
लखनऊ स्विट्जरलैंड से स्वदेश लौटकर दलित और सामाजिक मुद्दों पर लगातार मुखर रुख अपना रहीं सामाजिक कार्यकर्ता रोहिणी घावरी अब सक्रिय राजनीति में अपने लिए मजबूत जमीन तलाशती नजर आ रही हैं। हालिया सियासी हलचलों और उनके सार्वजनिक बयानों से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि वह बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मंच पर अपनी राजनीतिक संभावनाएं टटोल रही हैं। इसी कड़ी में उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती की एक हालिया सोशल मीडिया पोस्ट को साझा करते हुए वाल्मीकि समाज को संगठन और चुनावी राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व देने की जोरदार वकालत की है।
‘कांशीराम साहब के गुरु दीनाभाना के समाज को दें अवसर’ बसपा प्रमुख मायावती द्वारा परिवारवाद के खिलाफ किए गए एक पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए रोहिणी घावरी ने लिखा कि आदरणीय बहनजी, परिवारवाद को दरकिनार कर कांशीराम साहब के गुरु दीनाभाना वाल्मीकि जी के समाज को एक मौका दीजिए। उन्होंने तंज भरे अंदाज में लिखा कि बसपा की कृपा वहीं अटकी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सार्वजनिक अपील के जरिए रोहिणी ने सीधे तौर पर बहुजन आंदोलन में वाल्मीकि समाज के ऐतिहासिक योगदान को याद दिलाते हुए पार्टी के भीतर समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।
‘चंद्रशेखर जाति के नेता, मायावती सर्वदलितों की आवाज’ रोहिणी घावरी पिछले काफी समय से दलित राजनीति के भीतर वाल्मीकि समाज के अधिकारों की आवाज बुलंद कर रही हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा चुनाव लड़ने की नहीं, बल्कि अपने समाज के वंचित लोगों को विधानसभा और संसद की चौखट तक पहुंचाना है। उन्होंने राजनीतिक दलों से मांग की है कि वाल्मीकि समाज को चुनाव में टिकट दिए जाएं, दलित आरक्षण में वर्गीकरण (सब-कैटेगराइजेशन) लागू हो और लंबे समय से उपेक्षित सफाई कर्मचारियों को नियमित किया जाए। नगीना सांसद पर निशाना साधते हुए उन्होंने दो टूक कहा था कि चंद्रशेखर आजाद सिर्फ एक विशेष जाति तक सीमित नेता हैं, जबकि मायावती पूरे दलित समाज की सर्वमान्य नेता हैं।
चंद्रशेखर आजाद से विवाद के बाद सुर्खियों में आई थीं रोहिणी रोहिणी घावरी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख व नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के बीच का विवाद काफी समय से सुर्खियों में रहा है। रोहिणी ने चंद्रशेखर पर शादी का झूठा झांसा देकर शोषण करने और बाद में मुकर जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस मामले को न्यायालय तक ले जाने और कानूनी लड़ाई लड़ने का एलान किया है। दूसरी तरफ, सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश करार दिया है और स्पष्ट किया है कि वह इस पूरे मामले में अपना पक्ष अदालत के समक्ष ही रखेंगे।
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