
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पूर्व राज्यसभा सांसद और पार्टी सुप्रीमो मायावती के समधी डॉ. अशोक सिद्धार्थ ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का चौंकाने वाला एलान कर दिया है। बसपा से निष्कासन के बाद उन्होंने पार्टी प्रमुख मायावती को एक भावुक पत्र भेजकर अपने फैसले की जानकारी दी। पत्र में उन्होंने खुद को पार्टी के भीतर एक गहरी साजिश का शिकार बताते हुए कुछ प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उनका इशारा संगठन के उन दो शीर्ष पदाधिकारियों की तरफ है, जिनसे उनका लंबे समय से टकराव चल रहा था।
पार्टी में दो साल से जारी थी तनातनी, दो बार झेल चुके हैं निष्कासन
बसपा संगठन के भीतर अशोक सिद्धार्थ को लेकर पिछले करीब दो वर्षों से खींचतान की स्थिति बनी हुई थी। उन्हें दो बार पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। उन पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण में अनियमितता और दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान संगठन में अनाधिकृत दखलअंदाजी के आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा, अनुशासनहीनता और पार्टी के दिशा-निर्देशों की अनदेखी के आरोप भी उन पर लगे। हाल ही में हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई में उन पर उत्तर प्रदेश में पार्टी की चुनावी रणनीति को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप मढ़ा गया था।
वर्चस्व की जंग की आंच में झुलसे आकाश आनंद
अशोक सिद्धार्थ और संगठन के ताकतवर पदाधिकारियों के बीच की आपसी रस्साकशी का सीधा असर मायावती के भतीजे आकाश आनंद के राजनीतिक कद पर भी पड़ा। बताया जा रहा है कि आकाश आनंद के करीबी नेताओं ने कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली में बदलाव की मांग उठाई थी। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम को पार्टी सुप्रीमो मायावती के समक्ष बिल्कुल अलग और नकारात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे गलतफहमियां बढ़ती चली गईं।
अंटू मिश्रा का निष्कासन और संगठन में नए सियासी समीकरण
बसपा सरकार में कद्दावर मंत्री रहे अनंत कुमार मिश्रा उर्फ ‘अंटू मिश्रा’ के पार्टी से बाहर होने की तारें भी अशोक सिद्धार्थ से ही जुड़ी मानी जा रही हैं। बसपा प्रमुख मायावती ने पहले 3 अगस्त को अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर निकाला और इसके ठीक 10 दिन बाद अंटू मिश्रा पर भी कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्कासित कर दिया। अंटू मिश्रा और अशोक सिद्धार्थ की नजदीकियों को ही इस कार्रवाई की मुख्य वजह माना गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धार्थ के संन्यास के बाद बसपा में आंतरिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं और इससे संगठन में आकाश आनंद की दोबारा मजबूत वापसी की अटकलों को बल मिल रहा है।
‘पार्टी पर कब्जे का आरोप बेबुनियाद, एक दिन सामने आएगा सच’
बसपा प्रमुख को लिखे पत्र में अशोक सिद्धार्थ ने खुद पर संगठन पर कब्जा करने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने लिखा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त उनके विरोधियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें किनारे लगाया है, लेकिन समय आने पर सारा सच सामने आ जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी आकाश आनंद को गुमराह नहीं किया और बीते कई महीनों से उनकी आकाश से कोई मुलाकात तक नहीं हुई है।
‘संन्यास को आकाश की वापसी से न जोड़ें, बहनजी का आदेश सर्वोपरि’
सिद्धार्थ ने मायावती से भावुक अपील करते हुए कहा कि उनके संन्यास को आकाश आनंद की राजनीतिक बहाली से जोड़कर न देखा जाए। आकाश को जिम्मेदारी सौंपना या न सौंपना पूरी तरह से पार्टी सुप्रीमो का विशेषाधिकार है। उन्होंने तथागत बुद्ध और मान्यवर कांशीराम की सौगंध खाते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी मिशन या पार्टी के हितों के खिलाफ कोई काम नहीं किया। सिद्धार्थ ने कहा कि मायावती का आदेश उनके लिए तमाम पारिवारिक रिश्तों और नातों से भी ऊपर है। यदि उनके राजनीतिक जीवन से बहुजन मिशन को रत्ती भर भी नुकसान पहुंचता है, तो वह तुरंत राजनीति को अलविदा कह रहे हैं और बहनजी के लिए जान कुर्बान करना भी उनके लिए गर्व की बात होगी।
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