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‘मंगलसूत्र’: क्यों हर विवाहित महिला के लिए खास है यह ‘पवित्र धागा’? जानें सोना और काले मोतियों के पीछे का गहरा राज

भारतीय संस्कृति में विवाह को एक संस्कार माना गया है, और इस संस्कार का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक है ‘मंगलसूत्र’। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी पहले थी। मंगलसूत्र केवल सोने और काले मोतियों का मेल नहीं है, बल्कि यह एक पत्नी का अपने पति के प्रति प्रेम, समर्पण और विश्वास का पवित्र धागा है। बदलते दौर में इसके स्वरूप भले ही बदल गए हों, लेकिन इसकी आध्यात्मिक गहराई आज भी कायम है।

क्या है मंगलसूत्र का असली अर्थ?

‘मंगलसूत्र’ दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘मंगल’ यानी पवित्र और ‘सूत्र’ यानी धागा। विवाह के समय जब वर वधू के गले में इसे बांधता है, तो वह उसे अपने जीवन का हिस्सा स्वीकार करने की प्रतिज्ञा करता है। यह इस बात का संकेत है कि अब दोनों का जीवन एक-दूसरे से जुड़ चुका है।

सोना और काले मोती: सुरक्षा और समृद्धि का संगम

मंगलसूत्र की बनावट में छिपे अर्थ इसे बेहद खास बनाते हैं:

  • सोना: मंगलसूत्र में लगा सोना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोना गुरु ग्रह (बृहस्पति) को प्रभावित करता है, जिससे वैवाहिक जीवन में सुख और शांति बनी रहती है।

  • काले मोती: काले मोतियों को नकारात्मक शक्तियों और ‘बुरी नजर’ से बचाने वाला कवच माना जाता है। मान्यता है कि ये मोती वैवाहिक सुख को बाहरी बाधाओं से सुरक्षित रखते हैं।

आस्था और लंबी उम्र का अटूट विश्वास

भारतीय समाज में यह गहरी आस्था है कि मंगलसूत्र धारण करने से पति की आयु लंबी होती है और परिवार पर आने वाले संकट टल जाते हैं। हालांकि, इसे वैज्ञानिक रूप से सिद्ध करना कठिन है, लेकिन करोड़ों महिलाओं के लिए यह उनके सुहाग की सलामती और ईश्वर के प्रति उनके अटूट विश्वास का प्रतीक है।

आधुनिकता के साथ बदलता स्वरूप

आज के दौर में मंगलसूत्र सिर्फ परंपरा तक सीमित नहीं रह गया है। कामकाजी महिलाओं और आधुनिक जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए इसके डिजाइनों में काफी बदलाव आए हैं।

  1. फैशन और ट्रेडिशन: अब पारंपरिक लंबे मंगलसूत्र की जगह ‘मिनिमलिस्टिक’ और डेली वियर डिजाइन लोकप्रिय हो रहे हैं।

  2. डायमंड और ब्रेसलेट स्टाइल: कई महिलाएं अब गले के बजाय हाथों में ब्रेसलेट के रूप में मंगलसूत्र पहनना पसंद करती हैं, जो ऑफिस वियर के साथ भी जचता है।

  3. पर्सनलाइज्ड डिजाइन: अब लोग अपने नाम के पहले अक्षर या खास प्रतीकों वाले कस्टमाइज्ड मंगलसूत्र बनवा रहे हैं।

धार्मिक प्रतीक या व्यक्तिगत पसंद?

वर्तमान समय में मंगलसूत्र पहनना काफी हद तक व्यक्तिगत पसंद बन गया है। जहां ग्रामीण इलाकों और पारंपरिक परिवारों में इसे अनिवार्य माना जाता है, वहीं शहरों में इसे एक ‘स्टेटमेंट ज्वेलरी’ के तौर पर भी देखा जाता है। हालांकि, स्वरूप चाहे जो भी हो, इसके पीछे की भावना— यानी प्रेम और जिम्मेदारी— आज भी वैसी ही है।

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