
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन आज एक अनोखा और बड़ा राजनीतिक दांव चलने जा रहा है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहा विपक्ष आज मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग कार्यक्रम’ (Public Impeachment) आयोजित कर रहा है। इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आधिकारिक आवास पर विपक्षी दलों के सांसदों का जमावड़ा शुरू हो चुका है, जहां संसद की तर्ज पर पूरी कार्यवाही संचालित करने की व्यापक तैयारियां की गई हैं।
संसद के भीतर संख्या बल की सीमाओं के बीच जनता तक सीधा संदेश पहुंचाने के मकसद से खरगे के आवास पर एक विशेष मंच (सेटअप) तैयार किया गया है। हालांकि, कानूनी पेचीदगियों और राजनीतिक विवादों से बचने के लिए इस कार्यक्रम के नाम और स्वरूप को लेकर गठबंधन के भीतर घंटों मंथन चला।
मॉक पार्लियामेंट से लेकर पब्लिक कोर्ट तक: यूं तय हुआ कार्यक्रम का स्वरूप
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रतीकात्मक कार्यवाही को लेकर इंडिया गठबंधन की आंतरिक बैठक में तीन प्रमुख मॉडलों पर लंबी चर्चा हुई थी:
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पहला सुझाव (मॉक पार्लियामेंट): शुरुआत में इसे पूरी तरह से एक ‘मॉक पार्लियामेंट’ का रूप देने का प्रस्ताव था, जिसमें सत्ता पक्ष, विपक्ष, स्पीकर और स्वयं ज्ञानेश कुमार का किरदार अलग-अलग नेताओं को निभाना था। हालांकि, गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस पर ऐतराज जताया। उनका तर्क था कि देश में संसद एक ही है और बाहर ऐसा समानांतर सेटअप तैयार करने पर भाजपा इसे ‘संसद का अपमान’ करार देकर राजनीतिक मुद्दा बना सकती है।
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दूसरा सुझाव (पब्लिक कोर्ट या जन अदालत): दूसरा विकल्प यह था कि अदालत की तर्ज पर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बाकायदा आरोप पत्र (चार्जशीट) पेश किए जाएं, दोनों पक्षों के वकीलों की जिरह हो और अंत में उन्हें दोषी ठहराया जाए। लेकिन कानूनी जानकारों और वरिष्ठ नेताओं ने चेतावनी दी कि यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट की बेंच के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में बाहर अदालत लगाने से न्यायपालिका की ‘अवमानना’ (Contempt of Court) का गंभीर मामला बन सकता है।
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तीसरा सुझाव (सार्वजनिक महाभियोग – जिस पर बनी सहमति): अंततः तीसरे विकल्प को सबसे सुरक्षित, कानूनी रूप से पुख्ता और राजनीतिक रूप से प्रभावी माना गया। इसके तहत पूरी प्रक्रिया संसद की तर्ज पर ही चलेगी, लेकिन इसे ‘मॉक पार्लियामेंट’ न कहकर ‘सार्वजनिक महाभियोग’ का नाम दिया गया। इसमें एक अध्यक्ष की मौजूदगी में नेता अपनी बात रखेंगे और प्रस्ताव पास किया जाएगा। यही कारण है कि कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी अपने आधिकारिक बयानों में इसे ‘सार्वजनिक महाभियोग’ शब्द से ही संबोधित किया है।
खरगे करेंगे शुरुआत, राहुल गांधी के संबोधन से होगा समापन
कार्यक्रम की रूपरेखा के मुताबिक, इस ‘जन महाभियोग’ की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के शुरुआती वक्तव्य से होगी, जबकि इसका समापन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संबोधन के साथ होगा।
मंच पर केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि कानूनी विशेषज्ञ, वरिष्ठ वकील और कथित तौर पर ‘SIR’ के चलते वोट कटने से प्रभावित आम नागरिक भी अपनी बात रखेंगे। चूंकि संसद में संख्या बल के अभाव और नियमों के कारण औपचारिक प्रस्ताव लाना संभव नहीं हो सका, इसलिए विपक्ष इस बड़े मंच के जरिए जनता के बीच राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की कोशिश में है। कार्यक्रम के अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक प्रतीकात्मक प्रस्ताव भी ध्वनिमत से पारित किया जाएगा।
कार्यक्रम का शेड्यूल और प्रमुख बिंदु
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विपक्षी सांसदों का जुटान: कार्यक्रम में इंडिया गठबंधन के विभिन्न दलों के 150 से 200 सांसदों के भाग लेने की संभावना है।
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समय सारणी: यह प्रतीकात्मक कार्यवाही दोपहर 3:30 बजे शुरू होगी और शाम 6:00 बजे तक चलेगी।
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लाइव स्ट्रीमिंग: कार्यवाही को आम जनता तक पहुंचाने के लिए कार्यक्रम स्थल पर आधुनिक मल्टी-कैमरा सेटअप लगाया गया है, जिसके जरिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसका सीधा प्रसारण किया जाएगा।
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समापन: शाम 6:00 बजे महाभियोग की कार्यवाही और प्रस्ताव पारित होने के बाद सभी उपस्थित नेताओं के लिए अल्पाहार (हाई-टी) की व्यवस्था की गई है।
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