भोपाल। आईपीएल (IPL) में पंजाब किंग्स के लिए खेलने वाले ऑलराउंडर शशांक सिंह और उनके पिता व रिटायर्ड आईपीएस (IPS) अधिकारी शैलेश सिंह एक बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस गए हैं। भोपाल के रातीबड़ थाने में 29 जून को इस हाई-प्रोफाइल परिवार और उनके करीबियों के खिलाफ घर के कुक (रसोइया) के साथ बेरहमी से मारपीट, गाली-गलौज करने और बंधक बनाने के गंभीर आरोपों में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। पूरा विवाद घर में बने खाने के स्वाद को लेकर शुरू हुआ था, जो देखते ही देखते पुलिस थाने तक पहुंच गया।
‘स्वाद’ पर विवाद: खाना पसंद न आने पर मारपीट और फोन जब्त करने का आरोप
दर्ज मामले के अनुसार, मूल रूप से मध्य प्रदेश के रीवा जिले (अतरला थाना क्षेत्र) के रहने वाले कुक विपेंद्र सिंह तोमर ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई है। विपेंद्र का आरोप है कि क्रिकेटर के परिवार को उनके द्वारा बनाया गया खाना पसंद नहीं आया। भोजन का स्वाद अच्छा न होने की बात पर शशांक सिंह, उनके पिता शैलेश सिंह और उनके ड्राइवर ने मिलकर विपेंद्र के साथ गाली-गलौज की और जमकर मारपीट की। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने और काम छोड़ने की बात कहने के बावजूद उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया और उससे जबरदस्ती बंधक बनाकर काम कराया गया।
15 हजार वेतन, AC कमरा और सरकारी नौकरी का दिया गया झांसा
पीड़ित विपेंद्र तोमर ने एफआईआर में बताया कि उसे आरडी मिश्रा नाम के एक व्यक्ति ने झांसा देकर रीवा से भोपाल भेजा था। उसे लालच दिया गया था कि भोपाल में केवल दो लोगों का ही खाना बनाना होगा, काम का कोई खास दबाव नहीं रहेगा और इसके बदले उसे ₹15,000 मासिक वेतन के साथ रहने के लिए एसी (AC) कमरा दिया जाएगा।
पीड़ित का यह भी बड़ा दावा है कि उसे सरकारी नौकरी लगवाने का प्रलोभन दिया गया था। उसे कहा गया था कि ‘साहब’ डीजीपी (रिटायर्ड IPS शैलेश सिंह) हैं और वे महज 3 महीने के भीतर उसकी पक्की सरकारी नौकरी लगवा देंगे। इसी झांसे और भरोसे में आकर विपेंद्र अपने सारे शैक्षणिक व जरूरी दस्तावेज लेकर भोपाल आया था।
3 दिन तक बंधक बनाकर रखने का आरोप, इन धाराओं में केस दर्ज
विपेंद्र का आरोप है कि भोपाल आने के बाद वादे के उलट उसके साथ हिंसक व्यवहार शुरू हो गया। उसे करीब तीन दिनों तक घर के भीतर बंधक बनाकर रखा गया। उसने आरोप लगाया कि जितेंद्र सिंह तोमर नाम के एक व्यक्ति ने उसे बेरहमी से पीटा, जबकि रिटायर्ड आईपीएस शैलेश सिंह ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके।
इस शिकायत पर रातीबड़ थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूर्व आईपीएस शैलेश सिंह, क्रिकेटर शशांक सिंह और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(बी) [अश्लील कृत्य/गाली-गलौज], 115(2) [स्वेच्छा से चोट पहुंचाना] और 3(5) [संयुक्त रूप से अपराध को अंजाम देना] के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।
क्रिकेटर शशांक सिंह की सफाई: ‘सभी आरोप पूरी तरह निराधार और झूठे’
इस हाई-प्रोफाइल मामले के मीडिया में आने और एफआईआर दर्ज होने के बाद क्रिकेटर शशांक सिंह ने सामने आकर अपना पक्ष रखा है। शशांक सिंह ने अपने ऊपर लगे मारपीट, गाली-गलौज और बंधक बनाने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, “मेरे और मेरे परिवार पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से झूठे, मनगढ़ंत और निराधार हैं। मुझे इस मामले और शिकायत की कोई वास्तविक जानकारी भी नहीं है।”
रातीबड़ थाना पुलिस का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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