Wednesday , 7 October 2026

यूपी वोटर लिस्ट में 16 लाख ‘रहस्यमयी वोटर्स’ के दावों पर चुनाव आयोग का पलटवार: CEO नवदीप रिणवा ने बताई पूरी सच्चाई

 लखनऊ। उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में 16 लाख से अधिक कथित ‘रहस्यमयी वोटर्स’ जोड़े जाने को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण’ (SIR-2026) के दौरान किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है। सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही खबरें पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और निराधार हैं। पूरी प्रक्रिया लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई गई है।

बीएलओ ने घर-घर जाकर जुटाए थे फॉर्म-6, आयोग के नियमों के तहत हुआ काम

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मामले का तकनीकी और प्रक्रियात्मक ब्योरा साझा करते हुए बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची के 6 जनवरी 2026 को हुए प्रकाशन से पूर्व गणना चरण (27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 तक) चलाया गया था। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों के साथ-साथ पात्र नागरिकों से 16.18 लाख फॉर्म-6 (नाम जोड़ने के लिए आवेदन) एकत्र किए थे। यह पूरी कार्रवाई भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में ही की गई थी।

क्यों मुद्रित नहीं हो सके थे गणना प्रपत्र?

सीईओ के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 की कट-ऑफ तिथि तक जिन नागरिकों के नाम तत्कालीन मतदाता सूची में शामिल नहीं थे, उनके गणना प्रपत्र मुद्रित नहीं हो सके थे। ऐसे पात्र नागरिकों को मताधिकार से वंचित न होना पड़े, इसके लिए बीएलओ ने व्यक्तिगत रूप से घर-घर संपर्क कर फॉर्म-6 भरवाए। यह नियमित चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा था, न कि कोई गुपचुप या रहस्यमयी कवायद।

नाम छिपाने के आरोपों पर आयोग का स्पष्टीकरण

नाम छिपाने या प्रकाशित न करने के आरोपों पर नवदीप रिणवा ने नियम स्पष्ट करते हुए कहा कि निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के तहत केवल वही नाम वेबसाइट पर (फॉर्म-9 के रूप में) प्रदर्शित किए जाते हैं, जो 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद ‘दावा और आपत्ति’ अवधि के दौरान प्राप्त होते हैं।

उन्होंने बताया कि हर साल संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान ड्राफ्ट सूची प्रकाशन से पहले ईआरओ-नेट (ERO-Net) पर निर्वाचक नामावली को फ्रीज कर दिया जाता है। इस वजह से पहले प्राप्त हुए फॉर्म-6 यदि सिस्टम में अनिस्तारित रह जाते हैं, तो उन्हें दावे और आपत्तियों की अवधि में निस्तारित कर अंतिम मतदाता सूची में विधिवत शामिल किया जाता है। इसमें किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है।

फॉर्म-6 की स्वीकृति पर मनगढ़ंत दावों का खंडन

सोशल मीडिया पर फॉर्म-6 की स्वीकृति दर (स्वीकार किए जाने के प्रतिशत) को लेकर किए जा रहे दावों को सीईओ ने कोरी कल्पना करार दिया। उन्होंने कहा कि फॉर्म स्वीकार करने का कोई तय प्रतिशत या फार्मूला नहीं होता, बल्कि नियमानुसार जांच और सत्यापन की विहित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आवेदनों को अंतिम सूची में जोड़ा जाता है।

राजनीतिक दलों की मौजूदगी में पूरी पारदर्शिता से संपन्न हुआ पुनरीक्षण

नवदीप रिणवा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 की पूरी कवायद सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी और सहमति के साथ पूरी की गई है। इस प्रक्रिया को लेकर आज तक किसी भी राजनीतिक दल या प्रतिनिधि की ओर से कोई शिकायत या आरोप दर्ज नहीं कराया गया है। सोशल मीडिया पर बेवजह सनसनी फैलाने और मतदाताओं में भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

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