Thursday , 9 July 2026

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी: पुलिस कस्टडी के आखिरी 12 घंटे बेहद अहम, ‘ब्लैक मनी’ को ऑनलाइन ‘व्हाइट’ करने का चौंकाने वाला खेल

अयोध्या: राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान के पैसों की चोरी के मामले में पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। कोर्ट से मंजूर हुई 40 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड में से 28 घंटे का समय बीत चुका है। अब पुलिस के पास बचे हुए आखिरी 12 घंटे बेहद कीमती और निर्णायक माने जा रहे हैं। जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे 8 आरोपियों में से मुख्य तीन किरदारों—लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे से पुलिस लाइन में लगातार मैराथन पूछताछ की जा रही है।

रिश्तेदारों को देते थे चोरी का कैश, फिर खातों में करवाते थे ट्रांसफर

अब तक की कड़ाई से की गई पूछताछ में तीनों मुख्य आरोपियों ने जो राज उगले हैं, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। आरोपियों ने कुबूल किया है कि वे चोरी की गई भारी-भरकम रकम को सीधे तौर पर अपने बैंक खातों में जमा करने की गलती नहीं करते थे। पकड़े जाने के डर से उन्होंने एक शातिर तरीका निकाला। वे चोरी के कैश को अपने बेहद करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को सौंप देते थे। इसके बाद, उन्हीं रिश्तेदारों से उस रकम को ऑनलाइन (UPI या नेट बैंकिंग) के जरिए अपने खुद के खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे।

हवाला की तर्ज पर बदला पैसों का सोर्स, बैंक स्टेटमेंट से खुला राज

आरोपियों ने यह पैंतरा इसलिए आजमाया ताकि मंदिर प्रशासन या पुलिस को कभी उन पर शक न हो। ब्लैक मनी को व्हाइट करने की तर्ज पर किए गए इस खेल से पैसों का मुख्य सोर्स (यानी मंदिर से की गई चोरी) पूरी तरह छिप जाता था। हालांकि, पुलिस की आर्थिक जांच के आगे यह चालाकी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। जब तफ्तीश में जुटे अधिकारियों ने आरोपियों और उनके संदिग्ध करीबियों के बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय लेन-देन खंगाले, तो उनके बयानों और बैंक डिटेल्स में हूबहू समानता पाई गई, जिससे इस पूरे फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई।

‘कभी पकड़े नहीं जाएंगे’… अंदरूनी मिलीभगत के भरोसे थे बेखौफ

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। उन्होंने बताया कि वे बेखौफ होकर चढ़ावे के डिब्बों से ज्यादा से ज्यादा नकदी उड़ाने की फिराक में रहते थे। उन्हें पूरा भरोसा था कि वे कभी भी कानून के शिकंजे में नहीं आएंगे। आरोपियों का मानना था कि मंदिर की सुरक्षा और अंदरूनी व्यवस्था में कुछ लोगों की मिलीभगत के चलते उन पर कभी कोई शक नहीं करेगा।

सुनसान ठिकानों पर पहुंची पुलिस, यहीं बंटती थी लूट की रकम

जांच के सिलसिले में पुलिस इन तीनों आरोपियों को लेकर उन गुप्त और सुनसान ठिकानों पर भी गई, जहां यह पूरा गैंग चोरी की गई रकम और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए कीमती आभूषणों को आपस में बांटता था। पुलिस की एक विशेष टीम इन जगहों से कुछ और पुख्ता डिजिटल सबूत, छिपाई गई नकदी या जेवरात बरामद करने की कोशिश में जुटी है।

फर्जी दान पर्चियों का भंडाफोड़, अब लग्जरी कार जब्त करने की तैयारी

इतना ही नहीं, आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने एक हूबहू दिखने वाली नकली दान रसीद भी बरामद की है। आरोपी मंदिर आने वाले सीधे-साधे श्रद्धालुओं से चंदा लेकर उन्हें यही फर्जी रसीद थमा देते थे और वह पूरा पैसा मुख्य ट्रस्ट के खाते में जाने के बजाय सीधे इनकी जेब में चला जाता था। इस बीच, मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा द्वारा पिछले साल खरीदी गई एक चमचमाती कार अब पुलिस के रडार पर आ गई है। पुलिस कार की फंडिंग, बैंक ट्रांजैक्शन और कागजातों की बारीकी से जांच कर रही है। यदि यह साबित हो जाता है कि कार को मंदिर की चोरी के पैसों से खरीदा गया था, तो पुलिस इसे केस की प्रॉपर्टी (Crime Asset) मानकर तुरंत जब्त कर लेगी।

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