
मथुरा/वृंदावन कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन के शांत और आध्यात्मिक परिवेश में इन दिनों संत प्रेमानंद गोविंद शरण महाराज के आश्रम की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आश्रम के एक शिष्य रसिक दुलारी शरण (उर्फ दीपक लोधी) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि हाथरस से जुड़ा एक और गंभीर प्रकरण सामने आ गया है। करीब तीन महीने से लापता 18 वर्षीय युवक के आश्रम में ही मौजूद होने की बात सामने आने के बाद आश्रम के प्रबंधन, उसकी गोपनीयता और सेवादारों के रवैये पर उंगलियां उठने लगी हैं।
दीक्षा लेने वृंदावन आया युवक 3 महीने तक रहा लापता
हाथरस जिले के सादाबाद क्षेत्र का रहने वाला 18 वर्षीय अनुज चौधरी लगभग तीन महीने पहले प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने और भक्ति मार्ग अपनाने की इच्छा लेकर वृंदावन आया था। इसके बाद उसका परिजनों से संपर्क पूरी तरह कट गया और वह घर वापस नहीं लौटा। बेटे की खोज में बदहवास परिजन बीते तीन महीनों से लगातार वृंदावन की गलियों और आश्रम के चक्कर काट रहे थे। परिजनों का गंभीर आरोप है कि इस दौरान आश्रम का कोई भी सेवादार या जिम्मेदार व्यक्ति उनसे सीधे मुंह बात करने को तैयार नहीं था और न ही अनुज के बारे में कोई सटीक जानकारी दी जा रही थी।
मीडिया और प्रशासन के दबाव में आश्रम प्रबंधन ने तोड़ी चुप्पी
हाल ही में रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत के मामले ने जब तूल पकड़ा और मीडिया में लगातार खबरें चलने लगीं, तब प्रशासनिक हलचल भी तेज हुई। इस चौतरफा दबाव के बाद अचानक आश्रम प्रबंधन के रुख में नरमी देखने को मिली। प्रबंधन ने आखिरकार परिजनों के सामने यह स्वीकार किया कि अनुज आश्रम परिसर के भीतर ही है और पूरी तरह सुरक्षित है। प्रबंधन ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि आवश्यक कागजी और आंतरिक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अनुज को दो घंटे के भीतर उनके सुपुर्द कर दिया जाएगा।
कड़े नियम और गोपनीयता पर उठे तीखे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने रसिक दुलारी शरण की मौत से जुड़े आरोपों को एक बार फिर ताजा कर दिया है। रसिक दुलारी के परिजनों ने भी ठीक इसी तरह के आरोप लगाए थे कि जब भी वे अपने बेटे से मिलने वृंदावन आते थे, तो उन्हें कई-कई दिनों तक बाहर इंतजार कराकर बिना मिले ही बैरंग लौटा दिया जाता था। अब सवाल उठ रहा है कि अगर अनुज आश्रम में ही सुरक्षित था, तो तीन महीने तक उसके परिजनों को अंधेरे में क्यों रखा गया? परिजनों को अपने बेटे से मिलने की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
आश्रम के आंतरिक प्रशासन की निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि अगर रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला सार्वजनिक न हुआ होता, तो शायद अनुज की मौजूदगी की बात भी सामने नहीं आती। अब मांग जोर पकड़ रही है कि आश्रम के भीतर साधकों के साथ होने वाले व्यवहार, सुरक्षा व्यवस्था और नियमों की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच कराई जाए। इस पूरे विवाद के बीच संत प्रेमानंद महाराज द्वारा मुख्य वृंदावन क्षेत्र को छोड़कर यमुना पार एकांत स्थान पर प्रवास करने के हालिया निर्णय को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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