Tuesday , 30 June 2026

अखिलेश यादव के सामने स्टूल पर पैर रखकर क्यों बैठे बुजुर्ग नेता? जानें सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर का असली सच

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोर रही है। इस वायरल फोटो में सपा के संस्थापक सदस्य और वयोवृद्ध राजनेता कुंवर रेवती रमण सिंह, अखिलेश यादव के सामने एक स्टूल पर पैर रखकर बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं। इंटरनेट पर इस तस्वीर के सामने आते ही कुछ लोग इसे राजनीतिक शिष्टाचार की कमी और अपमान से जोड़कर तरह-तरह की कयासबाजी करने लगे। लेकिन, इस तस्वीर के पीछे का सच किसी सियासत से नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय और स्वास्थ्यगत कारण से जुड़ा हुआ है।

अपमान नहीं, गंभीर बीमारी है वजह; डॉक्टरों की सलाह पर लिया सहारा

सोशल मीडिया पर चल रही तमाम अफवाहों के उलट हकीकत यह है कि 80 वर्ष से अधिक आयु के कुंवर रेवती रमण सिंह पिछले लंबे समय से पैरों की एक गंभीर मेडिकल कंडीशन (बीमारी) से जूझ रहे हैं। बढ़ती उम्र और शारीरिक दिक्कतों के कारण वे अपने पैरों को ज्यादा देर तक जमीन पर सीधा या नीचे लटकाकर नहीं रख सकते। डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी है कि वे जब भी बैठें, पैरों को आराम देने के लिए सामने किसी ऊंची जगह या स्टूल पर टिकाकर रखें। यही वजह है कि जब अखिलेश यादव खुद प्रयागराज में उनके आवास (अशोक नगर कोठी) पर उनका कुशलक्षेम जानने और आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीतियों पर चर्चा करने पहुंचे, तो बुजुर्ग नेता ने अपनी शारीरिक सहजता के अनुसार स्टूल का सहारा लिया।

कौन हैं कुंवर रेवती रमण सिंह? जिन्होंने मुरली मनोहर जोशी को दी थी शिकस्त

कुंवर रेवती रमण सिंह उत्तर प्रदेश और विशेषकर प्रयागराज (इलाहाबाद) बेल्ट के सबसे कद्दावर और सम्मानित राजनेताओं में गिने जाते हैं। उनका राजनीतिक कद बेहद ऊंचा रहा है; वे 8 बार विधानसभा के सदस्य (विधायक), 2 बार लोकसभा सांसद (2004 और 2009) और 1 बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उनके नाम एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि यह भी दर्ज है कि 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी को इलाहाबाद सीट पर पटखनी दी थी। वर्तमान में उनके बेटे उज्जवल रमण सिंह इलाहाबाद संसदीय सीट से कांग्रेस के टिकट पर सांसद हैं।

मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी और सपा के संस्थापक सदस्य

कुंवर रेवती रमण सिंह का समाजवादी पार्टी और उसके संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के साथ नाता दशकों पुराना और अटूट रहा है। वह उन चुनिंदा चेहरों में से एक हैं जिन्होंने मुलायम सिंह यादव के कंधे से कंधा मिलाकर समाजवादी पार्टी की नींव रखी थी। वे पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं और मुलायम सिंह यादव के सबसे भरोसेमंद व घनिष्ठ मित्रों में से एक माने जाते थे। जब भी उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकारें बनीं, रेवती रमण सिंह ने कैबिनेट में सबसे वरिष्ठ और महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

नाराजगी के बाद भी अखिलेश यादव ने क्यों दिया इतना सम्मान?

हालांकि, पिछले कुछ समय में अखिलेश यादव और सिंह परिवार के बीच रिश्तों में थोड़ी खटास की खबरें आई थीं। साल 2022 में राज्यसभा का टिकट न मिलने और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद सीट गठबंधन के तहत कांग्रेस के खाते में चले जाने से सिंह परिवार नाराज था। इसी नाराजगी के चलते उनके बेटे उज्जवल रमण सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था और बीजेपी उम्मीदवार को हराकर पहली बार सांसद बने। इसके बावजूद, अखिलेश यादव रेवती रमण सिंह के पुराने योगदान और अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण उनका बेहद सम्मान करते हैं। यही वजह है कि कड़वाहट भूलकर अखिलेश खुद उनके घर पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई।

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