Wednesday , 28 October 2026

यूपी MLC चुनाव वोटर लिस्ट विवाद: ‘कंप्यूटर जातिवादी नहीं होते’, अजीबोगरीब नामों पर CEO नवदीप रिणवा का तंज; आयोग ने दिए संयम बरतने के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव की मतदाता सूची में मतदाताओं के अजीबोगरीब नाम दर्ज होने को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह द्वारा उठाए गए सवालों के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में पलटवार करते हुए कहा कि कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होते।

सीईओ ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में यदि ‘राम ने यादव को मारा’ दर्ज हुआ है, तो वहीं ‘राम ने शर्मा को मारा’ जैसा नाम भी सामने आया है। यदि राम ने किसी अल्पसंख्यक को मारा होता, तो आयोग पर जातिवाद के साथ-साथ सांप्रदायिकता का भी ठीकरा फोड़ दिया जाता। हालांकि, उन्होंने माना कि ये गलतियां तकनीकी या मानवीय स्तर पर हुई हैं, जिनकी जांच कराई जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

संजय सिंह का तंज: क्या कंप्यूटर चला रहा राजनीतिक एजेंडा?

विवाद की शुरुआत आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह के बयान से हुई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए सवाल उठाया था कि एक मतदाता पर्ची में ‘रामहित यादव’ का नाम बदलकर ‘राम ने यादव को मारा’ कैसे हो गया?

संजय सिंह ने चुटकी लेते हुए पूछा था कि क्या निर्वाचन तंत्र का कंप्यूटर केवल यादवों को ही निशाना बना रहा है? राम ने केवल यादव को ही क्यों मारा—शर्मा, सिंह, पाठक, अस्थाना, राय या बिष्ट को क्यों नहीं? उन्होंने सवाल किया कि क्या कंप्यूटर किसी खास दल का एजेंडा चला रहा है।

सीईओ कार्यालय का पलटवार: ‘गलती स्वीकार है, पर जातिगत भेदभाव नहीं’

संजय सिंह के आरोपों के जवाब में यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के आधिकारिक ‘एक्स’ (ट्विटर) हैंडल से एक अन्य मतदाता पर्ची साझा की गई। इस पर्ची में मतदाता का नाम रवि शर्मा और पिता का नाम ‘राम ने शर्मा को मारा’ दर्ज था।

पोस्ट में लिखा गया कि गलती स्वीकार की जाती है, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी करते वक्त कोई जातिगत भेदभाव नहीं हुआ। सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए सीईओ ने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर चल रहे अजीबोगरीब नामों के कारणों की पड़ताल की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा फर्जी मतदाता पर्चियां बनाकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि पर्चियों के साथ छेड़छाड़ या जालसाजी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सुप्रिया श्रीनेत ने उठाए सवाल, भारत निर्वाचन आयोग ने दी संयम की सलाह

सीईओ कार्यालय की व्यंग्यात्मक शैली पर कांग्रेस ने भी कड़ा एतराज जताया। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने उक्त पोस्ट को टैग करते हुए सवाल किया कि आखिर इस आधिकारिक हैंडल को कौन संचालित कर रहा है? उन्होंने कहा कि चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता पहले से सवालों के घेरे में है और संवैधानिक पद से ऐसी गैर-गंभीर टिप्पणियां बचे-खुचे भरोसे को भी खत्म कर रही हैं।

इंटरनेट मीडिया पर बढ़ते विवाद और दोनों पक्षों की बयानबाजी को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने संज्ञान लिया। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आधिकारिक प्लेटफॉर्म से केवल संयत भाषा का इस्तेमाल किया जाए और किसी भी गैर-जरूरी व्यंग्य या टिप्पणी से बचते हुए केवल आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही बात रखी जाए।

‘तो सीईओ का नाम भी नई गहराई रेडुआ होना चाहिए’: संजय सिंह का हमला जारी

विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय सिंह ने सोमवार को फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट में ‘मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं’ जैसे हास्यास्पद नाम दर्ज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेजी से हिंदी में ट्रांसलेशन सॉफ्टवेयर की खामियों के कारण ‘रामहित यादव’ को ‘राम ने यादव को मारा’ कर दिया गया।

उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर अनुवाद का यही फॉर्मूला माना जाए, तो फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा (Navdeep Rinwa) का नाम भी ‘नई गहराई रेडुआ’ कर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पीलीभीत में 13 हजार समान ईपीआईसी (EPIC) नंबर, बस्ती में सात हजार संदिग्ध मतदाता और सुलतानपुर में फर्जी फॉर्म-7 भरे जाने के मामलों का हवाला देकर पूरी चुनावी मतदाता सूची पर सवाल उठाए।

 

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