वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका में संपन्न हुए मध्यावधि चुनाव (मिडटर्म इलेक्शन) में रिपब्लिकन पार्टी को लगे अप्रत्याशित झटके की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी साफ सुनाई दे रही है। इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में जबर्दस्त हलचल और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। तेहरान की सड़कों पर सरकार समर्थक और कट्टरपंथी समूहों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरों और पोस्टरों को आग के हवाले कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों के बीच अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी के हाथ से बहुमत फिसलने को लेकर खासा उत्साह देखा गया।
ईरान युद्ध और महंगाई ने बिगाड़ा रिपब्लिकन का चुनावी खेल
चुनावी पंडितों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी मतदाताओं के बीच ईरान से जुड़ा सैन्य तनाव और बेलगाम महंगाई रिपब्लिकन पार्टी की हार के प्रमुख कारक बने। चुनाव प्रचार के दौरान पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें, दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर महंगाई की मार और जीवनयापन का बढ़ता खर्च जनता के लिए सबसे बड़े चुनावी मुद्दे थे। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने इन आर्थिक विसंगतियों को आक्रामक ढंग से उठाया, जिसका सीधा चुनावी लाभ उन्हें मिला। खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव के चलते आम अमेरिकियों की जेब पर पड़ा आर्थिक बोझ अंततः ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती साबित हुआ।
ट्रंप बोले- ‘ईरान पर सैन्य कार्रवाई जरूरी थी, दोबारा मौका मिला तो फिर करेंगे’
संसदीय चुनाव में करारी शिकस्त के बाद भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने रुख पर अडिग नजर आ रहे हैं। उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य एक्शन के अपने फैसले का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाना अनिवार्य था। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि खाड़ी संकट और ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव बढ़ा। विपक्षी डेमोक्रेट्स द्वारा संसद में महाभियोग (Impeachment) लाए जाने की चर्चाओं पर ट्रंप ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें किसी महाभियोग का डर नहीं है और यदि विपक्ष ने ऐसी कोई राजनीतिक साजिश रची, तो उसे जनता के बीच भारी राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी माना- युद्ध ने छीनी संसद की सत्ता
दिलचस्प बात यह है कि खुद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के लिए ईरान युद्ध को ही सबसे बड़ा कारण ठहराया है। वेंस का मानना है कि सैन्य संघर्ष और उससे पैदा हुई गंभीर आर्थिक दिक्कतों ने मध्यम वर्ग और आम मतदाताओं के मिजाज को सीधे प्रभावित किया, जिसके चलते 2024 में समर्थन देने वाले कई मतदाताओं ने इस बार डेमोक्रेट्स का रुख किया। वेंस के इस बयान पर अपनी राय जाहिर करते हुए ट्रंप ने कहा कि वेंस की चिंताएं अपनी जगह जायज हो सकती हैं, लेकिन तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पहली प्राथमिकता थी। नतीजों के बाद भी ट्रंप प्रशासन यह संदेश देने की पूरी कोशिश कर रहा है कि चुनावी हार के बावजूद उसकी विदेश नीति और सख्त रुख में कोई नरमी नहीं आएगी।
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