
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के संवेदनशील मामले की जांच अब सिर्फ पैसों की हेराफेरी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह मंदिर की आंतरिक और गोपनीय जानकारियों के बाहर लीक होने के एक बड़े नेटवर्क तक पहुंच चुकी है। जांच एजेंसियों ने इस मामले में मंदिर और व्यवस्था से जुड़े पूर्व व वर्तमान कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, पूछताछ में दो कर्मचारियों से मिले अहम इनपुट के आधार पर पुलिस अब उस संदिग्ध व्यक्ति तक पहुंच गई है, जिस पर मंदिर से जुड़ी बेहद संवेदनशील सूचनाएं एक प्रमुख राजनीतिक दल के बड़े नेता तक पहुंचाने का गंभीर संदेह है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों की चिंता के बाद बढ़ा जांच का दायरा
इस मामले में जांच की दिशा उस वक्त बदली जब दान चोरी की घटना के लगभग एक महीने बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों की आपसी बातचीत के कुछ अंश सामने आए। इस बातचीत में ट्रस्ट के भीतर की अति-गोपनीय जानकारियां मीडिया और एक प्रमुख राजनीतिक नेता तक लीक होने को लेकर गहरी चिंता जताई गई थी। इसके तुरंत बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस बात की गहन तफ्तीश शुरू कर दी कि आखिरकार परिसर की चारदीवारी के भीतर चलने वाली गुप्त रणनीतियां और जानकारियां किसके जरिए बाहर भेजी जा रही थीं।
संदिग्ध का लखनऊ कनेक्शन और सबूतों की पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि एक कर्मचारी सीधे तौर पर एक प्रमुख सियासी नेता के संपर्क में था और उससे मुलाकात करने के लिए लखनऊ भी गया था। पुलिस अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का इस जानकारी के साथ मिलान कर रही है। सूत्रों का कहना है कि पुख्ता डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य हाथ लगते ही संबंधित संदिग्ध के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा चुकी है।
शिकंजा कसते ही सोशल मीडिया से पोस्ट गायब, साइबर सेल एक्टिव
जैसे ही जांच एजेंसियों का दायरा आगे बढ़ा, संदिग्ध की गतिविधियों में बड़ा बदलाव देखा गया। सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई की भनक लगते ही संदिग्ध ने जुलाई के बाद अपने फेसबुक अकाउंट से कई पुरानी पोस्ट आनन-फानन में डिलीट कर दीं। यही नहीं, 28 जुलाई के बाद से उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल पर पूरी तरह खामोशी छा गई और कोई नई पोस्ट साझा नहीं की गई। हटाए गए इन पोस्ट और डेटा को दोबारा रिकवर करने के लिए पुलिस ने साइबर सेल की तकनीकी मदद ली है। साथ ही, घटना के बाद संदिग्ध और अन्य संबंधित लोगों के बीच हुए डिजिटल व फोन संपर्कों की पूरी टाइमलाइन खंगाली जा रही है।
बैंक कर्मियों से सघन पूछताछ, दो बयानों ने खोली परतें
मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के सभी संबंधित कर्मचारियों के बयान पहले ही दर्ज कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, इनमें से तीन कर्मियों से कई दौर की व्यापक पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान दो कर्मचारियों द्वारा दी गई जानकारियां विवेचना में काफी निर्णायक साबित हो रही हैं। पुलिस इन बयानों को मौके से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड्स से क्रॉस-वेरिफाई कर रही है।
25 सितंबर को दाखिल हो सकती है चार्जशीट, 90 दिन की समयसीमा पर टिकी नजरें
राम मंदिर दान चोरी मामले की विवेचना अब अपने अंतिम चरण में मानी जा रही है। पुलिस 25 सितंबर तक न्यायालय में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की तैयारी में है। हालिया घटनाक्रमों के अनुसार, विवेचना में दो और नए नाम सामने आने की पूरी संभावना है। 22 सितंबर को आरोपियों की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो रहे हैं। कानूनन यदि 90 दिनों की तय समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होती है, तो आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत (डिफॉल्ट बेल) पाने का वैधानिक अधिकार मिल जाता है। ऐसे में जांच एजेंसी की कोशिश समय रहते आरोपपत्र दाखिल कर कानूनी शिकंजा पूरी तरह कसने की है।
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