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Bengaluru Cyber Crime: ऑनलाइन डेटिंग ऐप पर ‘हनीट्रैप’, मिलने बुलाकर अपहरण और लूट; पुलिस ने 2 महिलाओं समेत 11 को दबोचा…इस तरह बिछाते जाल

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स और वेबसाइट्स के जरिए मासूम लोगों को अपने जाल में फंसाकर अपहरण, मारपीट और जबरन वसूली करने वाले एक बड़े संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) की विमेन प्रोटेक्शन विंग (WPW) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस सनसनीखेज मामले में दो महिलाओं सहित कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

यह गिरोह फर्जी आईडी और लड़कियों की तस्वीरें दिखाकर लोगों को मिलने के बहाने बुलाता था और फिर वारदात को अंजाम देता था।

फर्जी फोटो से बिछाया जाल, मिलने पहुंचे युवक को ऑटो में घुमाकर लूटा

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्यों ने एक लोकप्रिय डेटिंग वेबसाइट पर एक आकर्षक युवती की तस्वीर पोस्ट कर लोगों को आकर्षित करना शुरू किया। इसी जाल में फंसकर एक पीड़ित युवक वेबसाइट पर दिख रही लड़की से मिलने के लिए बेंगलुरु के एचआरबीआर (HRBR) लेआउट पहुंचा।

जैसे ही युवक तय स्थान पर पहुंचा, वहां पहले से घात लगाकर मौजूद गिरोह के सदस्यों ने उसका अपहरण कर लिया। आरोपी पीड़ित को एक ऑटो में जबरन बैठाकर शहर के अलग-अलग सुनसान इलाकों में घुमाते रहे। इस दौरान उसके साथ जमकर मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी देकर सोने की चेन, नकदी और मोबाइल फोन लूट लिया।

दो महिलाओं समेत 11 गिरफ्तार, आरोपी चेतन और मनु मास्टरमाइंड!

वारदात की शिकायत मिलने के तुरंत बाद सीसीबी की डब्ल्यूपीडब्ल्यू (WPW) टीम ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर छापेमारी की और गिरोह के 11 सदस्यों को धर दबोचा।

गिरफ्तार मुख्य आरोपी:

  • चेतन, मनु, शाबू, मंजुनाथ, जयकुमार, अरुण कीर्ति, कंथा राजू, संदीप और अन्य।

  • महिलाओं की भूमिका: गिरोह में शामिल दो महिलाएं मुख्य रूप से टारगेट से चैट करने, उन्हें झांसे में लेने और लोकेशन पर बुलाने का काम करती थीं।

13 मोबाइल, ऑटो और दोपहिया वाहन बरामद; अन्य पीड़ितों की तलाश जारी

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अपराध में इस्तेमाल किए गए और लूटे गए सामान को जब्त कर लिया है:

  • बरामदगी: 2 ऑटो, 4 दोपहिया वाहन (बाइक/स्कूटर), 13 स्मार्टफोन, लूटी गई नकदी और अन्य सामान।

पुलिस अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। चूंकि सामाजिक बदनामी के डर से कई पीड़ित सामने नहीं आते, इसलिए पुलिस अन्य मामलों को भी खंगाल रही है और यह पता लगा रही है कि क्या इस रैकेट के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं।

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