
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाने के कथित फर्जीवाड़े पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। समाजवादी पार्टी की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुल्तानपुर में ‘नंद लाल’ नाम से जमा किए गए सभी 26 ‘फॉर्म-7’ खारिज कर दिए गए हैं और किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं काटा गया है। इसके साथ ही बिना जांच-पड़ताल अधूरा फॉर्म स्वीकार करने के आरोप में संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को तत्काल प्रभाव से चुनावी ड्यूटी से हटाते हुए उसके खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।
सपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाया था फर्जीवाड़े का आरोप
पूरा मामला समाजवादी पार्टी द्वारा उठाए गए उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें पार्टी ने 15 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुल्तानपुर में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फर्जी आवेदनों के इस्तेमाल की बात कही थी। सपा का आरोप था कि ‘नंद लाल’ नाम के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल करके थोक के भाव में ‘फॉर्म-7’ दाखिल किए जा रहे हैं, ताकि वैध मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित किया जा सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सुल्तानपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) से तत्काल विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की थी।
जांच में खुली पोल: 26 फॉर्मों पर एक ही नाम के दस्तखत, गायब थीं जरूरी जानकारियां
सुल्तानपुर के जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि मामला सुल्तानपुर की सदर विधानसभा सीट के बूथ संख्या 96 का है। यहां ‘नंद लाल’ नाम के व्यक्ति के हस्ताक्षरों वाले कुल 26 ‘फॉर्म-7’ जमा कराए गए थे, जिनके जरिए 26 वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की गुजारिश की गई थी। हालांकि, प्राथमिक पड़ताल में ही ये सभी फॉर्म पूरी तरह अधूरे पाए गए। आवेदनों पर न तो आवेदक का स्पष्ट नाम था, न ही वोटर आईडी (EPIC) नंबर दर्ज था और न ही कोई संपर्क नंबर (मोबाइल नंबर) मौजूद था। आवश्यक विवरण न होने के कारण बीएलओ स्तर पर इन फॉर्मों पर नाम हटाने की कोई अग्रिम कार्रवाई नहीं की गई और आवेदन निरस्त मान लिए गए।
बीएलओ पर गिरी गाज, गोसाईगंज थाने में गंभीर धाराओं में केस दर्ज
हालांकि फॉर्मों पर नाम नहीं कटे, लेकिन चुनाव आयोग ने बिना पहचान की पुष्टि किए ऐसे संदिग्ध और अधूरे फॉर्मों को रिसीव करने को चुनावी कर्तव्यों में घोर लापरवाही माना। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसी लापरवाही के चलते संबंधित बीएलओ को निर्वाचन संबंधी सभी जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा, 24 अक्टूबर को सुल्तानपुर के गोसाईगंज पुलिस स्टेशन में उक्त बीएलओ के खिलाफ सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करवाकर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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