Monday , 29 June 2026

Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, चंपत राय के पूर्व ड्राइवर सहित सभी 8 आरोपियों की….

अयोध्या के भव्य और ऐतिहासिक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों द्वारा श्रद्धा से चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित हेराफेरी और गबन के सनसनीखेज मामले में अदालत ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अयोध्या की विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस महाघोटाले में शामिल सभी 8 नामजद आरोपियों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) को अगले 14 दिनों के लिए बढ़ा दिया है। कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद अब ये सभी आरोपी 13 जुलाई तक अयोध्या जिला जेल की सलाखों के पीछे ही रहेंगे।

यह पूरा मामला श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक शिकायत पर दर्ज कराई गई FIR के बाद सामने आया था। आरोप है कि मंदिर परिसर में रखी दान पेटिकाओं (Hundi) से निकलने वाली भारी-भरकम नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं को बेहद शातिर तरीके से खुर्द-बुर्द किया जा रहा था। इन सभी आरोपियों पर मंदिर के साथ विश्वासघात करने, सुनियोजित आपराधिक साजिश रचने, चोरी और करोड़ों के गबन की संगीन धाराएं लगाई गई हैं।

SIT की ताबड़तोड़ कार्रवाई: अब तक करीब 80 लाख रुपये कैश बरामद

भगवान राम के चढ़ावे की चोरी से जुड़े इस अति-संवेदनशील मामले की कमान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) संभाल रही है। SIT की टीम इस मामले की कड़ियाँ जोड़ने के लिए लगातार आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी और सघन पूछताछ कर रही है। अब तक हुई तफ्तीश में एसआईटी ने अलग-अलग आरोपियों के पास और उनके ठिकानों से लगभग 79.85 लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद करने में बड़ी सफलता हासिल की है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, हालांकि एक आरोपी के पास से सीधे तौर पर कोई रिकवरी नहीं हुई है, लेकिन पुख्ता डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों से यह साफ हो चुका है कि वह इस पूरे घिनौने खेल की साजिश में बराबर का हिस्सेदार था।

राम मंदिर घोटाला: कौन हैं ये 8 आरोपी जो चढ़ावे पर मार रहे थे डाका?

उत्तर प्रदेश पुलिस की गिरफ्त में आए ये सभी 8 आरोपी कोई बाहरी नहीं, बल्कि मंदिर परिसर के अंदर ही दान की गिनती, वाउचर तैयार करने और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कार्यों में तैनात थे। इसी का फायदा उठाकर इन्होंने इस हेराफेरी को अंजाम दिया। इन मुख्य चेहरों में शामिल हैं:

  • रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू: इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड, जो राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर और बेहद करीबी माना जाता था।

  • मनीष यादव: मुख्य आरोपी रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का सगा भतीजा।

  • लवकुश मिश्रा: एसआईटी की छापेमारी के दौरान इसके घर से करीब 10 लाख रुपये का बेहिसाबी कैश बरामद हुआ है।

  • अनिकुलप मिश्रा: ट्रस्ट के खातों में फर्जी वाउचर बनाने और कागजी हेराफेरी करने का मुख्य किरदार।

  • अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव: ये सभी मंदिर की दान प्रक्रिया और काउंटिंग टीम का हिस्सा थे, जो मिलकर इस सिंडिकेट को चला रहे थे।

कोर्ट रूम का ड्रामा: पुलिस ने मांगी थी रिमांड, अदालत ने भेजा जेल

इससे पहले बीते शुक्रवार (26 जून) को पुलिस ने इन सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें 29 जून तक की प्रारंभिक न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। सोमवार को रिमांड अवधि खत्म होने पर जब इन्हें दोबारा अदालत के समक्ष कड़ी सुरक्षा में पेश किया गया, तो पुलिस और एसआईटी के वकीलों ने आगे की पूछताछ, नए ठिकानों का पता लगाने और बाकी की रकम बरामद करने के लिए आरोपियों की पुलिस रिमांड की मांग की। हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय अदालत ने सभी आठों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में तब्दील करते हुए 13 जुलाई तक जिला जेल भेजने का हुक्म जारी कर दिया।

ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों तक पहुंची जांच की आंच, इस्तीफे की चर्चा तेज

जैसे-जैसे एसआईटी की जांच की परतें खुल रही हैं, राम मंदिर से जुड़े कई रसूखदार और उच्च पदाधिकारियों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। इस महाघोटाले के तार सीधे तौर पर अंदरूनी व्यवस्था से जुड़े होने के कारण जांच टीम ने ट्रस्ट के कुछ शीर्ष अधिकारियों से भी मैराथन पूछताछ की है। चर्चा तो यहां तक है कि मुख्य आरोपी टिन्नू यादव के साथ नाम जुड़ने और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे तक की स्थिति बन गई है। फिलहाल एसआईटी बैंक खातों के ट्रांजैक्शन, मंदिर के सीसीटीवी फुटेज और ज़ब्त किए गए दस्तावेजों का मिलान करने में जुटी है ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि यह खेल कितने लंबे समय से चल रहा था और इसमें और कौन-कौन से सफेदपोश शामिल हैं।

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