समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां तथा उनके परिवार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को लेकर चल रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और एजेंसी इस हफ्ते कुछ बड़े खुलासे करने की तैयारी में है। ईडी ने ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों और कथित ‘डमी ट्रस्टियों’ को पूछताछ के लिए तलब किया है। इनमें चौधरी शहरयार सलीम (शहरयार खान) का नाम भी शामिल है, जिनके पूर्व में दिए गए बयानों के आधार पर वित्तीय हेराफेरी की परतें खोली जाएंगी।
डमी ट्रस्टी का कबूलनामा: ‘सिर्फ दस्तखत कराए जाते थे, फैसले आजम परिवार लेता था’
ईडी की इस कार्रवाई की नींव आयकर विभाग के समक्ष दर्ज हुए बयानों पर टिकी है। शहरयार खान ने पहले ही जांच एजेंसियों को दिए बयान में स्वीकार किया था कि ट्रस्ट में उनकी हैसियत केवल एक डमी सदस्य जैसी थी। उन्होंने खुलासा किया था कि जौहर विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) के चयन जैसी महत्वपूर्ण बैठकों में भी उनसे महज दस्तखत कराए गए और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी कोई भागीदारी नहीं रही। ट्रस्ट का पूरा वित्तीय और प्रशासनिक नियंत्रण केवल आजम खां और उनके परिवार के पास ही सीमित था। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि रामपुर की कई निजी निर्माण कंपनियों को सरकारी ठेके दिलवाए गए और उन सरकारी पैसों का इस्तेमाल ट्रस्ट की निजी संपत्तियों के निर्माण में किया गया।
86 करोड़ का बजट डायवर्जन और आजम के परिजनों से तीखे सवाल
ईडी की जांच में वित्तीय अनियमिताओं के गंभीर प्रमाण मिले हैं। जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स नामक फर्मों पर सरकारी अनुबंधों से प्राप्त करीब 86 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के दुरुपयोग का आरोप है। पूछताछ के दौरान ईडी के अधिकारी निम्न बिंदुओं पर गहन पड़ताल करेंगे:
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विभिन्न सरकारी विभागों से मिले बजट को ट्रस्ट के खातों और प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट करना।
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सरकारी और ग्राम समाज की जमीनों पर अवैध कब्जे की प्रक्रिया।
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ट्रस्ट के फंड से मस्जिद और समाजवादी पार्टी के दफ्तर का निर्माण।
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संदिग्ध स्रोतों से ट्रस्ट के खातों में जमा की गई करोड़ों रुपये की नकदी और आजम खां के परिजनों की इसमें प्रत्यक्ष भागीदारी।
जल निगम के ठेकों और प्रचार फर्मों के जरिए फंडिंग का शक
आजम खां के मंत्री कार्यकाल के दौरान जल निगम से जुड़े अधिकांश बड़े सरकारी ठेके हासिल करने वाली एक दर्जन से अधिक फर्मों की सूची ईडी ने तैयार कर ली है। इन सभी फर्मों के निदेशकों और संचालकों को नोटिस जारी कर तलब किया जा रहा है। जांच के घेरे में आफताब नामक व्यक्ति का नाम प्रमुखता से उभरा है, जिसकी कई कंपनियों को सरकारी प्रचार-प्रसार का काम सौंपा गया था। ईडी अब इस बात की पड़ताल में जुटी है कि इन सरकारी ठेकों और विज्ञापनों के एवज में जौहर ट्रस्ट को कितना ‘दान’ या किकबैक दिया गया।
आयकर जांच में सामने आए थे फर्जी दानदाता, अब ईडी खंगालेगी खाता
आयकर विभाग की पिछली पड़ताल में जौहर ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का चंदा देने वाले कई दानदाताओं का कोई वास्तविक रिकॉर्ड या वित्तीय आधार नहीं मिल सका था। ईडी अब इन शेल कंपनियों और फर्जी दानदाताओं के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच के दायरे में आने वाली प्रमुख संदिग्ध संस्थाओं और व्यक्तियों में शामिल हैं:
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कंपनियां व फर्में: पिरामिड कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स (लखनऊ), सालार ओवरसीज लिमिटेड (मुरादाबाद), एआर एजुकेशन ट्रस्ट (दिल्ली), अर्थ इंफ्राटेक (नोएडा), रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स (दिल्ली), रॉयल इम्पोरिया इंफ्राटेक, रोबोट विनिमय प्राइवेट लिमिटेड, वंडर सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड, और ड्रीम ऑफ पर्ल रियलिटी एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड।
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व्यक्तिगत नाम: फैजा परवीन (मुरादाबाद) और मोहम्मद हसीब (बहराइच)।
इन सभी संस्थाओं और व्यक्तियों के बैंक लेन-देन की जांच कर यह तय किया जाएगा कि यह काला धन सफेद करने की सोची-समझी साजिश थी या कुछ और।
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