Tuesday , 3 November 2026

Assembly Elections: पांच राज्यों में वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण के बाद 2.29 करोड़ मतदाता घटे, अकेले यूपी में कटे दो करोड़ से ज्यादा नाम

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच चुनाव आयोग द्वारा कराई गई वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पांचों चुनावी राज्यों में मतदाता सूची की छंटनी और सुधार के बाद वोटरों की संख्या में 13.24 फीसदी तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चुनाव आयोग और राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, इन राज्यों में पहले कुल मतदाताओं की संख्या करीब 18.71 करोड़ थी, जो अब घटकर 16.43 करोड़ रह गई है। यानी पूरे संशोधन के दौरान लगभग 2.29 करोड़ (12.2 फीसदी) मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हुए हैं।

उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ा असर: 90 फीसदी गिरावट केवल एक राज्य में

पांचों राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण का सबसे गहरा प्रभाव उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। कुल 2.29 करोड़ की गिरावट में से करीब 90 फीसदी हिस्सा अकेले यूपी से है।

  • दूसरे चरण में हुए पुनरीक्षण से पहले राज्य में 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे।

  • ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सामने आने पर यह संख्या तेजी से गिरकर 12.56 करोड़ पर आ गई थी, जिसमें से 2.89 करोड़ नाम हटाए गए थे।

  • दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम सूची में लगभग 84 लाख (करीब 29%) नाम दोबारा जोड़े गए।

  • अंतिम सूची में यूपी के कुल वोटरों की संख्या 13.40 करोड़ दर्ज की गई। इस तरह राज्य में शुद्ध रूप से 2.04 करोड़ (13.24%) मतदाता कम हुए हैं।

पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में सुधार और कटौतियों का गणित

तीसरे चरण के तहत पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में पुनरीक्षण का काम पूरा किया गया:

  • पंजाब: राज्य में सबसे बेहतर रिकवरी दर्ज की गई। ड्राफ्ट में वोटरों की संख्या 2.15 करोड़ से गिरकर 1.94 करोड़ हुई थी। हटाए गए करीब 21 लाख नामों में से 7 लाख नाम दोबारा जुड़े और अंतिम आंकड़ा 2.01 करोड़ रहा। यहां कुल 14 लाख (6.34%) मतदाता कम हुए।

  • उत्तराखंड: देवभूमि में मतदाताओं की संख्या 80 लाख से घटकर 71 लाख हुई और अंतिम सूची में यह 72 लाख पर टिकी। यहां कुल 8 लाख (10.07%) वोटर घटे। हटाए गए नामों में से केवल 25 हजार (0.0025 करोड़ यानी लगभग 3%) नाम ही वापस जुड़ सके।

  • मणिपुर: पूर्वोत्तर के इस राज्य में मतदाताओं की संख्या 20.9 लाख से गिरकर 19.3 लाख हुई, जो सुधार के बाद अंततः 19.6 लाख दर्ज हुई। यहां पंजाब के समान ही 6.33 फीसदी की शुद्ध कमी आई, जिसमें ड्राफ्ट से हटे करीब 17 फीसदी नाम फिर शामिल किए गए।

गोवा का अनोखा ट्रेंड: अंतिम सूची में और घट गए वोटर

गोवा में दूसरे चरण में पुनरीक्षण किया गया था, जहां बाकी राज्यों के उलट ट्रेंड दिखा। सामान्य तौर पर ड्राफ्ट के बाद नाम बढ़ते हैं, लेकिन गोवा में मतदाताओं की संख्या 11.85 लाख से घटकर ड्राफ्ट में 10.85 लाख हुई और अंतिम सूची में और गिरकर 10.58 लाख रह गई। गोवा में कुल 1.3 लाख (10.76%) वोटरों की कमी आई और यह अकेला ऐसा राज्य रहा जहां ड्राफ्ट के बाद हटाए गए नामों में कोई बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई।

चुनावी तैयारी और विधानसभाओं का कार्यकाल

चुनाव आयोग ने 17 राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया लागू करते हुए स्पष्ट किया था कि इन पांच राज्यों में चुनाव तय समय सीमा पर कराए जाने हैं। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य फर्जी या दोहरी प्रविष्टियों को हटाना और 1 जनवरी की अर्हक तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए पात्र युवाओं को मताधिकार देना है।

‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ के प्रावधानों के अनुसार, चुनाव आयोग कार्यकाल समाप्ति से 6 महीने पहले कभी भी चुनाव संपन्न करा सकता है। उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 22 मई को पूरा हो रहा है, जबकि मणिपुर (60 सीटें), गोवा (40 सीटें), पंजाब (117 सीटें) और उत्तराखंड (70 सीटें) की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च में समाप्त हो रहा है। ऐसे में आयोग की ओर से इन राज्यों में चुनावी बिगुल जल्द फूंके जाने की संभावना है।

 

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