Thursday , 24 September 2026

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कोर्ट का बड़ा कदम: 36 हजार पन्नों के दस्तावेज, 101 CD और 133 गवाह; चार्जशीट से हटीं कई गंभीर धाराएं

अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े बहुचर्चित मामले में कानूनी प्रक्रिया ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। अदालत ने मामले की जांच एजेंसी द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट पर औपचारिक संज्ञान ले लिया है। इस मामले में आरोपियों की ओर से पेश हो रहे ‘लीगल एड डिफेंस काउंसिल’ के अधिवक्ता कुल शेखर सिंह ने चार्जशीट के तकनीकी पहलुओं, हटाई गई धाराओं और मामले के वर्तमान कानूनी घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की है।

36 हजार से ज्यादा पन्नों के दस्तावेज और 101 सीडी कोर्ट में पेश

अधिवक्ता कुल शेखर सिंह के अनुसार, जांच अधिकारी की ओर से 59 पन्नों की मुख्य चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई है। हालांकि, इसके समर्थन में साक्ष्य के रूप में लगभग 36,039 पन्नों के विशाल दस्तावेज और करीब 101 सीडी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई हैं। पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में अपनी जांच को पुख्ता करने के लिए 133 लोगों को गवाह बनाया है।

चार्जशीट से हटीं धाराएं, इन प्रावधानों पर कानूनी पेंच

चार्जशीट में पुलिस की ओर से कुछ कानूनी धाराओं में अहम फेरबदल किया गया है:

  • हटीं गंभीर धाराएं: सभी आरोपियों के खिलाफ पहले लगाई गई धारा 305 और धारा 306 को पूरी तरह हटा दिया गया है।

  • धारा 317(2) में बदलाव: आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ पहले दर्ज धारा 317(2) को भी हटा दिया गया है। हालांकि, अन्य आरोपियों पर यह धारा लागू रखी गई है, क्योंकि पुलिस का दावा है कि उनसे कथित चोरी की बरामदगी की गई है।

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धारा 316(5) बरकरार: चार्जशीट में धारा 316(5) (पुरानी आईपीसी की धारा 409 यानी लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात के समतुल्य) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1), 13(1)(a) और 13(2) को कायम रखा गया है।

बचाव पक्ष के वकील ने इन धाराओं के लागू होने पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका तर्क है कि उनके मुवक्किल किसी भी सूरत में लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी) के दायरे में नहीं आते हैं, ऐसे में भ्रष्टाचार निवारण कानून और धारा 316(5) को जबरन थोपा गया है।

गवाहों की फेहरिस्त पर उठे सवाल, ट्रस्ट से जुड़े 4 लोग शामिल

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने गवाहों की सूची पर तीखा विरोध दर्ज कराया। अधिवक्ता का आरोप है कि जांच अधिकारी ने निष्पक्ष जांच नहीं की और ऐसे व्यक्तियों को गवाह के तौर पर पेश किया है, जिन्हें असलियत में आरोपी बनाया जाना चाहिए था। उल्लेखनीय है कि पुलिस द्वारा पेश की गई 133 गवाहों की सूची में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े 4 लोगों के नाम भी शामिल हैं।

वकीलों के हंगामे से टली सुनवाई, अब नए सिरे से जमानत की तैयारी

मामले के प्रमुख आरोपियों—टीनू यादव और सुभाष—की जमानत अर्जियों पर सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन कोर्ट परिसर में वकीलों के कड़े विरोध और गहमागहमी के चलते कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी और मामले की सुनवाई 24 सितंबर के लिए तय की गई।

वहीं, मामले के अन्य 6 आरोपियों की जमानत पूर्व में खारिज हो चुकी थी। बचाव पक्ष का कहना है कि पूर्व का फैसला धारा 305 और 306 के आधार पर आया था। चूंकि अब नई चार्जशीट से ये धाराएं हटा ली गई हैं, इसलिए परिस्थितियों में आए बदलाव (चेंज ऑफ सरकमस्टेंस) को आधार बनाकर दोबारा जमानत याचिका दायर की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।

 

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