रावलाकोट/इस्लामाबाद। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले तीन-चार दिनों से जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को लेकर बेहद भयावह और सनसनीखेज आंकड़े सामने आए हैं। जम्मू-कश्मीर जॉइंट पीपुल्स एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रमुख सदस्य सरदार उमर नज़ीर कश्मीरी ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की बर्बर कार्रवाई और सीधी गोलीबारी में अब तक 50 से ज्यादा बेगुनाह लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों नागरिक गंभीर रूप से घायल हैं।
उमर नज़ीर कश्मीरी ने इसे पाकिस्तानी हुकूमत और सेना का “बर्बर आतंकवाद” करार दिया है। इस हिंसा और दमन के विरोध में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक विरोध की लपटें पहुंच चुकी हैं।
रावलाकोट के डी-चौक पर अनिश्चितकालीन धरना, मुज़फ्फराबाद में भी हिंसा
रावलाकोट के डी-चौक स्थित धरना स्थल पर मौजूद उमर नज़ीर कश्मीरी ने एक बयान में बताया कि PoK की जनता अपने मौलिक अधिकारों और राहत की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रही थी। हालांकि, पाकिस्तानी पुलिस और सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां बरसाईं।
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रावलाकोट और मुज़फ्फराबाद बने अखाड़ा: भीषण गोलीबारी और हिंसा की घटनाएं रावलाकोट के साथ-साथ मुज़फ्फराबाद में भी व्यापक पैमाने पर दर्ज की गई हैं।
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शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर गोलीबारी: कश्मीरी नेता का आरोप है कि अधिकारों की मांग कर रहे आम नागरिकों को डराने और आवाज दबाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं।
इस्लामाबाद में ऐतिहासिक रैली, पूर्व सीनेटर मुश्ताक खान का मिला समर्थन
PoK में हो रहे इस कत्लेआम के खिलाफ 31 जुलाई को इस्लामाबाद के जी-10 मरकज़ में एक विशाल और ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।
एकजुटता के लिए जताया आभार: पूर्व सीनेटर मुश्ताक खान के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में हजारों पाकिस्तानी और कश्मीरी नागरिकों ने हिस्सा लिया। उमर नज़ीर कश्मीरी ने JAAC की कोर कमेटी और PoK की जनता की ओर से पूर्व सीनेटर मुश्ताक और इस्लामाबाद में एकजुटता दिखाने वाले सभी लोगों का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया है।
दमन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में PoK की जनता
JAAC नेताओं का कहना है कि मौतों और भयानक अत्याचारों के बावजूद PoK की जनता अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाली नहीं है। रावलाकोट में अनिश्चितकालीन धरना लगातार जारी है। मानवाधिकार संगठनों से भी इस पूरे घटनाक्रम और पाकिस्तानी सेना की बर्बरता पर तुरंत दखल देने की मांग की जा रही है।
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