Sunday , 18 October 2026

UP Rajya Sabha Chunav: यूपी में 10वीं राज्यसभा सीट पर फंसा पेंच, अखिलेश के तीसरे दांव से BJP की बढ़ी धड़कनें; समझें पूरा नंबर गेम

ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी बिगुल बजते ही सूबे का सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। आगामी 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले छिड़ी यह जंग सिर्फ उच्च सदन तक पहुंचने की नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच सीधा शक्ति परीक्षण मानी जा रही है। मुकाबले की असली धुरी बन चुकी है 10वीं सीट, जिस पर जीत हासिल करने के लिए न तो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के पास अपने दम पर पूरा आंकड़ा है और न ही मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के पास। इस असमंजस के माहौल में सपा मुखिया अखिलेश यादव द्वारा घोषित दो प्रत्याशियों के अतिरिक्त तीसरा उम्मीदवार उतारने की रणनीति ने चुनावी रण को बेहद रोमांचक बना दिया है। वहीं, संभावित क्रॉस वोटिंग के खतरे को भांपते हुए भाजपा ने भी अपने विधायकों की किलेबंदी मजबूत कर दी है।

10वीं सीट बनी नाक का सवाल, मनोवैज्ञानिक बढ़त की जंग

सियासी गलियारों में यह चुनाव महज एक अतिरिक्त सांसद भेजने की कवायद भर नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतदाताओं के बीच मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने का बड़ा अवसर है। जानकारों का मानना है कि यदि समाजवादी पार्टी तमाम समीकरणों को साधते हुए इस 10वीं सीट पर बाजी मारने में सफल रहती है, तो यह सत्ताधारी दल के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा। इससे न केवल जनता में एक अलग संदेश जाएगा, बल्कि विपक्ष के कार्यकर्ताओं में भारी जोश भी भर जाएगा। इसी वजह से दोनों ही खेमे अपनी-अपनी बिसात बिछाने में दिन-रात एक कर रहे हैं।

विधानसभा का गणित: एक सीट के लिए चाहिए 37 पहली पसंद के वोट

उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में पिछले 11 महीनों के भीतर सात मौजूदा विधायकों के असामयिक निधन के चलते वर्तमान में कुल सदस्य संख्या घटकर 396 रह गई है। इस बदले हुए समीकरण के तहत एक राज्यसभा प्रत्याशी को जीत के लिए प्रथम वरीयता के 37 मतों की दरकार होगी। समाजवादी पार्टी के अपने 101 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 2 विधायकों का साथ मिलने से गठबंधन का कुल संख्या बल 103 पहुंचता है। पार्टी ने अनुभवी नेता व पांच बार के सांसद राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव धनराज नाथवानी को अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है। अपने इन दोनों उम्मीदवारों को सुरक्षित संसद भेजने के लिए सपा को कुल 74 मतों (37 × 2) की जरूरत पड़ेगी। इसके बाद सपा के पाले में 29 अतिरिक्त वोट शेष बच जाते हैं।

अखिलेश का तीसरा प्रत्याशी और आठ वोटों की तलाश

यदि सपा नेतृत्व तीसरे चेहरे को मैदान में उतारने का औपचारिक फैसला लेता है, तो उसे अपनी जीत तय करने के लिए 8 और विधायकों (37 – 29) की मदद लेनी होगी। अखिलेश यादव ने तीसरे उम्मीदवार के चयन को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाते हुए कार्यकर्ताओं और नेताओं को धैर्य रखने की सलाह दी है। सपा खेमे को पूरी उम्मीद है कि एनडीए गठबंधन के भीतर कई ऐसे असंतुष्ट विधायक मौजूद हैं, जो सही वक्त आने पर उनके पक्ष में लामबंद हो सकते हैं।

एनडीए का कुनबा और भाजपा के सामने 2 वोटों की चुनौती

दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष के संख्या बल की बात करें तो भाजपा के पास अपने 255 विधायक मौजूद हैं। सहयोगी दलों के साथ मिलकर एनडीए का कुनबा मजबूत दिखाई देता है, जिसमें अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के 6 और निषाद पार्टी के 5 सदस्य शामिल हैं, जिससे गठबंधन का आंकड़ा 288 पर पहुंच जाता है। इसके अतिरिक्त, पूर्व सपा विधायक पूजा पाल का समर्थन भाजपा के साथ है। साथ ही निर्दलीय विधायक मनोज पांडे, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह तथा जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के मुखिया रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ के 2 विधायकों को जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 294 तक पहुंच जाती है।

भाजपा यदि अपने आठ प्रत्याशियों को मैदान में उतारती है, तो उसे आठों को जिताने के लिए 296 वोटों (8 × 37) की जरूरत पड़ेगी। इस प्रकार, अपने आठवें यानी सदन की कुल 10वीं सीट पर जीत दर्ज करने के लिए भाजपा को मौजूदा समर्थन से 2 अतिरिक्त वोटों (296 – 294) की सख्त दरकार होगी। यह कमी बिना क्रॉस वोटिंग के पूरी नहीं की जा सकती।

क्रॉस वोटिंग का डर और 2024 की पुनरावृत्ति की उम्मीद

इस नाजुक आंकड़े के बीच भाजपा रणनीतिकारों को एसबीएसपी के कुछ विधायकों की निष्ठा को लेकर क्रॉस वोटिंग की आशंका सता रही है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल को सपा के उन बागी विधायकों से बड़ी उम्मीदें बंधी हैं, जिन्होंने साल 2024 के पिछले राज्यसभा चुनाव में भी खुलकर क्रॉस वोटिंग की थी। भाजपा की नजरें राकेश पांडे, विनोद चतुर्वेदी और आशुतोष मौर्य जैसे सपा विधायकों पर टिकी हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि 16 अक्टूबर को बैलेट बॉक्स में किसका चुनावी गणित सटीक बैठता है और 10वीं सीट का सिकंदर कौन बनता है।

 

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