Thursday , 8 October 2026

गोमती के उफान से लखनऊ बेहाल: हफ्ते भर बाद भी थमा नहीं सैलाब, 12 रैन बसेरे सक्रिय और 90 नावों से मोर्चा, श्मशान घाट भी जलमग्न

राजधानी लखनऊ में उफनाती गोमती नदी का कहर लगातार सातवें दिन भी जारी है। नदी का जलस्तर स्थिर न होने से शहर के कई प्रमुख और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। गऊ घाट, हनुमंत धाम, गोमती रिवर फ्रंट, सैठा, लोहरामऊ, फैजुल्लागंज, दाउद नगर और मिल्लत नगर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में चारों तरफ पानी भर चुका है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि सैकड़ों लोगों को अपने आशियाने छोड़कर सुरक्षित ठिकानों का रुख करना पड़ा है।

90 नावें तैनात, 12 अस्थायी रैन बसेरों में शरण

जलमग्न इलाकों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। वर्तमान में 90 नावों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों से लोगों का रेस्क्यू किया जा रहा है और भोजन-राशन जैसी जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। अब तक 35 संकटग्रस्त परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा चुका है।

बेघर हुए लोगों के ठहरने के लिए प्रशासन ने शहर भर में 12 अस्थायी रैन बसेरे तैयार किए हैं, जहां फिलहाल 26 लोगों को आश्रय दिया गया है। प्रशासनिक और राहत टीमें लगातार जलभराव वाले मोहल्लों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

ड्रोन से एंटी-लार्वा का छिड़काव और टैंकरों से पानी की आपूर्ति

बाढ़ग्रस्त इलाकों में दूषित पानी के जमाव से संक्रामक बीमारियों और मच्छरों के प्रकोप का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य जोखिमों से निपटने के लिए प्रशासन ने करीब 150 एकड़ के विशाल क्षेत्र में आधुनिक ड्रोन तकनीक के जरिए एंटी-लार्वा और एमएलओ (मच्छर रोधी तेल) का सघन छिड़काव शुरू कराया है।

इसके साथ ही करीब 250 सफाईकर्मियों की टीम लगातार प्रभावित हिस्सों में स्वच्छता व्यवस्था संभालने में जुटी है। बाढ़ पीड़ितों के लिए पीने के साफ पानी का संकट न हो, इसके मद्देनजर 20 पानी के टैंकर लगाए गए हैं और 10,000 लीटर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की बोतलें वितरित की गई हैं।

पानी उतरते ही चलेगा सघन स्वच्छता अभियान, अधिकारियों की अपील

नगर आयुक्त गौरव कुमार ने खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर दिनभर प्रभावित इलाकों का मुआयना किया और राहत कार्यों की समीक्षा की। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही नदी का पानी नीचे उतरेगा, पूरे क्षेत्र में युद्धस्तर पर विशेष सफाई, फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव का सघन अभियान चलाया जाएगा, जिसकी पूरी रूपरेखा पहले ही तैयार कर ली गई है।

दूसरी ओर, प्रशासन ने आम नागरिकों से गोमती के डूब क्षेत्र और पानी से घिरे इलाकों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है। कई जगहों पर जलभराव के बावजूद लोग धार्मिक दर्शन या सैर-सपाटे के लिए जोखिम उठाकर पहुंच रहे हैं, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस और प्रशासनिक बल तैनात किया गया है। अधिकारियों ने दो टूक अपील की है कि जब तक गोमती का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे नहीं आ जाता, तब तक किसी भी हाल में जोखिम भरे क्षेत्रों का रुख न करें।

लखनऊ में गोमती के रौद्र रूप से श्मशान घाट भी जलमग्न: बैकुंठ धाम और गुल्लाला घाट में भरा पानी, अंतिम संस्कार के लिए घंटों इंतजार

राजधानी लखनऊ में उफनाती गोमती नदी का जलस्तर नौवें दिन भी लगातार चढ़ता जा रहा है, जिससे हालात बेहद विकट हो गए हैं। बाढ़ का पानी अब रिहायशी इलाकों के साथ-साथ शहर के प्रमुख श्मशान घाटों तक पहुंच चुका है। लखनऊ के मुख्य श्मशान घाट ‘बैकुंठ धाम’ और ‘गुल्लाला घाट’ में नदी का पानी भर जाने के कारण शवों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो गई है और परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

बैकुंठ धाम में 15 शवदाह स्थल डूबे, सूखी लकड़ियों का टोटा

गोमती के बढ़े जलस्तर की वजह से बैकुंठ धाम परिसर में लगभग 15 शवदाह स्थल पूरी तरह पानी में समा चुके हैं। परिजनों और आगंतुकों के बैठने की जगहें जलमग्न हो चुकी हैं। सबसे बड़ा संकट सूखी लकड़ियों की किल्लत को लेकर खड़ा हो गया है, क्योंकि भंडारण स्थल के निचले हिस्सों में पानी भर गया है। सीमित और बची हुई सूखी जगह पर ही किसी तरह अंतिम संस्कार किया जा रहा है। जगह की भारी कमी के कारण अंतिम विदाई देने पहुंचे परिजनों को लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है।

परिजनों का छलका दर्द: 4 से 5 घंटे बाद आ रहा नंबर

शोक संतप्त परिवारों को अपनों की अंत्येष्टि के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। बैकुंठ धाम पहुंचे डोरी लाल ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे सुबह 11 बजे अपनी पूज्य माता जी की पार्थिव देह लेकर पहुंचे थे, लेकिन दोपहर 3 बजे तक भी अंतिम संस्कार का नंबर नहीं आ सका।

वहीं राम अवतार ने बताया कि उनके रिश्तेदार सुबह 10 बजे घाट पहुंचे थे और दोपहर 2 बजे जाकर किसी तरह मुखाग्नि की प्रक्रिया पूरी हो सकी। अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे सूरज कश्यप का कहना था कि घाट पर पानी भरने से जगह बहुत कम बची है, जिसके चलते परिजनों को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी उठानी पड़ रही है।

गुल्लाला घाट पर भी पानी, बैकुंठ धाम पर बढ़ा दबाव

पुराने लखनऊ स्थित गुल्लाला घाट की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। वहां भी नदी का पानी शवदाह स्थलों तक पहुंच जाने से काम प्रभावित हुआ है। गुल्लाला घाट पर पानी भरने के चलते लोग अपने परिजनों के शवों को लेकर बैकुंठ धाम की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बैकुंठ धाम पर दबाव कई गुना बढ़ गया है और कतारें लगातार लंबी होती जा रही हैं।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से लगाई तत्काल मदद की गुहार

श्मशान घाटों की दयनीय स्थिति को देखते हुए स्थानीय नागरिकों और पीड़ित परिवारों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रशासन तुरंत सूखी लकड़ियों के सुरक्षित और पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था करे। साथ ही घाटों से पानी निकासी के लिए पंप लगाए जाएं, ताकि जीवन के अंतिम सफर में अपनों को विदाई देने पहुंचे शोकाकुल परिवारों को इस असहनीय पीड़ा से राहत मिल सके।

 

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