Friday , 31 July 2026

रक्षक ही बना भक्षक! गोरखपुर में 10 साल की मासूम दीपिका का अपहरण कर हत्या, डायल-112 का सिपाही निकला कातिल

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। सदर अस्पताल के सामने से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हुई 10 वर्षीय मासूम बालिका दीपिका की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस जघन्य हत्याकांड का पर्दाफाश करते हुए जब पुलिस ने कातिल का चेहरा बेनकाब किया, तो खुद खाकी भी शर्मसार हो गई। जनता की हिफाजत का दम भरने वाली डायल-112 सेवा में तैनात सिपाही ही इस वारदात का मुख्य सूत्रधार निकला। आरोपी सिपाही पहले भी छेड़खानी के गंभीर आरोप में जेल की हवा खा चुका है, जिसके बाद पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली और विभागीय निगरानी तंत्र पर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं।

सदर अस्पताल के सामने से चकमा देकर उड़ा ले गया था खाकीधारी

घटनाक्रम के अनुसार, 28 जुलाई की रात लगभग 10 बजे रिंकू शर्मा की 10 साल की बेटी दीपिका सदर अस्पताल के पास से अचानक रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी। परिजनों ने जब आसपास खोजबीन की, तो पता चला कि पुलिस की वर्दी पहने एक बाइक सवार व्यक्ति बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। इस सूचना के बाद से ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में जिले भर की नाकाबंदी कर तलाश शुरू की गई।

सीसीटीवी फुटेज खंगाली तो सामने आया खाकी का खौफनाक चेहरा

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. कौस्तुभ ने पुलिस लाइन स्थित ‘व्हाइट हाउस’ सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान मामले का सनसनीखेज खुलासा किया। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कई विशेष टीमों का गठन किया गया था। पुलिस ने सदर अस्पताल और आसपास के इलाकों के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। बैक-ट्रेसिंग और फ्रंट-ट्रेसिंग तकनीक से बाइक के नंबर को ट्रैक किया गया, जिससे आरोपी की पहचान गाजीपुर जिले के रहने वाले सिपाही अभिषेक यादव के रूप में हुई, जो डायल-112 में तैनात था।

च्यूटहा पुल के पास मिला मासूम का शव, नीयत खराब होने पर ली जान

कड़ाई से की गई पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस की टीम च्यूटहा पुल के पास पहुंची, जहां से मासूम दीपिका का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया। शुरुआती जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि आरोपी सिपाही की नीयत बच्ची के प्रति बेहद खराब थी। मासूम ने जब उसकी हरकतों का कड़ा विरोध किया और शोर मचाने की कोशिश की, तो आरोपी ने बल प्रयोग करते हुए उसकी हत्या कर दी और शव को सुनसान जगह पर फेंक कर फरार हो गया।

जेल से छूटकर फिर पहनी वर्दी: महकमे की बड़ी लापरवाही पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में पुलिस महकमे की विभागीय कार्यप्रणाली गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। पड़ताल में सामने आया कि जनवरी 2025 में भी आरोपी सिपाही अभिषेक यादव पर एक नाबालिग से अभद्रता और फर्जी नंबर प्लेट इस्तेमाल करने का मुकदमा दर्ज हुआ था। उस वक्त उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और निलंबित भी किया गया था। लेकिन बाद में उसे बहाल कर डायल-112 जैसी अति-संवेदनशील सेवा में तैनात कर दिया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को दोबारा जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई?

एसएसपी डॉ. कौस्तुभ का सख्त रुख: एनएसए (NSA) और बर्खास्तगी की कार्रवाई

एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने दो टूक शब्दों में कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह पुलिस का जवान ही क्यों न हो। खाकी को कलंकित करने वाले इस आरोपी के खिलाफ बेहद सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। आरोपी सिपाही को सेवा से तुरंत बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मामले की त्वरित सुनवाई के लिए केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आरोपी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) भी लगाया जाएगा ताकि उसे फांसी जैसी कठोरतम सजा दिलाई जा सके।

पूरे इलाके में फैला भारी जनाक्रोश, न्याय की गुहार

मासूम दीपिका की दर्दनाक मौत की खबर फैलते ही पूरे गोरखपुर में शोक और भारी आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने आरोपी को जल्द से जल्द सख्त सजा देने की मांग उठाई है। लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे तो आम आदमी अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए किस पर भरोसा करे। यह घटना केवल एक अपराध भर नहीं है, बल्कि पुलिस प्रशासन के भीतर समीक्षा और जवाबदेही तय करने का एक गंभीर चेतावनी संदेश भी है।

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