
काठमांडू: नेपाल में बीते दिनों भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मची भारी तबाही के बाद अब एक और नया संकट खड़ा हो गया है। नेपाल-चीन सीमा के पास पहाड़ों पर भूस्खलन के मलबे से दो नई झीलें बन गई हैं। इनमें से एक झील से लगातार पानी का रिसाव जारी है, जबकि दूसरी झील का जलस्तर और आकार तेजी से बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि दूसरी झील का प्राकृतिक बांध टूटा तो भारी सैलाब निचले इलाकों में फिर से भयानक तबाही ला सकता है।
मौत का आंकड़ा 633 पार, 320 भारतीयों समेत 2500 लोग लापता
नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में इस प्राकृतिक आपदा के चलते मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 633 हो गई है। नेपाल में आधिकारिक तौर पर 626 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। वहीं तिब्बत सीमा पर 7 मौतों की पुष्टि हुई है और 554 लोग लापता बताए जा रहे हैं। आपदा की चपेट में आने से 320 भारतीय नागरिक लापता हैं, जबकि लगभग 400 भारतीय तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में फंसे हुए हैं।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: कभी भी फट सकती है दूसरी झील
ग्लेशियर और आपदा वैज्ञानिक जेफ्री कार्गेल के अनुसार, पहाड़ों में जमा यह पानी बेहद अस्थिर स्थिति में है। पहली झील का एक हिस्सा पहले ही टूट चुका है, जिससे यदि ऊपरी झील फटती है तो दोनों जलाशयों का भारी पानी एक साथ नीचे की घाटियों में गिरेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि पिछले दिनों आई बाढ़ अपने साथ 5 लाख डंप ट्रकों के बराबर भारी मलबा, चट्टानें और कीचड़ बहाकर लाई थी। इस नए खतरे को देखते हुए बचाव दलों को लगातार अलर्ट पर रखा गया है।
5 जिलों में इमरजेंसी घोषित, 80 पुल और 40 किमी सड़कें जमींदोज
नेपाल सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए 5 जिलों की 15 स्थानीय निकायों को आपदा प्रभावित ‘आपातकालीन क्षेत्र’ घोषित कर दिया है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, आई बाढ़ में करीब 80 पुल बह गए हैं और 40 किलोमीटर से ज्यादा मुख्य सड़कें तबाह हो चुकी हैं। यह इलाका चीन के साथ होने वाले व्यापार का प्रमुख मार्ग है, जिससे नेपाल की पहले से दबाव झेल रही अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।
तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर भीषण तबाही, राहत कोष में उमड़ी मदद
नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित प्रमुख व्यापारिक और पर्यटन केंद्र ‘ग्यिरोंग पोर्ट’ पूरी तरह मलबे और कीचड़ के नीचे दब चुका है। चीनी बचाव दल दुर्गम रास्तों को पार कर राहत कार्यों में जुटे हैं। दूसरी तरफ, आपदा पीड़ितों की सहायता के लिए बनाए गए नेपाल के ‘प्रधानमंत्री राहत कोष’ में अब तक 4.38 अरब नेपाली रुपये (लगभग ₹274 करोड़ भारतीय रुपये) और विदेशी खातों में करीब 6.8 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता राशि जमा हो चुकी है।
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