
लखनऊ उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी के खेमे में मतदाता सूची को लेकर हलचल तेज हो गई है। राजधानी लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की अहम बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वोटर लिस्ट से जुड़ा एक ऐसा चौंकाने वाला आंकड़ा सामने रखा, जिसने संगठन से लेकर सत्ता के गलियारों तक मंथन का दौर शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद प्रदेश की मतदाता सूची में अब महज 13 करोड़ के आसपास नाम शेष रह गए हैं, जबकि करीब 1 करोड़ 27 लाख हिंदू मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब हैं। मुख्यमंत्री ने पार्टी पदाधिकारियों, विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं को सचेत करते हुए कहा कि यदि इन छूटे हुए नामों को दोबारा जोड़ने में तेजी नहीं दिखाई गई, तो आगामी चुनावी संग्राम में पार्टी को बड़ा सियासी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
28 नगरीय सीटों पर हार का डर और 43 सीटों पर कड़े मुकाबले की चुनौती
कार्यसमिति के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंकड़ों की जमीनी हकीकत समझाते हुए चेताया कि गायब हुए इन 1.27 करोड़ मतदाताओं की भरपाई न होने की स्थिति में प्रदेश की 28 प्रमुख शहरी विधानसभा सीटों पर भाजपा के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसके साथ ही सूबे की 43 विधानसभा सीटों को सीधे तौर पर ‘एज’ यानी कांटे की टक्कर के मुहाने पर बताया गया है, जहां चंद वोटों का उलटफेर भी चुनावी नतीजों का रुख पूरी तरह बदल सकता है। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि 2027 की चुनावी तैयारी कागजों पर नहीं बल्कि पोलिंग बूथ की मतदाता सूची को दुरुस्त करके ही मुकम्मल होगी। संगठन के प्रत्येक स्तर के पदाधिकारी को इस जमीनी विसंगति को मिशन मोड में लेकर ठीक करना होगा।
पंचायत की सूची में नाम पर विधानसभा से बाहर, आंकड़ों का पूरा गणित
वोटर लिस्ट में नाम कटने की इस गंभीर विसंगति को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने श्रेणीवार ब्योरा पेश किया। सामने आए आंकड़ों के अनुसार लगभग 66 लाख नागरिक ऐसे पाए गए हैं, जिनके नाम ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में तो दर्ज हैं लेकिन विधानसभा मतदाता सूची से पूरी तरह नदारद हैं। इसी तरह तकरीबन 55 लाख ऐसे पात्र लाभार्थी चिन्हित किए गए हैं जो सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठा रहे हैं, मगर उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल ही नहीं है। इतना ही नहीं, 18 वर्ष की पात्रता उम्र पार कर चुके अथवा उसके बेहद करीब खड़े करीब 4 लाख 50 हजार नवयुवकों के नाम भी मतदाता सूची से बाहर हैं। नेतृत्व ने निर्देश दिया है कि इन तमाम वर्गों के छूटे हुए मतदाताओं को प्राथमिकता के आधार पर मतदाता सूची में दर्ज कराया जाए।
‘कमल साथी ऐप’ से घर-घर दस्तक देने का निर्देश, 12 नवंबर की डेडलाइन तय
इस गंभीर संकट से पार पाने के लिए मुख्यमंत्री ने केवल आगाह करने तक ही सीमित न रहते हुए तुरंत रणनीति भी तय कर दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और विधायकों को निर्देश दिया कि वे संगठन के डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कमल साथी ऐप’ के जरिए तुरंत मैदान में उतरें। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस ऐप पर संबंधित विधानसभा और बूथवार छूटे मतदाताओं का संपूर्ण डेटा उपलब्ध है, जिसके सहारे कार्यकर्ताओं को चिन्हित मतदाताओं तक सीधे संपर्क साधना होगा। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि 12 नवंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने जा रही है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं के पास ड्राफ्ट जारी होने से पहले और उसके तुरंत बाद दावे व आपत्तियां दर्ज कराकर संशोधन कराने का अहम मौका रहेगा।
चार लाख नाम जुड़ने पर बरपे सीएम योगी, ढिलाई को बताया घातक समीक्षा के दौरान पूर्व में चलाए गए मतदाता पुनरीक्षण अभियान की धीमी गति पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने पदाधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पिछले अभियान में पूरे प्रदेश से सिर्फ चार लाख नए नाम ही जोड़े जा सके, जो घोर लापरवाही का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने तल्ख लहजे में कहा कि जब सवाल 1 करोड़ 27 लाख छूटे हुए नागरिकों का है, तब महज चार लाख नामों की प्रगति किसी भी सूरत में बर्दाश्त के काबिल नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को सतर्क करते हुए कहा कि भाजपा जहां पूरी ईमानदारी से वास्तविक पात्रों को जोड़ने के काम में लगी है, वहीं दूसरी तरफ फर्जी नाम जुड़वाने वाले लोग सक्रिय होकर झूठा नैरेटिव गढ़ने में जुटे हैं। ऐसे में 1.27 करोड़ छूटे हुए सभी मतदाताओं को सूची में वापस लाना पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
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