लखनऊ/उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित दुर्गम केदारताल ट्रेक पर मौसम के अचानक बदले मिजाज और भीषण हिमस्खलन ने लखनऊ के एक परिवार की खुशियां छीन लीं। राजधानी लखनऊ की रहने वाली दो सगी बहनों—वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा की बर्फीले तूफान में फंसने से दर्दनाक मौत हो गई। बुधवार सुबह चले सघन रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दोनों बहनों के शव बरामद किए गए। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन शवों को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो चुके हैं। गुरुवार दोपहर गायत्रीपुरम स्थित पैतृक आवास पर शव पहुंचते ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस हादसे में लापता कुल 8 ट्रेकर्स में से अब तक 6 के शव निकाले जा चुके हैं।
27 अक्टूबर को गंगोत्री से शुरू हुआ था सफर, रास्ते में बिगड़ा मौसम
वर्तिका और दीपिका 27 अक्टूबर को सात अन्य ट्रेकर्स और पांच सपोर्ट स्टाफ के साथ गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुई थीं। तय कार्यक्रम के अनुसार इस दल को तीन दिन का ट्रेक पूरा कर 29 अक्टूबर तक सुरक्षित वापस लौटना था। इसी दौरान उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले इलाकों में अचानक मौसम ने करवट ली। भारी बर्फबारी और एवलांच (हिमस्खलन) के चलते वापसी के सभी रास्ते पूरी तरह बंद हो गए और पूरा दल रास्ते में ही फंस गया।
30 अक्टूबर को कच्ची ढांग के समीप फंसे सदस्यों ने किसी तरह ट्रेकिंग एजेंसी से संपर्क साधकर मदद की गुहार लगाई। इसके बाद प्रशासन और राहत-बचाव दल ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया। 31 अक्टूबर को चार सपोर्ट स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि बुधवार को दोनों बहनों समेत तीन और ट्रेकर्स के शव बरामद हुए।
ट्रेकिंग का था गहरा जुनून, नोएडा और मुंबई की कंपनियों में करती थीं काम
मृतक बहनों के पिता श्रीनारायण वर्मा कृषि विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और मूल रूप से बाराबंकी के सराय पांडेय के निवासी हैं। बड़ी बहन वर्तिका नोएडा की एक निजी कंपनी में कार्यरत थीं और फ्रीलांस इन्फ्लुएंसर भी थीं। उन्हें अपनी कंपनी की ओर से मिले टूर पैकेज के तहत केदारताल ट्रेक पर जाने का अवसर मिला था। वहीं छोटी बहन दीपिका मुंबई स्थित एक फर्म में बतौर ग्राफिक्स डिजाइनर काम कर रही थीं और वर्तमान में ‘वर्क फ्रॉम होम’ होने की वजह से लखनऊ में ही रह रही थीं।
परिजनों के अनुसार, दोनों बहनों को पहाड़ों और एडवेंचर ट्रेकिंग का बेहद शौक था। वे भारत और नेपाल के कई जटिल ट्रेक सफलतापूर्वक पूरे कर चुकी थीं। महज दो महीने पहले ही दोनों बहनें फूलों की घाटी (Valley of Flowers) और हेमकुंड साहिब की यात्रा पूरी करके सुरक्षित लौटी थीं।
एजेंसी पर लापरवाही के संगीन आरोप, सोशल मीडिया से मिली अनहोनी की खबर
हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने ट्रेकिंग एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मृतकाओं के भाई अतुल वर्मा ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी आपदा के बावजूद एजेंसी ने परिवार को हादसे की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी। परिजनों को सोशल मीडिया के जरिए घटना का पता चला, जिसके बाद वे आनन-फानन में उत्तरकाशी पहुंचे।
परिजनों ने सवाल उठाया कि जब मौसम विभाग की ओर से खराब मौसम का अलर्ट जारी था, तो ट्रेकर्स को इतने जोखिम भरे केदारताल रूट पर आगे जाने की अनुमति क्यों दी गई? परिजनों का कहना है कि यदि एजेंसी समय रहते सूचना दे देती, तो तुरंत व्यापक स्तर पर रेस्क्यू की कोशिशें तेज कराई जा सकती थीं।
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