वाशिंगटन: अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Department of the Treasury) ने ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक कार्रवाई को और सख्त करते हुए भारत और तुर्किये स्थित कई कंपनियों व व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिका ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि जो भी व्यक्ति या व्यावसायिक संस्था ईरानी शासन का आर्थिक या साजो-सामान के स्तर पर समर्थन करेगी, उसके खिलाफ कड़े दंडात्मक कदम उठाए जाते रहेंगे। यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन के तहत चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का हिस्सा है, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात नेटवर्क को ध्वस्त कर उसकी वित्तीय ताकत को तोड़ना है।
‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ से ईरानी अर्थव्यवस्था पस्त
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, प्रतिबंधों की इस आक्रामक रणनीति से ईरान की घरेलू अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। अमेरिकी दबाव के चलते ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ ऐतिहासिक रूप से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है, जबकि देश में महंगाई दर लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच गई है। अमेरिका का दावा है कि इस अभियान के जरिए तेहरान के उस राजस्व स्रोत को पूरी तरह से बंद करना है, जिसके जरिए वह तेल व्यापार से भारी नकदी जुटाकर अपनी सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय संघर्षों को वित्तपोषित करता है।
भारतीय नागरिकों और नेटवर्क पर क्या लगे हैं आरोप?
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ताजा प्रतिबंधों में भारत में सक्रिय एक कथित ‘बड़े आपराधिक नेटवर्क’ को निशाना बनाया गया है। इस नेटवर्क का संचालन सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और उनके दो व्यवसायों का नेतृत्व कर रहे दो अन्य भारतीय नागरिक कर रहे थे। इसके अलावा सुनील कुमार शर्मा से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी नौ अन्य व्यापारिक संस्थाओं को भी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया गया है।
जहाजों को दिए फर्जी पहचान पत्र और प्रमाणपत्र
अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस भारतीय नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों ने ईरानी तेल के अवैध परिवहन में लगे प्रतिबंधित जहाजों की मदद की। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने ईरानी सेना और उसके सहयोगी संगठनों द्वारा संचालित तेल टैंकरों व मालवाहक जहाजों को गलत पहचान, फर्जी दस्तावेज और गैर-कानूनी प्रमाणपत्र मुहैया कराए, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय निगरानी और प्रतिबंधों से बचकर निकल सकें। इसी कार्रवाई के तहत तुर्किये की कंपनी ‘फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक’ पर भी ईरान के प्रतिबंधित विमानन क्षेत्र को तकनीकी व ग्राउंड सेवाएं देने के आरोप में पाबंदी लगाई गई है।
पहले भी भारतीय कंपनियों पर लग चुकी है अमेरिकी पाबंदी
ईरान से व्यापारिक संबंधों के आरोप में भारतीय कंपनियों पर अमेरिकी कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अमेरिका मुंबई स्थित दो फर्मों और उनसे जुड़े पांच नागरिकों पर प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के अवैध आयात-निर्यात में सहायता करने के आरोप में ‘एसएसपीएल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ (SSPL Solutions Pvt Ltd) और ‘समुद्र मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ (Samudra Marine Services Pvt Ltd) पर दंडात्मक कार्रवाई की थी। इस दौरान एसएसपीएल सॉल्यूशंस के ध्वनि वोरा व निसर्ग वोरा तथा समुद्र मरीन सर्विसेज के केतन कोचिकर, भूपेंद्रसिंह साहू और हरिश्याम हरिहरन को प्रतिबंधित सूची में डाला गया था।
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