Monday , 26 October 2026

ऑपरेशन सिंदूर: वायुसेना प्रमुख की पाकिस्तान को दोटूक- ‘1200 किमी चौड़ाई और 200 किमी गहराई तक किए सटीक हमले, कोई लक्ष्य हमारी पहुंच से बाहर नहीं’

ब्यूरो, नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी रणनीतिक और मारक क्षमता का ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसका असर सीमा पार लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए सीमा पार आतंकी ढांचे को नेस्तनाबूद करने के बाद वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने पाकिस्तान को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय वायुसेना (IAF) ने पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर की चौड़ाई और 200 किलोमीटर की गहराई तक जाकर सटीक प्रहार किए हैं, जिससे यह पूरी तरह साबित हो गया है कि दुश्मन का कोई भी ठिकाना भारतीय सेना की पहुंच से परे नहीं है।

चार दिवसीय ऑपरेशन में स्वदेशी हथियारों का दिखा दम, एयर पावर बनी ‘प्राइमरी रिस्पॉन्डर’

चार दिनों तक चले इस सघन सैन्य अभियान की निगरानी करने वाले एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने एक साक्षात्कार में बताया कि इस कार्रवाई ने देश के पहले जवाबी तंत्र (प्राइमरी रिस्पॉन्डर) और रणनीतिक अवरोधक (स्ट्रैटेजिक डेटरेंट) के रूप में वायुसेना की निर्णायक भूमिका पर मुहर लगाई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान भारत में निर्मित कई स्वदेशी हथियार प्रणालियों ने वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में अचूक काम किया। एक क्षमता-केंद्रित बल (कैपेबिलिटी-सेंट्रिक फोर्स) होने के नाते वायुसेना किसी एक साधन पर निर्भर रहने के बजाय कई विकल्पों का इस्तेमाल करने में सक्षम रही, जिसने तनाव की स्थिति को नियंत्रित रखते हुए संतुलित जवाब देने में मदद की।

पहलगाम हमले के बाद 1971 के बाद की सबसे बड़ी सीमा पार कार्रवाई

गौरतलब है कि पिछले साल मई में हुए पहलगाम आतंकी हमले के प्रत्युत्तर में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इसके तहत पाकिस्तान और उसके अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में संचालित आतंकी ढांचों और ठिकानों पर अचूक और भीषण हमले किए गए। वर्ष 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद से यह भारत की ओर से सीमा पार की गई अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है, जिसने आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ दी।

शून्य नागरिक क्षति और एकीकृत नेटवर्क का सटीक समन्वय

एयर चीफ मार्शल ने रेखांकित किया कि इतने बड़े पैमाने पर गहराई में जाकर की गई बमबारी के बावजूद भारतीय वायुसेना ने ‘जीरो कोलैटरल डैमेज’ यानी आम नागरिकों और असैन्य संपत्तियों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता को पूरी तरह निभाया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स की बजाय पूरी क्षमता को देखा जाता है, जहां लड़ाकू विमान, रडार, सेंसर, नेटवर्क और हथियार मिलकर काम करते हैं। इसका संयुक्त असर व्यक्तिगत प्रणालियों की तुलना में कई गुना अधिक घातक साबित हुआ।

दुश्मन के ड्रोन्स और मिसाइलें ढेर, मल्टी-डोमेन रणनीति ने दिखाया असर

वायुसेना प्रमुख के अनुसार, भारत की स्वदेशी नेटवर्क-आधारित एयर डिफेंस प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से दागे गए कई मानवरहित ड्रोन्स और स्टैंड-ऑफ (दूर से वार करने वाले) हथियारों को हवा में ही नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन की सफलता में जल, थल, नभ, अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम का संयुक्त तालमेल अहम रहा। इस मल्टी-डोमेन अप्रोच की बदौलत तत्काल निर्णय लिए गए और सटीक नतीजे हासिल किए गए।

भविष्य की चुनौतियों के लिए एआई और स्वदेशी उत्पादन पर जोर

भविष्य की रक्षा तैयारियों का खाका खींचते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि अब ध्यान युद्धक क्षमता के विस्तार, आईएसआर (निगरानी और टोह), इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, मजबूत नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निर्णय प्रणालियों को और अधिक सशक्त करने पर है। इसके साथ ही लंबे समय तक चलने वाले सघन अभियानों के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर तेजी से काम जारी है, ताकि भविष्य में किसी भी चुनौती पर भारत अपनी शर्तों पर त्वरित और प्रभावी जवाब दे सके।

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