Wednesday , 17 June 2026

अमेरिका और पश्चिमी देशों को भारत का करारा जवाब, रूस से तेल खरीद में बनाया नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड!

नई दिल्ली: पश्चिमी देशों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिबंधों की धमकियों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए भारत ने रूस से कच्चे तेल और गैस की खरीद में नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय दबावों की परवाह न करते हुए भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) के आयात में जबरदस्त बढ़ोतरी की है। हाल ही में जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत मई 2026 में रूसी जीवाश्म ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। भारतीय रिफाइनरियों द्वारा लगातार बढ़ाई गई खरीद के कारण रूस से कुल कच्चे तेल और अन्य ईंधन का आयात बढ़कर 5.8 अरब यूरो (लगभग 56,000 करोड़ रुपये) के पार पहुंच गया है। वैश्विक स्तर पर मई महीने में रूस के कच्चे तेल के कुल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50 फीसदी रही, जबकि भारत 36 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर मजबूती से टिका हुआ है।

अकेले कच्चे तेल का आयात 83 फीसदी के पार, कोयले की भी भारी मांग

आंकड़ों पर नजर डालें तो मई के महीने में रूस से भारत के कुल आयात में अकेले कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की हिस्सेदारी लगभग 83 फीसदी दर्ज की गई है। कच्चे तेल के अलावा भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से बड़े पैमाने पर तेल उत्पादों और कोयले का आयात भी जारी रखा है। इस अवधि में ऑयल प्रोडक्ट्स का आयात 55 करोड़ यूरो और कोयले के आयात का कुल मूल्य 42.9 करोड़ यूरो रहा। खास बात यह है कि मई महीने के दौरान भारत के कुल कच्चे तेल आयात में मासिक आधार पर आठ फीसदी का जोरदार उछाल आया है। इस भारी वृद्धि का सबसे बड़ा कारण मई में रूस से होने वाले कच्चे तेल के आयात में हुआ 21 फीसदी का भारी इजाफा माना जा रहा है।

गुजरात की रिफाइनरियों में उमड़ा रूसी तेल का सैलाब

भारत में रूसी कच्चे तेल की सबसे ज्यादा आमद गुजरात स्थित देश के प्रमुख रिफाइनिंग और औद्योगिक केंद्रों में देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, वाडिनार रिफाइनरी में अप्रैल की तुलना में मई में 36 प्रतिशत अधिक रूसी तेल जहाजों से उतारा गया। वहीं, दुनिया के सबसे बड़े जामनगर रिफाइनिंग परिसर में भी रूसी कच्चे तेल की आवक में मासिक आधार पर 14 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। निजी रिफाइनरियों के इस कदम से साफ है कि बाजार की मांग को पूरा करने के लिए रूसी तेल पहली पसंद बना हुआ है।

सरकारी रिफाइनरियों ने भी दिखाई तेजी, पारादीप में टूटा दो साल का रिकॉर्ड

निजी रिफाइनरियों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी रिफाइनरी कंपनियों ने भी इस वर्ष की शुरुआत में आयात दोबारा शुरू करने के बाद अपनी खरीद तेजी से बढ़ाई है। नवंबर 2025 के अंत में रूसी तेल आयात रोकने वाली न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरी ने मार्च से दोबारा खरीद शुरू की थी। मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति मासिक आधार पर 13 प्रतिशत बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में इसमें 42 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा, ओडिशा स्थित पारादीप रिफाइनरी में भी पिछले दो साल में रूसी कच्चे तेल की सर्वाधिक मात्रा उतारी गई है। यह स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि तमाम भू-राजनीतिक और प्रतिबंध संबंधी अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद, रियायती दरों पर उपलब्ध रूसी तेल भारतीय रिफाइनरी इकाइयों के लिए लगातार आकर्षक और फायदेमंद बना हुआ है।

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