Thursday , 29 October 2026

पतियों के कत्ल में फांसी की सजा काट रहीं मेरठ जेल की तीन महिला कैदी रखेंगी अहोई अष्टमी व्रत, बच्चों की लंबी उम्र के लिए मांगी पूजा सामग्री

ब्यूरो, मेरठ। मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार की सलाखों के पीछे एक अजीबोगरीब और भावुक करने वाला मामला सामने आया है। अपने ही पतियों की जघन्य हत्या के जुर्म में बंद तीन महिला बंदियों, जिनमें से दो को अदालत से फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है, के मन में अचानक अपनी संतानों के प्रति ममता उमड़ पड़ी है। बहुचर्चित ‘नीला ड्रम कांड’ में सजा-ए-मौत पाने वाली मुस्कान रस्तोगी, पति को मारकर बिस्तर पर सांप छोड़ने के जुर्म में फांसी पा चुकी रविता, और पति की हत्या में जेल में बंद दामिनी ने आगामी 1 नवंबर को अपने बच्चों की लंबी उम्र और सलामती के लिए ‘अहोई अष्टमी’ का निर्जला व्रत रखने की इच्छा जाहिर की है।

जेल अधीक्षक से मांगी अनुमति, संस्था ने जुटाई पूजा सामग्री

तीनों महिला कैदियों ने अहोई अष्टमी का व्रत रखने और पूजन के लिए बाकायदा जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा से अनुमति मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने जेल प्रशासन से पूजा का सामान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। कारागार में सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में सहयोग देने वाली संस्थाओं के माध्यम से यह सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। सोमवार को ‘संजीवनी महिला संस्था’ की प्रमुख निशी जैन अपनी टीम के साथ जिला कारागार पहुंची थीं। यहां महिला बंदियों को करवाचौथ के मद्देनजर मिट्टी के करवे और सुहाग सामग्री बांटी गई।

इसी दौरान मुस्कान, रविता और दामिनी ने संस्था से अपनी-अपनी संतानों (मुस्कान की दो बेटियों, रविता के बच्चों और दामिनी के इकलौते बेटे) के दीर्घायु जीवन की कामना के लिए अहोई अष्टमी की पूजन सामग्री की गुहार लगाई, जिस पर संस्था ने जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की सहमति दी।

सजा-ए-मौत के बाद छोड़ दिया था पूजा-पाठ, बेटियों के लिए फिर लौटी आस्था

कारागार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, फास्ट ट्रैक अदालत से मृत्युदंड का फैसला सुनाए जाने के बाद से मुस्कान रस्तोगी गहरे अवसाद में थी। फांसी की सजा मुकर्रर होने के बाद उसने पूजा-पाठ से पूरी तरह किनारा कर लिया था और इस बार शारदीय नवरात्र में भी कोई उपवास नहीं रखा था। हालांकि, अब अपनी मासूम बेटियों के भविष्य और लंबी आयु के लिए उसने दोबारा आस्था की राह चुनी है। उल्लेखनीय है कि मेरठ अदालत के फांसी के फैसले को चुनौती देते हुए मुस्कान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिसे अदालत ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।

जेल मैनुअल के तहत व्रत और मुलाकात के पूरे इंतजाम

जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जेल मैनुअल के नियमों के मुताबिक महिला बंदियों को अपनी धार्मिक आस्था के पालन, पूजा-पाठ और व्रत रखने की पूरी स्वतंत्रता है। पर्वों के दौरान उपवास रखने वाली महिला बंदियों के लिए फलाहार और पूजन सामग्री का इंतजाम किया जाता है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन मामलों में पति-पत्नी दोनों जेल में निरुद्ध हैं, उन्हें करवाचौथ जैसे पर्वों पर नियमानुसार मुलाकात की विशेष अनुमति दी जाती है। वहीं, जेल में बंद पुरुष कैदियों से मिलने आने वाली उनकी पत्नियों के लिए भी कारागार परिसर में पूजन और मुलाकात की सुगम व्यवस्था रहती है।

रूह कंपा देने वाली वारदातों में सलाखों के पीछे हैं तीनों बंदी

इन तीनों महिला बंदियों के आपराधिक रिकॉर्ड बेहद खौफनाक रहे हैं:

  • मुस्कान रस्तोगी (नीला ड्रम कांड): मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की चाकुओं से गोदकर बेरहमी से हत्या की थी। इसके बाद शव के टुकड़े कर नीले प्लास्टिक के ड्रम में बंद किए और ऊपर से सीमेंट का घोल भर दिया था। फास्ट ट्रैक अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया है।

  • रविता (सांप से डसवाने का षड्यंत्र): बहसूमा इलाके में रविता ने अपने पति अमित कश्यप की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। वारदात को प्राकृतिक या दुर्घटनावश साबित करने के लिए उसने शव के पास बिस्तर पर जहरीला सांप छोड़ दिया था। अदालत से इसे भी फांसी की सजा मिल चुकी है।

  • दामिनी (हस्तिनापुर हत्याकांड): दामिनी हस्तिनापुर क्षेत्र में अपने पति अतुल पंवार की गला दबाकर हत्या करने के गंभीर मामले में जिला जेल में विचारधीन बंदी के तौर पर बंद है।

 

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