Thursday , 13 August 2026

LDA घूसकांड में विजिलेंस का बड़ा एक्शन: 11 इंजीनियरों और PCS अधिकारी पर कसता शिकंजा, दलालों और अफसरों की बातचीत आई सामने

लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के चर्चित घूसकांड में विजिलेंस विभाग ने अपनी जांच का दायरा काफी तेज कर दिया है। बुधवार देर शाम विजिलेंस की एक विशेष टीम अचानक एलडीए मुख्यालय पहुंची और करीब ढाई घंटे तक डेरा डालकर संबंधित अफसरों व अभियंताओं से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला। विजिलेंस सूत्रों की मानें तो इस मामले में एलडीए के 11 इंजीनियरों और एक पीसीएस (PCS) स्तर के अधिकारी के खिलाफ खुली प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज कर ली गई है, जिससे महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

साढ़े 7 लाख की घूस लेते रंगे हाथ पकड़े गए थे JE और सुपरवाइजर

यह पूरा मामला 1 अगस्त का है, जब सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की टीम ने एलडीए के अवर अभियंता (JE) दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और एक बिचौलिए श्रवण कुमार को साढ़े सात लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। यह रिश्वत एक कमर्शियल प्रॉपर्टी के अवैध निर्माण पर बुलडोजर या सीलिंग की कार्रवाई न करने के एवज में ऐंठी जा रही थी। इस गिरफ्तारी के बाद से ही पूरे तंत्र की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा रहा था।

अवैध निर्माणों को संरक्षण और शिकायतों में खेल: 1 सेवानिवृत्त समेत 11 निशाने पर

विजिलेंस टीम अब उन अधिकारियों की फाइलें खंगाल रही है, जिन्होंने अवैध निर्माणों को शह दी, शिकायतों के निस्तारण में झोल किया और दलालों के जरिए मोटी रकम की उगाही की। जांच के दायरे में आए 11 अभियंताओं में से एक रिटायर हो चुका है, जबकि बाकी सभी वर्तमान में तैनात हैं। विजिलेंस ने मुख्यालय से वे तमाम फाइलें और रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं, जिन पर भ्रष्टाचार, अवैध निर्माण को संरक्षण देने और लेन-देन के संगीन आरोप लगे हैं।

ऑडियो रिकॉर्डिंग से खुलेगा राज, दलालों और अफसरों की बातचीत आई सामने

जांच एजेंसी के हाथ कई ऐसे पुख्ता सबूत लगे हैं जो इन भ्रष्ट अफसरों की उल्टी गिनती शुरू कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस को कुछ अभियंताओं की कई संदिग्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली हैं। इन रिकॉर्डिंग्स में एलडीए के इंजीनियर, बिचौलिए, दलाल और कथित पत्रकार आपस में सौदेबाजी करते और शिकायतों को दबाने का खेल रचते सुने जा रहे हैं। इन सबूतों के आधार पर आरोपों की पुष्टि होना लगभग तय माना जा रहा है।

IGRS की झूठी शिकायतों से ‘ब्लैकमेलिंग’: 18 कथित पत्रकारों की भूमिका की भी जांच

मामले में एक नया मोड़ तब आया जब आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर अवैध निर्माणों की झड़ी लगाने वाले 18 कथित पत्रकारों का नाम सामने आया। विजिलेंस ने इन सभी 18 लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि पोर्टल पर बार-बार शिकायतें दर्ज कराकर दबाव बनाया जाता था और फिर रिश्वत का हिस्सा तय कर शिकायत वापस ले ली जाती थी। इसके अलावा, अलीगंज अग्निकांड के बाद निलंबित किए गए अभियंताओं के पुराने कारनामों की फाइलें भी विजिलेंस ने री-ओपन कर दी हैं।

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