Wednesday , 30 September 2026

यूपी राज्यसभा चुनाव: सपा ने उतारे दो उम्मीदवार, प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी करेंगे नामांकन; तीसरे नाम पर सस्पेंस बरकरार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने उच्च सदन के लिए अपने दो अधिकृत प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम मुहर लगा दी है। पार्टी ने अपने वरिष्ठ रणनीतिकार प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया है। दोनों प्रत्याशी आज बुधवार (30 सितंबर) को राजधानी लखनऊ में अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। नामांकन के इस अहम मौके पर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव स्वयं मौजूद रहेंगे, जिससे चुनावी सरगर्मी और तेज हो गई है।

सुबह 11 बजे दाखिल होगा नामांकन, अखिलेश यादव रहेंगे मौजूद

समाजवादी पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रो. राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी सुबह 11:00 बजे विधानसभा परिसर में निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, सांसद और विधायक भी मौजूद रहेंगे। दोनों प्रत्याशियों के नामों के ऐलान के साथ ही विधानसभा के सेंट्रल हॉल से लेकर सियासी गलियारों तक गहमागहमी बढ़ गई है।

अनुभवी ‘प्रोफेसर’ के साथ धनराज परिमल नथवानी पर दांव

सपा नेतृत्व ने अपने इस फैसले में अनुभव और नए समीकरणों का सधा हुआ संतुलन साधा है। प्रो. राम गोपाल यादव पार्टी के संस्थापक सदस्यों और शीर्ष रणनीतिकारों में शुमार हैं, जो लंबे समय से संसद के उच्च सदन में मजबूती से पार्टी का पक्ष रखते आ रहे हैं। वहीं, धनराज परिमल नथवानी को प्रत्याशी बनाकर सपा ने उच्च सदन की रेस में एक चौंकाने वाला और अहम दांव चला है। दोनों प्रत्याशियों के नामों की घोषणा के बाद राजनीतिक पंडित इसके सियासी और रणनीतिक नफे-नुकसान का आकलन करने में जुट गए हैं।

तीसरे प्रत्याशी पर अभी सस्पेंस, कुछ दिन बाद पत्ते खोलेगी सपा

संख्याबल के लिहाज से समाजवादी पार्टी के खाते से तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी खासी चर्चा है। हालांकि पार्टी ने फिलहाल केवल दो ही उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक किए हैं। सपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपने तीसरे उम्मीदवार के नाम पर गहन मंथन कर रही है और इसका ऐलान कुछ दिनों बाद किया जाएगा। तीसरे प्रत्याशी के नाम का खुलासा होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की जंग निर्विरोध होगी या फिर मतदान की नौबत आएगी।

उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों पर टिकी निगाहें

संसद के उच्च सदन के लिहाज से उत्तर प्रदेश राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है। विधानसभा में संख्याबल और मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए सपा की इस रणनीति को काफी अहम माना जा रहा है। अखिलेश यादव की मौजूदगी में होने वाले इस नामांकन के बाद सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सपा का तीसरा उम्मीदवार कौन होगा और सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी इस मुकाबले को लेकर क्या जवाबी रणनीति अपनाती है।

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