
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के समय को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में असमंजस की स्थिति बन गई है। प्रदेश में लंबे समय से फरवरी माह में विधानसभा चुनाव कराने की परिपाटी रही है, लेकिन माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) द्वारा हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी किए जाने के बाद इस परंपरा पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बोर्ड ने 5 फरवरी से 24 फरवरी 2027 के बीच परीक्षाएं कराने की घोषणा की है। परीक्षा की यह समय-सारिणी संभावित चुनावी शेड्यूल से सीधे तौर पर टकराती नजर आ रही है, जिससे दोनों वृहद आयोजनों को एक साथ संचालित करना लगभग असंभव माना जा रहा है।
स्कूल बनेंगे परीक्षा केंद्र और पोलिंग बूथ, टकराएगा प्रशासनिक तंत्र
दोनों आयोजनों के बीच टकराव की सबसे प्रमुख वजह साझा बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन है। यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा में 51 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल होने जा रहे हैं। इनके लिए प्रदेश भर के सरकारी और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है। दूसरी तरफ, विधानसभा चुनाव में इन्हीं शिक्षण संस्थानों का उपयोग मतदान केंद्र (पोलिंग बूथ) के रूप में होता है।
इसके अलावा, परीक्षा की निगरानी में जुटने वाले शिक्षक और प्रशासनिक अमला ही चुनाव ड्यूटी में भी मुख्य भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि सरकार फरवरी में ही चुनाव कराने का मन बनाती है, तो यूपी बोर्ड परीक्षाओं को लगभग दो महीने के लिए टालना पड़ेगा और नया शेड्यूल जारी करना होगा।
2022 में फरवरी-मार्च में हुई थी वोटिंग, चुनाव आयोग के पास मई तक का वक्त
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान 10 फरवरी से शुरू होकर 7 मार्च तक 7 चरणों में चला था और परिणाम 10 मार्च को आए थे। हालांकि, इस बार चुनाव आयोग के पास चुनावी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मौजूद है। उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा की पहली बैठक 23 मई 2022 को आयोजित हुई थी, जिसके मुताबिक मौजूदा सदन का 5 साल का संवैधानिक कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा। ऐसे में आयोग यदि चाहे तो मतदान की प्रक्रिया को फरवरी के बजाय मार्च या अप्रैल 2027 के दौरान विभिन्न चरणों में संपन्न करा सकता है।
नवंबर और दिसंबर में यूपी का दौरा करेगी निर्वाचन आयोग की टीम
भारत निर्वाचन आयोग ने भी राज्य में चुनावी तैयारियों को रफ्तार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में नवंबर माह में अपर मुख्य निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग और दिसंबर में आयोग की एक उच्चस्तरीय टीम उत्तर प्रदेश के जमीनी हालात और तैयारियों का जायजा लेने के लिए राज्य का दौरा करेगी।
फिलहाल सभी की निगाहें चुनाव आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम पर टिकी हैं। आयोग के फैसले के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी कि बोर्ड परीक्षाएं तय कार्यक्रम के मुताबिक 5 फरवरी से होंगी या फिर विधानसभा चुनाव को प्राथमिकता देते हुए परीक्षा की तिथियों में फेरबदल किया जाएगा।
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