
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने को लेकर दाखिल फॉर्म-7 आवेदनों में कथित गड़बड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को इन सभी शिकायतों की गहन जांच करने और तत्काल जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने आयोग को जांच के बाद उठाए गए कदमों पर विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया है।
चीफ जस्टिस की पीठ में उठा BLO के हस्ताक्षरों और हलफनामे में विसंगतियों का मुद्दा
यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से निर्वाचन आयोग द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे में मौजूद गंभीर विसंगतियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची से नाम कटवाने के लिए जमा किए गए फॉर्म-7 आवेदनों में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। कई मामलों में तो नियमों को ताक पर रखकर फॉर्म-7 आवेदनों पर कथित रूप से बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के ही हस्ताक्षर दर्ज पाए गए, जो सीधे तौर पर प्रक्रिया के दुरुपयोग और धांधली की ओर इशारा करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: याचिकाकर्ता सौंपें विस्तृत नोट, चुनाव आयोग करे निष्पक्ष जांच
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे उन सभी मामलों को चिन्हित करें जिनका अब तक समाधान नहीं हो सका है और ऐसी सभी अनियमितताओं का बिंदुवार विस्तृत नोट चुनाव आयोग को सौंपें। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को पाबंद किया कि वह याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए तथ्यों और शिकायतों की बिना किसी देरी के जांच करे।
हलफनामे में सामने आई गड़बड़ियों को दुरुस्त कर दाखिल करनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े निर्देश के बाद अब चुनाव आयोग को फॉर्म-7 से जुड़ी तमाम शिकायतों, विशेषकर बीएलओ के कथित हस्ताक्षरों और शपथ पत्र में सामने आई खामियों की पड़ताल करनी होगी। अदालत ने आयोग से कहा है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर तुरंत सुधारात्मक उपाय किए जाएं ताकि किसी भी वैध मतदाता का नाम अनुचित तरीके से मतदाता सूची से बाहर न हो। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आयोग को शीर्ष अदालत में अपनी अनुपालन रिपोर्ट (कंप्लायंस रिपोर्ट) प्रस्तुत करनी होगी।
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