
पीजीआई परिसर में संदिग्ध गतिविधियों पर सुरक्षा गार्डों की नजर
राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में गंभीर मरीजों और उनके तीमारदारों की मजबूरी का फायदा उठाकर खून की कथित दलाली करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ होने की आशंका गहरा गई है। शनिवार शाम अस्पताल परिसर में नियमित गश्त कर रहे सुरक्षाकर्मियों को कुछ युवकों का व्यवहार बेहद संदिग्ध प्रतीत हुआ। ये युवक मरीजों के परिजनों के इर्द-गिर्द मंडराते हुए उन्हें आसानी से रक्त उपलब्ध कराने का झांसा देकर संपर्क साधने की कोशिश कर रहे थे। सुरक्षा गार्डों को जब उनकी हरकतों पर दाल में कुछ काला लगा, तो उन्होंने तुरंत तत्परता दिखाते हुए युवकों को रोककर पूछताछ शुरू कर दी।
चौकी इंचार्ज की अगुवाई में पुलिस की त्वरित कार्रवाई संदेह पुख्ता होते ही सुरक्षाकर्मियों ने फौरन स्थानीय पुलिस को मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पीजीआई चौकी इंचार्ज परवेज आलम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और सुरक्षा गार्डों की मदद से पांचों युवकों को हिरासत में ले लिया। पकड़े गए युवकों में कथित सरगना हिमांशु सिंह के अलावा पवन कुमार सिंह, भावेश सिंह, प्रदीप कुमार और अमन कुमार शामिल हैं। प्राथमिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि हिरासत में लिए गए युवकों में से दो एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र हैं, जिससे पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
मरीजों की मजबूरी को निशाना बनाने की आशंका पर सघन जांच पुलिस सभी पांचों युवकों को थाने ले जाकर गहन पूछताछ कर रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि युवक किस मकसद से अस्पताल परिसर में डेरा डाले हुए थे और क्या वे खून की कमी से जूझ रहे लाचार तीमारदारों से मोटी रकम ऐंठकर अवैध रूप से खून का सौदा कर रहे थे। पुलिस इस सिंडिकेट में शामिल अन्य संभावित दलालों और अस्पताल के किसी भी अंदरूनी संपर्क की भूमिका की भी बारीकी से पड़ताल कर रही है।
लिखित तहरीर का इंतजार, शांति भंग की आशंका में कार्रवाई पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब तक अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले में कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं सौंपी गई है। फिलहाल किसी पुख्ता तहरीर के अभाव में सभी पांचों युवकों के खिलाफ शांति भंग की आशंका के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि विस्तृत पूछताछ और जांच में सामने आने वाले नए तथ्यों व लिखित शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
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