Sunday , 27 September 2026

बलिया में सनसनीखेज दोहरा हत्याकांड: 72 घंटे में खुलासा, ‘प्रतिष्ठा’ के फेर में पति ने ही कराई थी मानसिक रूप से बीमार पत्नी और दृष्टिबाधित बेटी की हत्या; 3 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रसड़ा कोतवाली अंतर्गत मुस्तफाबाद गांव में हुए मां-बेटी के दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस खुलासे के अनुसार, परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को लेकर लगातार तनाव में चल रहे 70 वर्षीय रामचीज गुप्ता ने ही अपनी पत्नी और दिव्यांग बेटी को रास्ते से हटाने की खूनी साजिश रची थी। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने में उसने गांव के ही दो अन्य युवकों को शामिल किया। पुलिस ने मुख्य आरोपी पति समेत तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है और उनकी निशानदेही पर कत्ल में इस्तेमाल हथियार व खून से सने कपड़े बरामद कर लिए हैं।

घर में मां और खेत में मिली थी दृष्टिबाधित बेटी की लाश

सराय भारती के मुस्तफाबाद गांव में 17 सितंबर की रात उस वक्त हड़कंप मच गया था, जब रामचीज के मकान के भीतर 65 वर्षीय मान्ती देवी और घर से करीब 30 मीटर दूर धान के खेत में 24 वर्षीय दृष्टिबाधित बेटी गौरी का रक्तरंजित शव मिला। दोनों की धारदार हथियार से वार कर हत्या की गई थी। वारदात स्थल की प्राथमिक पड़ताल में ही घर के फर्श से खून के धब्बे धोने के प्रमाण मिले थे, जिसके बाद पुलिस का शक गहरा गया था और मामले को संदिग्ध मानकर तफ्तीश तेज कर दी गई थी।

मानसिक तनाव और तथाकथित सामाजिक प्रतिष्ठा बनी वजह

एएसपी (उत्तरी) दिनेश शुक्ल के मुताबिक, जांच में सामने आया कि मान्ती देवी लंबे समय से मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं। वह अक्सर बिना बताए घर से निकल जाती थीं और कई-कई दिनों तक वापस नहीं लौटती थीं। वहीं, 24 वर्षीय बेटी गौरी आंखों से देख नहीं सकती थी और मां की गैरमौजूदगी में पड़ोसियों से मांगकर भोजन करने को मजबूर थी।

पुलिस के अनुसार, इस पारिवारिक स्थिति के चलते रामचीज गंभीर मानसिक दबाव में था। उसने पूर्व में गांव की चट्टी (चौराहे) पर भी हताशा में पत्नी और बेटी को मार डालने या खुद जान दे देने की बात कही थी। आखिरकार उसने दोनों को खत्म करने की योजना बनाई। शुरुआत में गांव के चंदन यादव और दिनेश गुप्ता ने साथ देने से इनकार किया, लेकिन 16 सितंबर की शाम वे रामचीज की साजिश में शामिल होने के लिए राजी हो गए।

खौफनाक वारदात और साक्ष्य मिटाने की नाकाम कोशिश

तय साजिश के तहत तीनों आरोपियों ने मिलकर मान्ती देवी और गौरी की धारदार हथियार (दाव) से प्रहार कर निर्मम हत्या कर दी। इसके बाद वारदात को बाहरी हमलावरों की करतूत दर्शाने के लिए गौरी के शव को घसीटकर बाहर धान के खेत में फेंक दिया गया। कमरे में फैला खून धोकर साफ किया गया ताकि कत्ल का मूल स्थान छिपाया जा सके।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी सुनील कुमार सिंह और एसपी ओमवीर सिंह ने खुद घटनास्थल का मुआयना किया था। स्वाट, सर्विलांस और फॉरेंसिक टीमों ने मौके से अहम वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए।

पति की खामोशी और अंतिम संस्कार की जल्दबाजी ने खोला राज

वारदात के बाद रामचीज की संदिग्ध हरकतों ने पुलिस के कान खड़े कर दिए। घर में दोहरी हत्या होने के बावजूद उसने न तो ग्रामीणों को गुहार लगाई और न ही पुलिस को इत्तला दी, बल्कि वह चुपचाप अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गया था। साथ ही, घर के अंदर खून साफ करने के निशान मिलने और बेटी का शव खेत में पाए जाने से स्पष्ट था कि इस कृत्य में एक से अधिक लोग शामिल थे, क्योंकि अकेले एक बुजुर्ग के लिए शव को बिना खून के निशान छोड़े खेत तक ले जाना संभव नहीं था। शक पुख्ता होते ही पुलिस ने रामचीज और प्रधान प्रतिनिधि समेत चार लोगों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, जिसके बाद साजिश की परतें खुलती चली गईं।

सिधागरघाट से तीनों अभियुक्त दबोचे गए, जेल भेजा

19 सितंबर की सुबह मुखबिर से मिली सटीक सूचना पर स्वाट, सर्विलांस और रसड़ा कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने सिधागरघाट पुल के पास घेराबंदी कर रामचीज गुप्ता, चंदन यादव और दिनेश गुप्ता को धर दबोचा। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे का दाव, घटना के वक्त रामचीज द्वारा पहना गया खून लगा कुर्ता और चंदन की खून सनी टी-शर्ट बरामद कर ली गई है।

पुलिस ने पूर्व में दर्ज अज्ञात के मुकदमे को हत्या (BNS की संबंधित धाराओं) और आर्म्स एक्ट में तरमीम करते हुए तीनों आरोपियों को सक्षम न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।

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