Tuesday , 22 September 2026

यूपी में रेस्टोरेंट और फूड कोर्ट्स पर खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा छापा: 12 के लाइसेंस निलंबित, कानपुर-गाजियाबाद समेत 5 जिलों में हड़कंप

उत्तर प्रदेश के नागरिकों को शुद्ध, सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) का विशेष अभियान ‘शुद्ध ही शुभ है’ पूरी सख्ती के साथ जारी है। इस अभियान के तहत प्रदेश भर के नामी फास्ट फूड आउटलेट्स, रेस्टोरेंट और फूड कोर्ट्स में व्यापक छापेमारी की गई। सोमवार को विभाग की विशेष टीमों ने एक साथ पांच प्रमुख जिलों—कानपुर नगर, गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज और वाराणसी में औचक निरीक्षण किया। देर शाम तक चली इस कार्रवाई में 180 से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों की गहन जांच की गई।

जांच के दौरान कई नामी प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं। विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गंभीर लापरवाहियों के चलते 12 प्रतिष्ठानों और एक बड़े फूड कोर्ट का लाइसेंस निलंबित कर दिया और वहां कारोबार पर पूरी तरह रोक लगा दी। इसके साथ ही मामूली अनियमितताएं मिलने पर 110 से अधिक प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सभी कमियों को दुरुस्त नहीं कर लिया जाता, तब तक किसी भी हाल में संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

140 टीमों ने 5 जिलों में खंगाले 240 से ज्यादा ठिकाने

प्रदेश भर में एक साथ शुरू हुए इस अभियान के तहत अलग-अलग जिलों में विशेष टीमें बनाकर मैदान में उतारी गईं। सबसे ज्यादा 80 प्रतिष्ठानों की जांच गाजियाबाद में 36 टीमों द्वारा की गई। वहीं कानपुर नगर में 38 टीमों ने 52 यूनिट्स की जांच की। ताजनगरी आगरा में 21 टीमों ने 38 यूनिट्स, धार्मिक नगरी वाराणसी में 20 टीमों ने 40 यूनिट्स और संगम नगरी प्रयागराज में 15 टीमों ने 30 खाद्य इकाइयों का सघन निरीक्षण किया। सभी जिलों में अभिलेखों, किचन की स्थिति और खाद्य नमूनों के आधार पर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।

कानपुर: फर्श पर खाना, आटे में कीड़े और एक्सपायर्ड सॉस से हड़कंप

औचक निरीक्षण के दौरान कानपुर नगर के कई प्रतिष्ठित आउटलेट्स में स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। मोती मॉल स्थित मिलीरेव फूड कोर्ट में चारों तरफ गंदगी का अंबार मिला, दीवारें क्षतिग्रस्त थीं और खाद्य सामग्री सीधे फर्श पर रखी पाई गई। जनस्वास्थ्य को देखते हुए फूड कोर्ट के सभी 10 काउंटरों को तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया गया।

सैफायर मॉल स्थित ला पीनोज पिज्जा आउटलेट में कीड़े मिलने, एक्सपायरी डेट पार कर चुकी सॉस का इस्तेमाल होने, घटिया पनीर पाए जाने तथा वेज और नॉनवेज के लिए एक ही बर्तन के प्रयोग का खुलासा हुआ, जिसके बाद लाइसेंस निलंबन की सिफारिश भेजी गई। स्वरूप नगर के वेलफेल सैम (केशव राज एंड संस) में पैकेट बंद सामग्रियों पर निर्माण और एक्सपायरी तिथि दर्ज न होने पर बिक्री रोक दी गई।

स्क्वायर मॉल स्थित ‘Nii Haau’ में जाम नालियों के बीच वेज-नॉनवेज एक साथ पकाया जा रहा था, जबकि ‘बिरयानी क्वीन’ के किचन में रखे आटे में कीड़े और जले हुए काले तेल का बार-बार इस्तेमाल पकड़ा गया। इसके अलावा किदवई नगर के स्पाइसी फास्ट फूड में खुले नाले की बदबू के बीच खाना तैयार हो रहा था और हरबंस मोहाल के ग्लोबल बेकर्स एंड कैफे में वेज-नॉनवेज एक ही प्लेटफार्म पर रखे मिले। इन सभी पर शटडाउन की कार्रवाई की गई है।

आगरा, वाराणसी और प्रयागराज में नामी ब्रांड्स पर भी गिरी गाज

आगरा के प्रतिष्ठित सदर बाजार स्थित ‘द पार्क रेस्टोरेंट’ में चोक नालियों और किचन में अस्वच्छ माहौल मिलने पर तत्काल प्रभाव से संचालन बंद कराया गया। वाराणसी के सारनाथ स्थित ‘कैफे कॉफी डे’ (CCD) में सीलन भरी टूटी छत, गंदे स्टोर रूम और बदहाल टॉयलेट की स्थिति मिलने पर नोटिस जारी हुआ। वहीं वाराणसी के अर्दली बाजार स्थित ‘ला पीनोज’ में डस्टबिन के आसपास कीड़े रेंगते मिले और मांसाहारी-शाकाहारी खाना अलग रखने का कोई प्रोटोकॉल नहीं दिखा।

प्रयागराज के पीवीआर मॉल स्थित ‘आर्यन फैमिली डेलाइट’ में कच्चे और पके भोजन को बिना किसी सुरक्षा प्रोटोकॉल के एक साथ ठूंसा गया था। साथ ही किचन में रखी गई कच्चे मीट की खेप बेहद संदिग्ध और अमानक पाई गई, जिसके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।

सिर्फ चालान नहीं, सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन लक्ष्य

खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई केवल खाने के स्वाद या मिलावट तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘फार्म टू फोर्क’ की तर्ज पर पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है। इसमें किचन की स्वच्छता, पेस्ट कंट्रोल (कीड़े-मकोड़े रोकने के उपाय), नालियों की निकासी, तापमान नियंत्रण, शाकाहारी और मांसाहारी बर्तनों का पृथक्करण और पैकेटों पर एफएसएसएआई (FSSAI) के अनिवार्य लेबलिंग नियमों की पड़ताल हो रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, विभाग का उद्देश्य व्यापारियों को परेशान करना नहीं बल्कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन की गारंटी देना है। जहां छोटी कमियां हैं, वहां सुधरने का अवसर दिया जा रहा है, लेकिन जहां जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ पाया जाएगा, वहां सीधे सीलिंग और लाइसेंस रद्दीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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