
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेदों को लेकर एक मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार विवादों के घेरे में आ गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आयोग के दोनों चुनाव आयुक्त कई निर्णयों पर असहमत थे और उन्होंने 10 महीनों में करीब 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं। इस खुलासे के बाद कांग्रेस सहित विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने देशभर में निर्वाचन आयोग कार्यालयों के घेराव और प्रदर्शन की घोषणा की है, जबकि नई दिल्ली में निर्वाचन सदन और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं।
संसद से लेकर विधानसभा तक संग्राम, दिल्ली में लगे विरोध के पोस्टर
इस मुद्दे पर राजधानी दिल्ली से लेकर राज्यों तक राजनीतिक पारा चढ़ गया है:
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सड़क पर युवा कांग्रेस: भारतीय युवा कांग्रेस ने नई दिल्ली में 5 रायसीना रोड से जंतर-मंतर तक विरोध मार्च निकाला।
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दिल्ली में पोस्टर वार: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के ओबीसी विभाग ने जगह-जगह पोस्टर चस्पा कर ‘ज्ञानेश कुमार हटाओ, चुनाव आयोग बचाओ’ के नारे के साथ पद से हटाने की मांग की।
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा: शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों निजामुद्दीन भट, इरफान हफीज लोन और इफ्तिखार अहमद ने वेल में आकर ‘वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ की तख्तियां लहराते हुए जोरदार नारेबाजी की।
इस्तीफे के लिए 78 घंटे का अल्टीमेटम और तीन प्रमुख मांगें
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त को 78 घंटे के भीतर पद छोड़ने की समय-सीमा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शनिवार तक इस्तीफा नहीं आता, तो 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह और जंतर-मंतर पर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सीजेपी ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
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एसआईआर (SIR) की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए।
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पुनरीक्षण से पूर्व वाली मूल मतदाता सूची को तत्काल बहाल किया जाए।
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मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार सुनिश्चित किए जाएं।
दीपके ने आरोप लगाया कि गैर-भाजपा शासित राज्यों में विपक्षी दिग्गजों—ममता बनर्जी, एमके स्टालिन और पिनाराई विजयन—के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नाम काटे गए, जिसका खामियाजा कई जगह सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के उम्मीदवारों को भुगतना पड़ा।
निष्पक्षता की जांच पर अड़े दीपक बैज, जयराम रमेश का तीखा तंज
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने एसआईआर को केंद्र सरकार के इशारे पर संचालित प्रक्रिया बताते हुए आरोप लगाया कि लाखों वैध मतदाताओं के नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से हटाए गए। उन्होंने पूरी मतदाता सूची जांचने के लिए स्वतंत्र न्यायिक आयोग की मांग की।
उधर, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और मौजूदा नेतृत्व की कार्यशैली की तुलना की। उन्होंने लिखा कि 61वें संविधान संशोधन अधिनियम (1988) के जरिए अनुच्छेद 326 में संशोधन कर मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष करने वाले राजीव गांधी ने नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक ताकत दी थी, जबकि मौजूदा व्यवस्था मतदाताओं के मताधिकार पर आघात कर रही है।
वोटर लिस्ट विवाद और कानूनी अड़चनें
मीडिया रिपोर्ट के दूसरे भाग के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गोवा के हटाए गए मतदाताओं की अपीलों पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद आयोग स्तर पर प्रक्रिया लंबित रही और नाम दोबारा नहीं जोड़े जा सके। वहीं पश्चिम बंगाल में अपीलीय न्यायाधिकरणों की धीमी गति को लेकर भी चिंता जताई गई है, जहां मौजूदा रफ्तार से सभी लंबित मामलों के निपटारे में सालों लग सकते हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: चिराग ने स्वायत्तता पर घेरा, सीएम साय का पलटवार
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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का रुख: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि वे सरकार में रहकर किसी का बचाव नहीं कर रहे हैं। चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और जब संस्था पर प्रश्न उठते हैं, तो मुख्य चुनाव आयुक्त का दायित्व बनता है कि वह सामने आकर स्पष्टीकरण दें। उन्होंने कहा कि आयोग का काम विपक्ष की राजनीति का जवाब देना नहीं, बल्कि देश के नागरिकों में व्यवस्था के प्रति पूर्ण भरोसा जगाना है।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का वार: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार के बाद कांग्रेस जनादेश का अपमान करने पर उतर आई है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने पर कांग्रेस को ईवीएम और चुनावी मशीनरी सही लगती है, लेकिन पराजय का सामना करते ही कभी ईवीएम, कभी एसआईआर तो कभी संवैधानिक संस्थाओं पर ठीकरा फोड़ना उनकी पुरानी आदत बन चुकी है।
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