Friday , 10 July 2026

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में सबसे बड़ा खुलासा: नोट गिनने से पहले ही साफ हो जाती थी रकम, ‘खास’ काम के बहाने होता था करोड़ों का खेल!

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में भव्य राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी के मामले में हर दिन ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जिसने जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस और तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की तफ्तीश में अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज सच सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रामलला के दरबार में आने वाले चंदे की चोरी नोटों की गिनती के दौरान नहीं, बल्कि उससे बहुत पहले ही कर ली जाती थी। इस पूरे खेल को इतनी चालाकी से अंजाम दिया जा रहा था कि किसी को कानों-कान भनक तक नहीं लगी।

नोटों को ‘सलीके से लगाने’ के खेल में छिपी थी हेराफेरी की पूरी कहानी

राम मंदिर ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बीच हुए समझौते के तहत चंदे के नोटों की गिनती आधुनिक मशीनों के जरिए की जाती थी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों का मुख्य काम चढ़ावे में आए नोटों को सलीके से एक साथ लगाना था। श्रद्धालु अक्सर दानपात्र में नोटों को मरोड़कर या मोड़कर डाल देते हैं, जिन्हें सीधा करने और अलग-अलग मूल्य (10, 20, 50, 100, 200, 500) के हिसाब से छांटने की जिम्मेदारी इन आरोपियों की थी। इसके बाद ही एसबीआई के कर्मचारी उन नोटों को काउंटिंग मशीन में रखते थे, जहां मशीन खुद-ब-खुद उनकी गड्डियां तैयार कर देती थी। जांच में साफ हुआ है कि जब ये आरोपी नोटों को सीधा कर सलीके से लगा रहे होते थे, ठीक उसी वक्त बड़ी सफाई से नोटों के बंडल से रकम उड़ा ली जाती थी। यानी काउंटिंग मशीन तक पहुंचने से पहले ही चढ़ावे पर हाथ साफ कर दिया जाता था।

रडार पर आए SBI के पूर्व मैनेजर और ट्रस्टी अनिल मिश्रा, जल्द होगी पूछताछ

इस महाघोटाले की आंच अब बैंक के बड़े अधिकारियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों तक पहुंच चुकी है। एसबीआई के पूर्व मैनेजर गोविंद मिश्र, जो वर्तमान में लखनऊ में तैनात हैं, इस समय अयोध्या पुलिस के रडार पर हैं। इसके साथ ही, मंदिर में नोटों की गणना की निगरानी करने वाले बैंक कर्मचारियों से भी इसी हफ्ते तीखे सवाल-जवाब होने वाले हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर हो रही चोरी की भनक बैंक प्रबंधन को क्यों नहीं लगी। वहीं, बैंक के साथ एमओयू (MOU) साइन करने वाले ट्रस्टी अनिल मिश्रा के बयान भी इसी सप्ताह दर्ज किए जाएंगे।

थर्ड पार्टी आउटसोर्सिंग का सहारा लेकर रची गई पूरी साजिश

मामले की गहराई में जाने पर पता चला है कि इस काली कमाई में शामिल सभी आरोपी सीधे तौर पर न तो बैंक के कर्मचारी थे और न ही राम मंदिर ट्रस्ट के। ये सभी एक प्राइवेट आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए ‘हाउस कीपिंग’ और नोटों की छंटनी के काम पर रखे गए थे। इस प्राइवेट कंपनी को खुद एसबीआई ने हायर किया था। दिलचस्प बात यह है कि कर्मचारियों का ड्रेस कोड तय करने से लेकर उनका इंटरव्यू और भर्ती प्रक्रिया तक, सब कुछ इसी निजी कंपनी के हाथ में था। यहां तक कि काउंटिंग के दौरान निगरानी रखने वाला मुख्य आरोपी सुभाष श्रीवास्तव भी एक पूर्व बैंकर था और वह भी इसी प्राइवेट कंपनी के जरिए आउटसोर्स होकर आया था।

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा, 8 आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल

उत्तर प्रदेश पुलिस और एसआईटी ने 25 जून 2026 को दर्ज हुई एफआईआर के बाद इस मामले में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अब तक आठ लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में राम शंकर यादव (उर्फ टीनू यादव), मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला और राम शंकर मिश्रा शामिल हैं। इस बड़े विवाद और करोड़ों की हेराफेरी के आरोपों के बीच राम मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया है, जिसने इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

पुलिस रिमांड में उगले राज: चोरी के पैसों से खरीदी कार, पत्नी को दिया सोने का लॉकेट

फिलहाल अदालत की अनुमति के बाद तीन मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय पुलिस रिमांड पर हैं। पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कई ठिकानों की जानकारी दी, जिसके बाद एसआईटी ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है। पुलिस ने आरोपी अनुकल्प के पास से 20 हजार रुपये कैश, एक चमचमाती सोने की चेन, मोबाइल फोन और उसके पिता के नाम पर खरीदी गई लग्जरी डिजायर कार बरामद कर जब्त कर ली है। वहीं, आरोपी लवकुश ने चोरी के पैसों से अपनी पत्नी को सोने का एक कीमती लॉकेट गिफ्ट किया था, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है, साथ ही उसके पास से 38 हजार रुपये नकद भी मिले हैं। तीसरे आरोपी करुणेश के कब्जे से भी 15 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं। पुलिस का दावा है कि रिमांड के दौरान कई और सफेदपोशों के नाम सामने आ सकते हैं।

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