
लखनऊ/वाराणसी। बिहार की सत्ता में लंबे समय से काबिज जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अब उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी जड़ें जमाने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी ने रणनीतिक स्तर पर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। जेडीयू उन विधानसभा क्षेत्रों का जमीनी स्तर पर आकलन कर रही है, जहां पार्टी का जनाधार मजबूत है और वह जीत दर्ज करने की स्थिति में है। इसके साथ ही, पार्टी उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के एक मजबूत सहयोगी के रूप में ताल ठोकने की संभावनाएं तलाश रही है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने औपचारिक रूप से इसकी पुष्टि की है।
राजीव रंजन प्रसाद ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश जेडीयू के लिए कोई नया राज्य नहीं है। पार्टी पहले भी यहां चुनावी दंगल में उतर चुकी है और उसके प्रत्याशी जीतकर विधानसभा की दहलीज तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के बाहर अन्य पड़ोसी राज्यों में भी संगठन का ढांचा लंबे समय से सक्रिय और मजबूत है। यूपी के पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों की ओर से लगातार आगामी विधानसभा चुनाव में पूरे दमखम से उतरने की मांग उठाई जा रही थी। कार्यकर्ताओं की इसी भावना और नब्ज को भांपते हुए पार्टी अब उन सीटों की मैपिंग और आकलन कर रही है, जहां जेडीयू का वोट बैंक और प्रदर्शन बेहतर साबित हो सकता है। सीटों की संख्या और नामों पर अंतिम फैसला इस व्यापक सर्वे रिपोर्ट के बाद ही तय होगा।
यूपी में भी NDA के साथ मिलकर मैदान में उतरने पर सबसे ज्यादा जोर
उत्तर प्रदेश में गठबंधन के सवाल पर जेडीयू का रुख पूरी तरह साफ नजर आ रहा है। राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने दो टूक कहा कि पार्टी एनडीए के तहत मिलकर चुनाव लड़ने के विकल्पों पर सबसे ज्यादा विचार कर रही है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और बिहार की नीतीश सरकार दोनों ही जगह जेडीयू एनडीए की प्रमुख और मजबूत रणनीतिक साझेदार है। ऐसे में देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में भी गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ने की यह कवायद सियासी रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, जेडीयू ने अभी तक अपने हिस्से की सीटों की कोई निश्चित संख्या सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन सहयोगी दलों के साथ समन्वय की बातचीत आगे बढ़ रही है।
वाराणसी के कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद एकाएक गरमाई सियासी हलचल
जेडीयू की इस चुनावी तैयारी को वाराणसी में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन से बड़ा बल मिला है। इस सम्मेलन के ठीक एक दिन बाद पार्टी की तरफ से यह बड़ा बयान सामने आया। वाराणसी के आयोजन में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार तथा पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा विशेष रूप से शामिल हुए थे। सम्मेलन के मंच से पार्टी कैडर में नया जोश भरने के साथ ही यूपी चुनाव का शंखनाद किया गया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए निशांत कुमार ने पुरजोर तरीके से कहा कि जेडीयू 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी गंभीरता से तैयारी कर रही है। पार्टी की पहली प्राथमिकता एनडीए के घटक दल के रूप में मैदान में उतरने की है। निशांत कुमार ने कहा कि पार्टी का मुख्य ध्येय नीतीश कुमार की समावेशी विचारधारा और उनकी जनहितैषी नीतियों को बिहार की सीमाओं से बाहर राष्ट्रीय फलक पर ले जाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में बिहार के विकास का जो अनुकरणीय मॉडल स्थापित किया है, उसे अब उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के कोने-कोने तक पहुंचाना वक्त की जरूरत है।
निशांत कुमार के चेहरे पर यूपी में संगठन विस्तार का नया खाका
पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर भी उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर अपनी भावी योजना का रोडमैप साझा किया। पार्टी के आधिकारिक हैंडल से कहा गया कि निशांत कुमार के नेतृत्व में जेडीयू उत्तर प्रदेश में आम जनता की मजबूत और मुखर आवाज बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पार्टी आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में यूपी की राजनीति में अपनी ठोस और निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
वहीं, निशांत कुमार ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी के वैचारिक आधार को दोहराते हुए कहा कि जेडीयू एक समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष पार्टी है, जिसके मूल सिद्धांतों में सुशासन, सामाजिक न्याय और समग्र विकास शामिल हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले 20 वर्षों के दौरान नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे, निर्बाध बिजली आपूर्ति, ग्रामीण और शहरी सड़कों के जाल, कानून-व्यवस्था के राज और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव देखा है। निशांत कुमार ने कहा कि बिहार की इस विकास यात्रा और नीतीश मॉडल को देश के अन्य राज्यों के जन-जन तक ले जाना अब उनकी सबसे अहम जिम्मेदारी है।
सर्वे और सीटों के आकलन के बाद तय होगा टिकटों का गणित
जेडीयू नेतृत्व के बयानों और निशांत कुमार के सक्रिय रुख से यह शीशे की तरह साफ हो चुका है कि पार्टी 2027 में यूपी की चुनावी सियासत में मूकदर्शक नहीं रहेगी। फिलहाल पार्टी का पूरा फोकस राज्य के विभिन्न क्षेत्रों, खासकर पूर्वांचल और अवध के उन इलाकों में जमीनी पकड़ मजबूत करने पर है, जहां सामाजिक समीकरण पार्टी के अनुकूल हैं। सीटों का आकलन पूरा होते ही एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीट-बंटवारे के फॉर्मूले पर औपचारिक बातचीत शुरू की जाएगी।
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