लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में अब गंभीर रूप से घायल और सिर की चोट (हेड इंजरी) से जूझ रहे मरीजों के इलाज में एक-एक सेकेंड की देरी नहीं होगी। हादसों के शिकार मरीजों को तत्काल त्वरित चिकित्सा सेवा देने के लिए ट्रॉमा कैजुअल्टी में ही मोबाइल सीटी स्कैन मशीन स्थापित कर दी गई है। अब जांच के लिए मरीजों को स्ट्रेचर पर एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक दौड़ना नहीं पड़ेगा, बल्कि रिपोर्ट मिलते ही डॉक्टर तुरंत इलाज शुरू कर सकेंगे।
एक ही छत के नीचे तुरंत जांच, बचेगा कीमती समय
दरअसल, केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में कुल 400 बेड हैं, जो हमेशा भरे रहते हैं। इसके अलावा लगभग 120 से अधिक मरीज स्ट्रेचर पर रहकर इलाज कराने को मजबूर रहते हैं। रोजमर्रा के आंकड़ों पर नजर डालें तो इमरजेंसी में हर दिन 300 से अधिक नए मरीज पहुंचते हैं। इनमें से सिर की गंभीर चोट वाले मरीजों को सीटी स्कैन कराने के लिए लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता था, क्योंकि पूरे ट्रॉमा सेंटर में अब तक सिर्फ एक ही सीटी स्कैन मशीन चालू स्थिति में थी।
एईआरबी (AERB) से हफ्ते भर में मिलेगी हरी झंडी
ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. प्रेमराज सिंह ने बताया कि मरीजों की असुविधा को देखते हुए ट्रॉमा कैजुअल्टी में मोबाइल सीटी स्कैन मशीन खरीदी गई है। इसके सुरक्षित और आधिकारिक संचालन के लिए परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) में आवेदन जमा कर दिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक सप्ताह के भीतर मंजूरी मिलते ही इसका संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इससे कैजुअल्टी में आते ही डॉक्टर की सलाह पर तत्काल सीटी स्कैन संभव हो सकेगा।
तीन नई मोबाइल एक्सरे मशीनें भी बेड़े में शामिल
मरीजों के लिए एक और राहत की खबर यह है कि केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर को तीन नई मोबाइल एक्सरे मशीनें भी मिल गई हैं। डॉ. प्रेमराज सिंह ने जानकारी दी कि इन्हें आईसीयू, पीडियाट्रिक (बाल रोग) वार्ड और कैजुअल्टी में तैनात कर जांच कार्य शुरू भी कर दिया गया है। इससे पहले पूरे ट्रॉमा सेंटर में सिर्फ एक मोबाइल एक्सरे मशीन होने के कारण मरीजों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था। अब नई मशीनों के आने से एक्स-रे रिपोर्ट जल्द मिलेगी और डॉक्टर बिना किसी विलंब के सटीक इलाज शुरू कर सकेंगे।
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