नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा सामने आया है। दावों के मुताबिक, NEET का पेपर परीक्षा से दो दिन पहले यानी 1 मई को ही ‘प्राइवेट माफिया’ नाम के एक गुप्त टेलीग्राम ग्रुप पर लीक कर दिया गया था। इस ग्रुप पर अपलोड किए गए सेट नंबर-12 के प्रश्न और 3 मई को देश भर में आयोजित हुई मुख्य परीक्षा के सेट नंबर-12 के सवाल हूबहू मैच कर रहे हैं। इस पूरे खेल का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद हड़कंप मच गया है। हालांकि, जांच एजेंसियां इसकी कस्टडी में पड़ताल कर रही हैं। टेलीग्राम ग्रुप पर 1 मई की रात करीब 11:30 बजे जो PDF फाइल अपलोड की गई थी, उसे खोलने पर सेट नंबर-12 ही सामने आता है।

असली और लीक पेपर में 100% मैच हुए सवाल, प्रिज्म और सर्किट भी सेम
इस कथित लीक पेपर और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के असली पेपर का मिलान करने पर कई हैरान करने वाली समानताएं देखी गई हैं। NEET के असली पेपर के सवाल नंबर 5 में एक बॉल के वर्टिकली (ऊपर की ओर) जाने और वापस आने को लेकर वेलोसिटी-टाइम ग्राफ का एक चित्र बनाया गया है, जो लीक PDF से 100% मैच खाता है।
इसके अलावा प्रश्न संख्या 23 और 24 भी पूरी तरह वही हैं जो टेलीग्राम ग्रुप पर थे। सवाल नंबर-23 में मोनोक्रोमेटिक लाइट की एक किरण के प्रिज्म ABC से गुजरने का जिक्र है। असली पेपर और लीक पेपर में प्रिज्म का डायग्राम, सवाल की भाषा और चारों विकल्प (40°, 45°, 55° और 35°) हूबहू एक जैसे हैं। यही हाल सवाल नंबर-24 का है, जिसमें दिया गया इलेक्ट्रिक सर्किट डायग्राम भी पूरी तरह समान है।
पासवर्ड प्रोटेक्टेड था ‘प्राइवेट माफिया’ ग्रुप, ऐसे बंटा पेपर
इस काली कमाई के रैकेट को चलाने के लिए टेलीग्राम पर ‘प्राइवेट माफिया’ नाम का एक ग्रुप बनाया गया था, जिसमें कुल 402 मेंबर्स जुड़े थे। इस ग्रुप को विशेष रूप से पेपर लीक के लिए ही तैयार किया गया था। 1 मई की रात करीब 11:38 बजे ग्रुप के एडमिन ने एक मैसेज डाला, जिसमें लिखा था— “हम जल्द ही फुल पेपर अपलोड कर रहे हैं, उसका पासवर्ड LeakMafia@9466 है।” इसके ठीक बाद PDF फाइल डाली गई और दूसरा मैसेज आया— “जो पेपर हमने भेजा है, उसे सॉल्व कर लो। 99.99% चांस है कि यही पेपर में आएगा।”
CBI कोर्ट में 5 आरोपियों की पेशी, 7 दिनों की रिमांड मंजूर
इस देशव्यापी रैकेट पर शिकंजा कसते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अब तक 5 मुख्य आरोपियों को दबोच लिया है। इनमें नासिक का शुभम खैरनार, जयपुर के मांगीलाल बीवाल, विकास बीवाल, दिनेश बीवाल और गुरुग्राम का यश यादव शामिल हैं। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज अजय गुप्ता के सामने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नीतू सिंह ने दलील दी कि इस बड़ी साजिश की जड़ें पूरे देश में फैली हुई हैं। यह पता लगाना बेहद जरूरी है कि इस सिंडिकेट की पहुंच कहां तक है और सरकारी कर्मचारियों या प्रिंटिंग प्रेस के कौन से लोग इस महापाप में शामिल हैं। कोर्ट ने सभी 5 आरोपियों को 7 दिनों की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया है।
10 से 12 लाख का सौदा और व्हाट्सएप पर सबूत मिटाने का खेल
सीबीआई की तफ्तीश में जो कड़ियां सामने आई हैं, वो बेहद शातिराना हैं:
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शुभम खैरनार था मास्टरमाइंड: शुभम ने ही सबसे पहले यश यादव को टेलीग्राम पर लीक पेपर भेजा था। शुभम ने मांगीलाल से उसके छोटे बेटे के लिए पेपर का इंतजाम करने के बदले 12 लाख रुपये मांगे थे। सिक्योरिटी के तौर पर छात्रों के 10वीं-12वीं के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स और चेक लिए गए थे।
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500-600 सवालों का मिक्स सेट: पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपियों ने हूबहू पूरा पेपर एक साथ देने के बजाय फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के सैकड़ों सवालों को मिलाकर एक मिक्स सेट तैयार किया था, ताकि किसी को भनक न लगे और छात्रों का एडमिशन भी हो जाए।
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10 लाख में तय हुआ सौदा: मांगीलाल को 29 अप्रैल को ही यश यादव से यह लीक पेपर मिल गया था। सौदा 10 लाख रुपये में तय हुआ था और शर्त थी कि कम से कम 150 सवाल असली पेपर से जरूर मिलेंगे। मांगीलाल ने इस पेपर की प्रिंटेड कॉपियां अपने बेटे अमन, चचेरे भाई ऋषि, गुंजन, विकास और एक टीचर सत्यनारायण को बांट दी थीं।
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सबूत मिटाने के लिए आईफोन फॉर्मेट: आरोपी विकास बीवाल ने पूछताछ में माना कि सीकर में कोचिंग के दौरान वह यश यादव के संपर्क में आया था। यश ने उसे और उम्मीदवार लाने पर ‘फ्री पेपर’ का लालच दिया था। भंडाफोड़ होने के डर से मुख्य आरोपी यश यादव ने अपने आईफोन से विकास और मांगीलाल के साथ हुई पूरी चैट हिस्ट्री और अहम डिजिटल सबूत मिटा दिए थे, जिसे रिकवर करने की कोशिश की जा रही है।






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