Tuesday , 26 May 2026

लाल किला कार ब्लास्ट में NIA का सबसे बड़ा खुलासा: प्रोफेसर और डॉक्टरों ने ChatGPT-YouTube से सीखी ‘टेरर इंजीनियरिंग’, बनाया खतरनाक TATP बम

नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास पिछले साल हुए सनसनीखेज कार ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। एनआईए द्वारा विशेष अदालत में दाखिल की गई 7,500 पन्नों की चार्जशीट के अनुसार, अल-कायदा से जुड़े पढ़े-लिखे ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकियों ने देश को दहलाने के लिए आधुनिक डिजिटल टूल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लिया था। आतंकियों ने बम और रॉकेट बनाने के लिए ChatGPT और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर ‘टेरर इंजीनियरिंग’ को अंजाम दिया।

10 नवंबर को दहली थी दिल्ली, प्रोफेसर ही निकला मास्टरमाइंड

न्यूज एजेंसी पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, 10 November 2025 को देश की राजधानी दिल्ली में हुए इस भीषण कार ब्लास्ट के पीछे अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के एक खतरनाक मॉड्यूल का हाथ था। इस आत्मघाती हमले में 11 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। एनआईए की चार्जशीट में इस खूनी साजिश के मुख्य आरोपी डॉ. उमर-उन-नबी का नाम सामने आया है, जो खुद उस आत्मघाती कार ब्लास्ट में मारा गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि पुलवामा का रहने वाला डॉ. उमर हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रह चुका था।

‘इन-हाउस इंजीनियर’ और डॉक्टरों का घातक कॉम्बिनेशन

एनआईए की तफ्तीश में सामने आया कि इस आतंकी मॉड्यूल का मुख्य ‘इन-हाउस इंजीनियर’ जसिर बिलाल वानी नाम का आतंकी था। जसिर अल-कायदा से जुड़े और भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) के लिए काम कर रहा था। वह फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में दो-तीन बार रुककर आतंकियों को तकनीकी मदद दे चुका था। जसिर की मुलाकात डॉ. आदिल अहमद राथर ने मुख्य आरोपी प्रोफेसर डॉ. उमर से कराई थी। डॉ. आदिल ने जसिर को आईईडी (IED) बनाने के लिए पिसी हुई चीनी और पोटैशियम नाइट्रेट जैसी सामग्रियां उपलब्ध कराईं, जबकि डॉ. उमर ने रॉकेट आईईडी पर रिसर्च कर पूरी साजिश को लीड किया।

ChatGPT पर सर्च किया- ‘रॉकेट कैसे बनाएं और केमिकल का रेशियो क्या हो?’

पढ़े-लिखे आतंकियों के इस ग्रुप ने पूरी ट्रेनिंग इंटरनेट के जरिए ली। चार्जशीट के मुताबिक, जसिर ने ChatGPT और YouTube पर ‘रॉकेट कैसे बनाएं’ और ‘विस्फोटक मिक्सचर का सही रेशियो क्या होना चाहिए’ जैसे सवाल सर्च किए थे। इसके बाद इन आतंकियों ने मिलकर खतरनाक रॉकेट आईईडी तैयार किए और जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड के घने जंगलों में इसका बाकायदा टेस्ट फायर भी किया। एनआईए की टीमों ने बाद में सर्च ऑपरेशन चलाकर इस जंगली इलाके से आईईडी और रॉकेट के अवशेष बरामद किए थे।

ड्रोन हमले की थी बड़ी तैयारी, फ्लिपकार्ट से मंगाए थे कल्पुर्जे

जांच में यह भी साफ हुआ है कि आरोपी डॉ. उमर ने जसिर को दो एडवांस ड्रोन मुहैया कराए थे। जसिर को इन ड्रोन की फ्लाइंग रेंज और वजन उठाने की क्षमता बढ़ाने का काम सौंपा गया था। आतंकियों का प्लान इन ड्रोन में भारी मात्रा में विस्फोटक फिट करके कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में मौजूद भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों और सेना के कैंपों पर बड़ा हमला करने का था। इसके लिए जसिर ने ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट (Flipkart) का सहारा लिया और वहां से सेंसर, हीट गन, आरएफ (RF) ट्रांसमीटर-रिसीवर और सोल्डरिंग किट जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ऑनलाइन ऑर्डर करके मंगाए, जिनका इस्तेमाल बम के ट्रिगर सिस्टम को अपग्रेड करने में किया गया।

लाल किले के पास इस्तेमाल हुआ ‘मदर ऑफ सैटर्न’ यानी TATP विस्फोटक

एनआईए की फॉरेंसिक और टेक्निकल जांच में पता चला है कि लाल किले के पास हुए कार धमाके में बेहद संवेदनशील और घातक ‘टीएटीपी’ (TATP) विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। इस खतरनाक केमिकल को आतंकियों ने कई लैब प्रैक्टिकल और प्रयोगों के बाद खुद तैयार किया था। डॉ. उमर ने जसिर द्वारा तैयार किए गए रिमोट ट्रिगर मैकेनिज्म की मदद से कार में धमाका किया था। इस पूरे मामले ने ‘व्हाइट कॉलर’ टेररिज्म का एक नया चेहरा सामने ला दिया है, जहां समाज के संभ्रांत माने जाने वाले मेडिकल और टीचिंग प्रोफेशनल्स का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी बनाया जा रहा है।

यूएन की रिपोर्ट में नया ट्विस्ट, जैश-ए-मोहम्मद ने ली जिम्मेदारी

इस पूरे घटनाक्रम के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक हालिया रिपोर्ट ने मामले में नया मोड़ ला दिया है। यूएनएससी की 1267 सैंक्शंस कमेटी को सौंपी गई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली के लाल किले के पास हुए इस कार ब्लास्ट की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने ली है। इस रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक अन्य आतंकी हमले का भी विवरण है, जिसमें शामिल तीनों आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। फिलहाल एनआईए इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या अल-कायदा और जैश-ए-मोहम्मद मिलकर भारत के खिलाफ किसी बड़े कन्सोर्टियम के तहत काम कर रहे हैं।

NIA जांच में पता चला है कि धमाके में TATP नाम का खतरनाक विस्फोटक इस्तेमाल हुआ था, जिसे कई प्रयोगों के बाद तैयार किया गया।
NIA जांच में पता चला है कि धमाके में TATP नाम का खतरनाक विस्फोटक इस्तेमाल हुआ था, जिसे कई प्रयोगों के बाद तैयार किया गया।
10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में धमाका हुआ था। इसमें 15 लोगों को मौत हुई थी।
10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में धमाका हुआ था। इसमें 15 लोगों को मौत हुई थी।

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