Tuesday , 22 September 2026

राम मंदिर दान हेराफेरी मामला: CCTV में नकदी छिपाने की 105 घटनाएं कैद, सुप्रीम कोर्ट में SIT का बड़ा खुलासा…173 गवाहों के बयान दर्ज

अयोध्या ब्यूरो। अयोध्या स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान की धनराशि में कथित हेराफेरी के मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विशेष जांच दल (SIT) की ताजा स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर के पीएफसी (PFC) भवन स्थित काउंटिंग रूम (दान गणना कक्ष) के सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण में 105 ऐसी घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें बिना किसी वैध अनुमति के नकदी निकाली गई या उसे छिपाया गया। रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ है कि इस खेल को गणना कार्य में जुटे कुछ अन्य लोगों की मिलीभगत से अंजाम दिया जा रहा था।

25 जून 2026 को दर्ज हुई थी प्राथमिकी, आठ नामजद आरोपी

इस गंभीर मामले की शुरुआत 25 जून 2026 को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में दर्ज प्राथमिकी के साथ हुई थी, जिसमें आठ कर्मचारियों व व्यक्तियों को नामजद किया गया था। शुरुआती पुलिस जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, तलाशी, नकद बरामदगी, बैंक रिकॉर्ड, अचल संपत्तियों के कागजात, मोबाइल डेटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) जैसे साक्ष्य एकत्र किए गए थे। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शीर्ष अदालत के निर्देश पर गठित एसआईटी ने जांच की कमान संभालकर इसका दायरा बढ़ाया।

फॉरेंसिक ऑडिटर की मदद से बैंक खातों और संपत्तियों की पड़ताल

एसआईटी की पड़ताल केवल सीसीटीवी कैमरों तक सीमित नहीं रही। वित्तीय कड़ियों को बारीकी से खंगालने के लिए प्रतिष्ठित फॉरेंसिक ऑडिटर ‘एएसए एंड एसोसिएट्स एलएलपी’ (ASA & Associates LLP) को जांच टीम के साथ संबद्ध किया गया। ऑडिट के तहत संबंधित कर्मचारियों व अन्य संदिग्धों के बैंक खातों, चढ़ावे की प्राप्ति से लेकर बैंक में जमा कराने की पूरी प्रक्रिया और ट्रस्ट के ऑनलाइन बैंकिंग लेनदेन का फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया।

एसआईटी ने आरोपियों के खातों में अज्ञात स्रोतों से जमा हुई भारी धनराशि, चल-अचल संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और हेराफेरी की रकम के विभिन्न निवेशों का वित्तीय मिलान किया है। अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट में हर आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका, उसके स्तर पर हुई अनुमानित हेराफेरी और बरामदगी का अलग-अलग लेखा-जोखा शामिल किया गया है।

803 बहुमूल्य वस्तुओं का रिकॉर्ड दुरुस्त, 86 बिना रसीद वाली वस्तुओं का भी भौतिक सत्यापन

जांच के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दान में मिले सोने-चांदी व अन्य बहुमूल्य सामानों की भी गहन भौतिक जांच कराई गई। रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि टीसीएस (TCS) सॉफ्टवेयर से जारी 803 बहुमूल्य वस्तुओं की रसीदों और ट्रस्ट के आंतरिक अभिलेखों का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के लॉकर में रखे सामान से शत-प्रतिशत मिलान हुआ है, जिसमें कोई अनियमितता नहीं मिली। इसके अलावा, 86 ऐसी वस्तुएं भी सामने आईं जिनकी औपचारिक रसीद जारी नहीं हो सकी थी, उनका भी अलग से भौतिक सत्यापन कर रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

वहीं, ट्रस्ट द्वारा गलाने के लिए ‘सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ को भेजी गई करीब 944.411 किलोग्राम सफेद धातु (चांदी) के प्रपत्रों की भी जांच की गई, जो रिकॉर्ड के अनुरूप पाए गए।

चांदी की ईंटों और विशेष दान से जुड़े आरोपों की भी जांच पूरी

सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों पर उठाए गए सवालों के आधार पर एसआईटी ने विशेष दानों की भी पड़ताल की। इसमें 200 किलोग्राम और 38.288 किलोग्राम वजन की चांदी की ईंटें, चांदी का हार, चरण पादुकाएं और ऐतिहासिक रामचरितमानस ग्रंथ के समर्पण से जुड़े दान शामिल थे। संबंधित दानदाताओं और प्रभारियों से पूछताछ तथा भौतिक जांच के बाद इस मद में कोई गड़बड़ी या विसंगति नहीं पाई गई।

173 गवाहों के बयान दर्ज, 25 सितंबर तक अदालत में चार्जशीट दाखिल करेगी SIT

एसआईटी ने 14 सितंबर 2026 तक ट्रस्ट के पदाधिकारियों, लेखा शाखा के कर्मचारियों, बैंक प्रबंधकों, सुरक्षाकर्मियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और संपत्ति कारोबारियों समेत कुल 173 गवाहों के आधिकारिक बयान दर्ज किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने पीठ को अवगत कराया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और एसआईटी 25 सितंबर 2026 तक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 193 के तहत सक्षम अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की तैयारी में है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि निचली अदालत में चार्जशीट पेश किए जाने के बाद उसकी एक प्रति शीर्ष अदालत के रिकॉर्ड में भी दाखिल की जाए। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को मुकर्रर की गई है।

 

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