
अमरोहा/नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी से हुई मुलाकात ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। दिल्ली में हुई इस उच्चस्तरीय शिष्टाचार भेंट की तस्वीर जयंत चौधरी ने खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की, जिसके बाद शमी के राजनीति की नई पिच पर उतरने के कयासों ने जोर पकड़ लिया है। रालोद प्रमुख ने तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि शमी जैसे महान क्रिकेटर से मिलना एक सुखद अनुभव रहा। इस मुलाकात के बाद अमरोहा ही नहीं बल्कि पूरे मुरादाबाद मंडल में नए सियासी समीकरणों पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
17 महीने से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर, सियासत में एंट्री की अटकलें तेज टीम इंडिया के प्रमुख तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी पिछले करीब 17 महीनों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर चल रहे हैं। उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 9 मार्च 2025 को चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इसके बाद इंग्लैंड और श्रीलंका दौरों के लिए भी उनके नाम पर विचार नहीं हुआ। क्रिकेट मैदान से इस लंबी दूरी के बीच रालोद मुखिया से उनकी मुलाकात को राजनीतिक विश्लेषक बेहद अहम मान रहे हैं। हालांकि, चुनाव लड़ने के सवाल पर शमी के परिवार और रालोद के शीर्ष नेतृत्व ने फिलहाल रणनीतिक चुप्पी साध रखी है। रालोद के अमरोहा जिलाध्यक्ष सचिन चौधरी का कहना है कि यह मुलाकात किस संदर्भ और उद्देश्य से हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी उनके पास नहीं है।
सपा विधायक महबूब अली की काट तलाश रहा एनडीए, शमी बन सकते हैं बड़ा चेहरा अमरोहा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री महबूब अली का लंबे समय से दबदबा रहा है। सियासी विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा-रालोद (एनडीए) गठबंधन को इस सीट पर एक ऐसे कद्दावर चेहरे की तलाश है जो सपा के इस मजबूत किले में सेंध लगा सके। मोहम्मद शमी मूल रूप से अमरोहा के सहसपुर अलीनगर के निवासी हैं और तुर्क बिरादरी से आते हैं। अमरोहा और खासकर जोया क्षेत्र में तुर्क मतदाताओं की भारी तादाद है, जिसके चलते इस इलाके को राजनीतिक हलकों में ‘तुर्किस्तान’ भी कहा जाता है। यदि शमी एनडीए के पाले में आते हैं, तो गठबंधन को अमरोहा के साथ-साथ मुरादाबाद और संभल मंडल की कई अन्य सीटों पर भी सीधा सियासी फायदा मिल सकता है।
शमी नहीं तो परिवार से कोई चेहरा? भाई हसीब के नाम पर भी कयास अमरोहा की स्थानीय राजनीति में यह चर्चा भी जोरों पर है कि यदि मोहम्मद शमी अपने खेल करियर के चलते सीधे तौर पर चुनावी दंगल में नहीं उतरते हैं, तो उनके परिवार के किसी सदस्य को मैदान में उतारा जा सकता है। इससे पहले भी उनके बड़े भाई हसीब अहमद के चुनाव लड़ने की अटकलें सामने आती रही हैं। ग्रामीण और खेल पृष्ठभूमि से जुड़े इस परिवार का क्षेत्र में खासा प्रभाव है। ऐसे में जयंत-शमी की इस मुलाकात ने पश्चिमी यूपी में 2027 के चुनावी मोर्चे पर एनडीए के संभावित मास्टरस्ट्रोक की नई बहस छेड़ दी है।
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