलिस यह साबित करने में विफल रही कि आरोपी जन्मजात हिंसक प्रवृत्ति के हैं।

  • कम शैक्षणिक स्तर बना राहत का आधार: कोर्ट ने माना कि कासिम, नाजिम और जावेद अनपढ़ हैं, जबकि अनस केवल चौथी पास है। दंगे के दौरान तनावपूर्ण माहौल में ऐसे कम पढ़े-लिखे लोगों को असमाजिक तत्वों द्वारा आसानी से भड़काया और बरगलाया जा सकता था।

  • जेल में व्यवहार: कोर्ट ने नोट किया कि जेल के दौरान ताहिर, कासिम और नाजिम का आचरण संतोषजनक रहा, जो उनके सुधरने की संभावना को दर्शाता है।

‘लॉन्चपैड’ की दलील खारिज, सजा पर आया ताहिर और अंकित के परिवार का रिएक्शन

  • ताहिर हुसैन का दावा: कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए ताहिर हुसैन ने फैसले पर प्रतिक्रिया दी, “इंसाफ हाई कोर्ट से मिलेगा। मैच फिक्स था, हाई कोर्ट न्याय देगा, देर है पर अंधेर नहीं।”

  • अंकित शर्मा के परिवार की मांग: अंकित के भाई अंकुर शर्मा ने कहा कि उनके भाई के शरीर पर 55 चाकुओं के घाव थे, उन्हें तेजाब से जलाकर नाले में फेंका गया था। परिवार ने मांग की कि राज्य सरकार को इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील कर फांसी की मांग करनी चाहिए।

दिल्ली की सियासत में फिर गरमाया ‘दंगा विवाद’

फैसले के आते ही दिल्ली का राजनीतिक पारा चढ़ गया है:

  • आम आदमी पार्टी (AAP): आप प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दूरी बनाते हुए कहा कि ताहिर को एफआईआर दर्ज होते ही पार्टी से निकाल दिया गया था और वह अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी के संपर्क में काम कर रहा था।

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया दंगों के समय ताहिर हुसैन का बचाव कर रहे थे, जिसके लिए उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।

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