Wednesday , 28 October 2026

‘मुझे आर्म्स एक्ट में फंसाने की साजिश…’, राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह का बड़ा दावा; हजरतगंज पुलिस पर फर्जी FIR का आरोप लगाते हुए PMO और राष्ट्रपति से लगाई न्याय की गुहार

उत्तर प्रदेश की कुंडा रियासत के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच का पारिवारिक विवाद अब आर्म्स एक्ट और कानूनी लड़ाइयों के बड़े भंवर में तब्दील होता नजर आ रहा है। भानवी कुमारी सिंह भद्री ने सोशल मीडिया के जरिए बेहद गंभीर और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। भानवी सिंह का स्पष्ट आरोप है कि उन्हें आर्म्स एक्ट के फर्जी मुकदमे में फंसाने का पूरा ताना-बाना बुना जा रहा है। उन्होंने राजधानी लखनऊ के हजरतगंज थाने में अपने और अपने बच्चों के खिलाफ दो झूठी प्राथमिकियां (FIR) दर्ज किए जाने और आनन-फानन में चार्जशीट दाखिल करने का दावा किया है। इसके साथ ही प्रतापगढ़ जिला प्रशासन की ओर से मिले आर्म्स एक्ट के नोटिस को लेकर उन्होंने व्यवस्था की निष्पक्षता पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

हजरतगंज कोतवाली में फर्जी FIR और बच्चों को घसीटने का संगीन आरोप

भानवी कुमारी सिंह भद्री के मुताबिक, वर्ष 2024 में तत्कालीन एसएचओ विक्रम सिंह के कार्यकाल के दौरान हजरतगंज कोतवाली में उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई थी। उनका कहना है कि इस कानूनी दांवपेंच में उनके बेकसूर बच्चों को भी घसीट लिया गया। हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी कानूनी कार्रवाई की भनक उन्हें पुलिस से नहीं, बल्कि मीडिया कर्मियों के माध्यम से लगी। उन्होंने जब इस संबंध में डीसीपी रवीना त्यागी से संपर्क साधकर सच्चाई जाननी चाही, तो उन्होंने मामले की किसी भी प्रकार की जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। भानवी सिंह ने सीधा सवाल दागा है कि आखिर थाने के भीतर दर्ज होने वाले मुकदमों की खबर जिले के डीसीपी स्तर के अधिकारी को क्यों नहीं होती और एक एसएचओ को इतनी निरंकुश छूट किस आधार पर मिली हुई है।

बिना बयान लिए कागजों में गवाही दर्ज, चार्जशीट दाखिल होने पर खुला राज

भानवी सिंह ने जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस फाइलों में उनके नाम से ऐसे मनगढ़ंत बयान दर्ज कर दिए गए, जो उन्होंने जीवन में कभी दिए ही नहीं। मामले की असलियत जानने के लिए जब उन्होंने जांच अधिकारियों निशा सिंह, शैलेंद्र सिंह, आलोक सिंह और मधुकर सिंह से संपर्क कर एफआईआर का ब्योरा मांगा, तो हर तरफ से उन्हें केवल टालमटोल और असंतोषजनक जवाब ही मिले। किसी भी स्तर पर ठोस जानकारी न मिलने के बाद जब उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया, तब जाकर उन्हें इस बात की जानकारी हुई कि मामले में चार्जशीट पेश की जा चुकी है और अग्रिम जांच की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

असलहे पति के कब्जे में, फिर भी मुझे ही थमाया आर्म्स एक्ट का नोटिस

प्रतापगढ़ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए भानवी सिंह ने बताया कि अब उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत नोटिस थमा दिया गया है। उन्होंने साफ किया कि वे वर्ष 2023 से लगातार शासन-प्रशासन से गुहार लगा रही हैं कि उनके नाम पर जारी लाइसेंसी हथियार उनके पति के कब्जे में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हथियारों को बरामद करने और उचित कार्रवाई करने के बजाय उल्टा प्रशासन उन्हीं पर शिकंजा कसते हुए नोटिस जारी कर रहा है। भानवी सिंह ने स्पष्ट किया कि वे एक साधारण गृहिणी हैं और किसी भी प्रकार के असलहे, गोला-बारूद अथवा गैरकानूनी गतिविधियों से उनका कोई वास्ता नहीं है। जब लाइसेंसी हथियार वर्षों से उनकी पहुंच और सुपुर्दगी से बाहर हैं और वे खुद उनकी बरामदगी की गुहार लगा रही हैं, तो उन्हें ही कटघरे में खड़ा करना किस न्याय का हिस्सा है।

वोटर लिस्ट से कटवाया नाम, बीएलओ पर बनाया गया था दबाव

भानवी सिंह ने यह भी सनसनीखेज खुलासा किया कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उनका और उनकी दोनों बेटियों का नाम मतदाता सूची से काट दिया गया था। जब मामले की तहकीकात की गई तो संबंधित बीएलओ ने स्वीकार किया कि उसके ऊपर अत्यधिक दबाव बनाया गया था। इसके बाद जब उन्होंने उच्च स्तर पर इसकी शिकायत दर्ज कराई, तब जाकर मतदाता सूची में उनके और उनकी बेटियों के नाम दोबारा बहाल किए जा सके।

मानसिक उत्पीड़न की पराकाष्ठा, राष्ट्रपति और गृह मंत्रालय से निष्पक्ष जांच की मांग

लगातार हो रही कानूनी घेराबंदी पर दुख जताते हुए भानवी सिंह ने सवाल किया कि आखिर नैनीताल, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की पुलिस का हर कदम केवल उनके ही खिलाफ क्यों उठता दिखाई देता है। उनकी जायज शिकायतों पर कार्रवाई करने की जगह उन्हें हर बार खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि वे गहरे मानसिक उत्पीड़न और बदले की दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई का सामना कर रही हैं। उन्होंने दर्द बयां करते हुए पूछा कि क्या अपने अधिकारों, अपनी सुरक्षा और न्याय की मांग करने की यही सजा एक सामान्य महिला को भुगतनी पड़ती है।

भानवी कुमारी सिंह ने इस पूरे प्रकरण में उत्तर प्रदेश पुलिस, पुलिस महानिदेशक (DGP), लखनऊ कमिश्नरेट, प्रतापगढ़ पुलिस, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), मुख्य सचिव, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रपति भवन और केंद्रीय गृह मंत्रालय को टैग करते हुए निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि उनके साथ कानून के दायरे में सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि उनकी दी गई शिकायतों पर कार्रवाई के बजाय क्या अब आर्म्स एक्ट के जरिए उन्हें साजिश के तहत फंसाया जाएगा।

 

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