Thursday , 7 May 2026

हिंसा ने झकझोरा, इंसानियत ने थामा हाथ: दीपू दास के परिजनों के लिए खुला मदद का सैलाब… भारत ने भेजी मदद

नई दिल्ली । बांग्लादेश के मयमनसिंह में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाले गए हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की मौत के बाद उनके परिवार की बदहाली की खबरों ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक अपील वायरल हुई, जिसने मानवता के नाते दुनिया भर के लोगों को एकजुट कर दिया है। वर्तमान में भारत, अमेरिका, सिंगापुर और कई अन्य देशों से दास परिवार के लिए आर्थिक सहायता का सिलसिला जारी है, जिससे पीड़ित परिवार को इस कठिन समय में एक संबल मिला है।

दीपू दास के परिवार की मदद के लिए बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों ने सोमवार को एक बैंक खाता खोला। सोशल मीडिया पर लोग लगातार यह पूछ रहे थे कि वे इस असहाय परिवार तक सहायता कैसे पहुँचा सकते हैं। खाता खुलने के कुछ ही घंटों के भीतर शाम तक देश-विदेश से दान आना शुरू हो गया। चटगांव विश्वविद्यालय के संस्कृत प्रोफेसर कुशल बरन चक्रवर्ती, जो स्वयं प्रतिनिधिमंडल के साथ पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे, ने बताया कि सोशल मीडिया पर विवरण साझा करने के बाद से लाखों रुपये की सहायता राशि एकत्रित हो चुकी है। लोग न केवल पैसे भेज रहे हैं, बल्कि सहानुभूति जताते हुए भुगतान के स्क्रीनशॉट भी साझा कर रहे हैं।

दीपू दास अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और एक कपड़ा निर्माण कंपनी में मामूली वेतन पर काम करते थे। उनकी कड़ी मेहनत और अच्छे प्रदर्शन के कारण कंपनी ने हाल ही में उन्हें पदोन्नत किया था, लेकिन यही तरक्की उनके लिए काल बन गई। आरोप है कि उनके कुछ सहकर्मी इस पदोन्नति से ईर्ष्या करने लगे और उन पर सोशल मीडिया पर भड़काऊ संदेश फैलाने का झूठा आरोप मढ़ दिया। विडंबना यह है कि दीपू के पास स्मार्टफोन तक नहीं था। इसी झूठी अफवाह के चलते भीड़ ने उन्हें निशाना बनाया।

वर्तमान में दास परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय है। वे मयमनसिंह के तारकांदी क्षेत्र में एक गोदाम के पीछे बने एक अस्थाई और जर्जर मकान में रहने को मजबूर हैं। दीपू की शादी महज दो साल पहले हुई थी और उनका एक छोटा बच्चा भी है। प्रोफेसर चक्रवर्ती के अनुसार, परिवार इस समय भावनात्मक और आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है। स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पास एक सप्ताह के भोजन तक के पैसे नहीं थे और उन्हें दीपू का शव घर लाने तक से रोकने की कोशिश की गई। इस हृदयविदारक घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि वैश्विक स्तर पर मिल रही आर्थिक मदद पीड़ित परिवार के लिए एक तात्कालिक राहत की किरण है, लेकिन स्थानीय स्तर पर दीपू की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग अब और तेज हो गई है। दुनिया भर के लोग अब केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं, बल्कि इस बेकसूर युवक के लिए न्याय की भी गुहार लगा रहे हैं।

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