अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला इस समय पूरे देश में आक्रोश और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठकों और बयानों के बीच, अब ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की एक बेहद संवेदनशील चिट्ठी ने इस पूरे विवाद में घी का काम कर दिया है। इस पत्र ने साफ कर दिया है कि राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है और ट्रस्टियों के बीच आपसी अविश्वास की खाई गहरी हो चुकी है। मंदिर के सबसे कद्दावर और रसूखदार चेहरों में शुमार चंपत राय ने इस चिट्ठी के जरिए किसी बड़ी साजिश की तरफ इशारा करते हुए सीधे चेतावनी दे डाली है।
चंपत राय का बड़ा खुलासा: ‘चुप हूं, लेकिन SIT रिपोर्ट आते ही दूंगा जवाब’
चढ़ावा चोरी के महाविवाद पर करीब एक महीने तक मौन धारण करने के बाद चंपत राय ने पहली बार सोशल मीडिया पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। हालांकि, वे ट्रस्ट से इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन अपनी चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर देश में कई तरह की मनगढ़ंत चर्चाएं हो रही हैं और उन पर भी कीचड़ उछाला गया है।
चंपत राय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने फिलहाल इस पूरे मुद्दे पर शांत रहने का फैसला किया है, लेकिन जैसे ही एसआईटी (SIT) की फाइनल रिपोर्ट आएगी, वे हर एक आरोप का चुन-चुनकर जवाब देंगे। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता और आश्चर्य जताया कि जो एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट पूरी तरह गोपनीय (कॉन्फिडेंशियल) थी, वह आखिर मीडिया में लीक कैसे हो गई?
SIT को भेजा बयान: अनिल मिश्रा पर मढ़े गंभीर आरोप, पूछा- नियमों में ढिलाई क्यों?
अपनी चिट्ठी के साथ ही चंपत राय ने एसआईटी को अपना आधिकारिक बयान भी भेजा है, जिसने ट्रस्ट के भीतर की गुटबाजी को सरेआम कर दिया है। चंपत राय ने ट्रस्ट के सदस्य रहे अनिल मिश्रा पर सीधे और गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपने बयान में खुलासा किया कि चढ़ावे की काउंटिंग (गिनती) के लिए 6 फरवरी 2025 को अनिल मिश्रा और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच एक MoU (सहमति पत्र) साइन हुआ था, जिसके लिए चंपत राय से कोई मंजूरी नहीं ली गई थी।
चंपत राय ने सवाल उठाया कि इस MoU के बाद अचानक नोटों की गिनती वाले कक्ष (काउंटिंग रूम) में बदलाव क्यों किए गए? उन्होंने पूछा कि आखिर सुरक्षा के कड़े नियमों में ढिलाई देने की इजाजत किसने दी? चंपत राय के मुताबिक, बैंकों में सुरक्षा के जो कड़े और पुख्ता नियम होते हैं, वही नियम राम मंदिर के काउंटिंग रूम में भी लागू होने चाहिए थे, लेकिन यहां उनकी पूरी तरह अवहेलना की गई।
ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज का सनसनीखेज दावा: ‘हमें नहीं दिखाई गई इस्तीफे की कॉपी’
इस पूरे ड्रामे के बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने एक टीवी चैनल से बातचीत में एक और विस्फोटक दावा कर दिया। उन्होंने कहा, ‘ट्रस्ट की बैठक में हमें चंपत राय के इस्तीफे की कोई कॉपी नहीं दिखाई गई। केवल मौखिक तौर पर लोगों ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। मैंने शुरुआत में इस इस्तीफे को मानने से साफ इनकार कर दिया था, लेकिन जब बाकी सभी सदस्य बोले कि उन्होंने इस्तीफा दिया है तो हमें स्वीकार कर लेना चाहिए, तब जाकर हम माने।’ महंत दिनेंद्र दास ने सीधा आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि सारा लेन-देन गोपाल राव और अनिल मिश्रा ही देखते थे।
इस बीच, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने कहा कि ट्रस्ट ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर किसी के पास कोई पुख्ता सबूत है, तो उसे जांच अधिकारी के पास जाना चाहिए, समाज की आस्था को ठेस पहुंचाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। वहीं, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने भी यह स्वीकार किया कि व्यवस्था में गंभीर कमियां थीं और गलत लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा करने की बड़ी भूल हुई।
SIT की 9 पन्नों की रिपोर्ट: 78.94 लाख जब्त, विदेशी करेंसी और गहने भी चुराए
अब तक केवल कयास लगाए जा रहे थे कि राम मंदिर के दानपात्रों से कितने की चोरी हुई है, लेकिन विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने इस सस्पेंस को पूरी तरह खत्म कर दिया है। कुल 9 पन्नों की इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों के पास से अब तक 78.94 लाख रुपये कैश बरामद हो चुके हैं। जब्त किए गए इस चढ़ावे में भारतीय रुपयों के अलावा विदेशी करेंसी, कीमती सोने-चांदी के गहने और अन्य बहुमूल्य सामान भी शामिल हैं। रिपोर्ट के पेज नंबर 4, 5, 6 और 8 में चोरी के तरीकों और चोरों के चेहरों का पूरा कच्चा चिट्ठा दर्ज है।
पेज नंबर 4 का सच: 70 बार हुई चोरी, जूतों और कपड़ों में छिपाकर ले जाते थे नोट
एसआईटी रिपोर्ट के पेज नंबर 4 पर दर्ज विवरण रोंगटे खड़े करने वाला है। जांच टीम को 27 अप्रैल से 5 जून तक के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज मिले हैं, जिनमें एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे 70 बार चोरी की लाइव वारदातें रिकॉर्ड हुई हैं। वीडियो में मंदिर के ही कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियों को अपने कपड़ों में छिपाते हुए साफ दिख रहे हैं।
हद तो तब हो गई जब आरोपी नोटों को अपने जूतों के अंदर छिपाकर बाहर ले जाते मिले। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव नाम के कर्मचारियों ने कई बार इस चोरी को अंजाम दिया, जबकि अनुकल्प, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय इस पूरी साजिश में उनकी मदद कर रहे थे। सीसीटीवी फुटेज में रमाशंकर मिश्रा नाम का शख्स भी नोटों की गड्डियां गायब करता हुआ पकड़ा गया है।
पेज नंबर 5 का खुलासा: सुरक्षा में महा-लापरवाही और चोरी के पैसे से खरीदी जमीन
एसआईटी रिपोर्ट के पेज नंबर 5 में उन सुरक्षा खामियों का जिक्र है, जिसका फायदा इन चोरों ने उठाया:
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मंदिर से बाहर जाने वाले कर्मचारियों की कोई तलाशी (Frisking) नहीं ली जाती थी।
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बिना जेब वाले स्पेशल ड्रेस कोड के नियम को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
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अलग-अलग दानपात्रों की अलग गिनती करने के बजाय सारे पैसों को एक ही जगह ढेर कर दिया जाता था।
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दान में मिली बड़ी रकम या कीमती सामान की कोई वैल्यू रसीद या सर्टिफिकेट जारी नहीं होते थे।
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गिनती कक्ष (काउंटिंग रूम) की सीसीटीवी निगरानी में भयानक लापरवाही बरती गई।
चोरी की रकम को कहां खपाया जा रहा था? आरोपियों ने इस पाप की कमाई को ठिकाने लगाने के लिए बकायदा बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया। उन्होंने चोरी का कैश सीधे बैंक में जमा कराया और अपने-अपने नाम पर मोटी एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) करा ली। इतना ही नहीं, अपने सगे-संबंधियों के बैंक खातों में भी पैसे ट्रांसफर किए गए और इस चढ़ावे की रकम से कई जगहों पर कीमती मकान और जमीनें खरीदी गईं।
SOP की उड़ी धज्जियां: नियमों को ताक पर रखकर खुला काउंटिंग रूम
राम मंदिर के दान की गिनती को पारदर्शी बनाने के लिए एक सख्त एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार की गई थी, लेकिन एसआईटी के मुताबिक इसका रत्ती भर भी पालन नहीं हुआ। नियम के मुताबिक, पूरी गिनती प्रक्रिया की निगरानी और उसकी प्रामाणिकता तय करना ट्रस्ट की जिम्मेदारी थी। नकद जमा पर्ची, चालान और रजिस्टरों पर हस्ताक्षर कर लेन-देन को वेरीफाई करना था, जो नहीं किया गया।
एसओपी के संयुक्त नियमों के तहत दानपात्र को प्रतिदिन तय अधिकारियों की मौजूदगी में ही खोला जाना था और इसकी बकायदा वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य थी। नियम यह भी था कि काउंटिंग रूम में कोई भी व्यक्ति बिना वर्दी या सोने-चांदी के जेवर पहनकर नहीं घुसेगा और आते-जाते समय उसकी सघन तलाशी ली जाएगी। लेकिन इन सभी नियमों को कूड़ेदान में डाल दिया गया।
चंदा चोरी पर शुरू हुआ भीषण सियासी घमासान, विपक्ष हमलावर
इस मामले के सामने आते ही उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी के खुलने की वजह से बीजेपी की धर्म और धन, दोनों तरह की राजनीति का अंत हो गया है। बीजेपी अब जनता के सामने कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रही।’
वहीं, कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘सद्बुद्धि पदयात्रा’ निकालकर प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र में भी कांग्रेस ने ‘रघुपति राघव राजा राम आंदोलन’ छेड़ दिया है, जहां नासिक में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सीधे केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का करारा पलटवार: ‘वक्फ की लूट पर क्यों चुप है सपा-कांग्रेस?’
विपक्ष के चौतरफा हमलों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए करारा जवाब दिया है। सीएम योगी ने कहा, ‘एसआईटी की जांच ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। जब यही लोग भगवान राम और कृष्ण को काल्पनिक बताते थे, तब क्या हिंदुओं की आस्था आहत नहीं होती थी? आज वक्फ की संपत्तियों की सरेआम लूट पर सपा और कांग्रेस पूरी तरह मौन क्यों हैं?’ सीएम योगी ने साफ शब्दों में कहा कि विपक्ष की असली पीड़ा राम मंदिर का चढ़ावा नहीं है, बल्कि उनकी पीड़ा यह है कि जिस जगह वे हमेशा बाबरी का गुलामी ढांचा देखना चाहते थे, आज वहां एक भव्य और दिव्य राम मंदिर खड़ा है।
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