Sunday , 18 October 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम: राहुल गांधी और ओवैसी की याचिकाओं से लेकर दिल्ली प्रदर्शन तक, सुनवाई के लिए तय किया विस्तृत शेड्यूल

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), दिल्ली के चर्चित विरोध प्रदर्शनों और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं की वैधता से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण रोडमैप तैयार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इन सभी प्रकरणों की एक साथ सुनवाई करने के बजाय उनके विषय और वैधानिक पहलुओं के आधार पर अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत करते हुए नई तारीखें तय की हैं।

27 अक्टूबर: चुनाव आयोग की भूमिका और वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर सुनवाई

अदालत के तय कार्यक्रम के अनुसार, 27 अक्टूबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी तथा अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई होगी। इन अर्जियों में चुनाव आयोग के कामकाज के तौर-तरीकों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया की निष्पक्षता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने वोटर लिस्ट तैयार करने के मापदंडों और आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़े अहम सवाल उठाए हैं।

3 नवंबर: जंतर-मंतर और दिल्ली प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई का मामला

दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों और इस दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों से जुड़े मामलों की सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में मुख्य रूप से जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस बल के इस्तेमाल से जुड़े कानूनी सवालों की पड़ताल की जाएगी।

5 नवंबर: महिला पत्रकारों से जुड़े कथित उत्पीड़न मामले पर अलग सुनवाई

दिल्ली के प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न से जुड़े संवेदनशील मामले को बाकी याचिकाओं से अलग रखा गया है। शीर्ष अदालत इस विशिष्ट प्रकरण पर 5 नवंबर को स्वतंत्र रूप से सुनवाई करेगी।

19 नवंबर: BNSS की धारा 172 और 163 की संवैधानिक वैधता की समीक्षा

19 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 172 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दलीलें सुनेगा। धारा 172 पुलिस के वैध निर्देशों के अनुपालन से संबंधित प्रावधान तय करती है। इसके साथ ही, उसी दिन आपात स्थितियों और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए निषेधाज्ञा लागू करने के प्रशासनिक अधिकार से जुड़ी धारा 163 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी विचार किया जाएगा।

28 अक्टूबर तक याचिकाओं के वर्गीकरण का निर्देश

अदालत ने सुनवाई प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए नोडल वकीलों को 28 अक्टूबर तक समान मुद्दों वाली याचिकाओं को अलग-अलग समूहों में संकलित करने का निर्देश दिया है। अदालत का मानना है कि इस व्यवस्था से पक्षों को व्यापक और तथ्यात्मक जवाबी हलफनामा दाखिल करने में सुविधा होगी, जिससे सभी महत्वपूर्ण कानूनी बिंदु स्पष्ट रूप से अदालत के समक्ष रखे जा सकेंगे।

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