उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों को लेकर चल रही सियासी उठापटक और जोड़-तोड़ की अटकलों पर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने पूर्णविराम लगा दिया है। अखिलेश यादव ने इशारों ही इशारों में स्पष्ट कर दिया है कि समाजवादी पार्टी उच्च सदन के लिए अपना तीसरा प्रत्याशी चुनावी मैदान में नहीं उतारेगी। सपा अध्यक्ष के इस रणनीतिक फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश से भाजपा के 8 और समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवारों का निर्विरोध राज्यसभा पहुंचना तय हो गया है।
‘निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है’
नामांकन के अंतिम दिन यानी मंगलवार (6 अक्टूबर) को सुबह से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि सपा दोपहर तक अपने तीसरे उम्मीदवार का ऐलान कर विधानसभा में पर्चा दाखिल कराएगी। हालांकि, नामांकन प्रक्रिया खत्म होने से पहले ही अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक लाइन का पोस्ट साझा कर सबको चौंका दिया। उन्होंने लिखा— ‘अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।’ उनके इस बयान को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव (403 सीटों) पर पूरा ध्यान केंद्रित करने और राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग के संभावित जोखिम से बचने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
सपा के दोनों उम्मीदवार पहले ही कर चुके हैं नामांकन
समाजवादी पार्टी की ओर से दो दिग्गज पहले ही पर्चा भर चुके हैं। इनमें पार्टी के मुख्य रणनीतिकार व राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव शामिल हैं, जो रिकॉर्ड छठी बार उच्च सदन जाने की राह पर हैं। वहीं, सपा ने दूसरे उम्मीदवार के रूप में रिलायंस समूह के वरिष्ठ अधिकारी धनराज परिमल नथवानी को मैदान में उतारा है। इन दोनों नेताओं ने 30 सितंबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था।
भाजपा ने उतारे हैं 8 चेहरे, सोशल इंजीनियरिंग पर दांव
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने 10 में से 8 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं। पार्टी की सूची में सामाजिक समीकरणों को साधने की स्पष्ट झलक दिखाई देती है, जिसमें 3 ओबीसी, 2 अनुसूचित जाति (SC) और 3 सामान्य वर्ग के चेहरों को जगह दी गई है। इसके अलावा लिस्ट में दो महिला प्रत्याशियों को भी शामिल किया गया है। भाजपा के घोषित उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।
25 नवंबर को खत्म हो रहा मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 मौजूदा सांसदों का कार्यकाल आगामी 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार इन सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित था, जिसके लिए नामांकन दाखिल करने का आज आखिरी दिन था। चूंकि 10 सीटों के लिए कुल 10 ही उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए मतदान की नौबत नहीं आएगी और नाम वापसी की समयसीमा बीतते ही सभी प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।
चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर अखिलेश का तीखा हमला
राज्यसभा की बिसात से इतर अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग (ECI) की निष्पक्षता और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर जोरदार हमला बोला। दिल्ली में इंडिया गठबंधन के चुनाव आयोग मुख्यालय मार्च में शामिल होने पहुंचे सपा मुखिया ने तीखे तंज कसे। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अब निष्पक्ष नहीं रह गया है और केवल सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम कर रहा है।
अखिलेश यादव ने कहा कि आयोग का रवैया ऐसा हो गया है मानो जो भाजपा का सदस्य है केवल वही नागरिक वोट डालने का हकदार है। उन्होंने उत्तर प्रदेश और बंगाल में बूथ कैप्चरिंग व चुनावी धांधली के आरोप लगाए। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को अलग दफ्तर बनाने की बजाय चुनाव आयोग के कार्यालय में ही एक मंजिल ले लेनी चाहिए क्योंकि सारे काम वहीं से संचालित हो रहे हैं। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव पर भी प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरी कवायद इसलिए की जा रही है ताकि बार-बार धांधली के आरोपों से बचा जा सके और एक ही झटके में पूरी चुनावी प्रक्रिया पर कब्जा जमाया जा सके।
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